लखनऊ। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को 12 घंटे से अधिक समय तक चली तीखी बहस के बाद बुधवार देर रात लोकसभा में बहुमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में सुधार करना, प्रौद्योगिकी-संचालित प्रबंधन लागू करना, जटिलताओं का समाधान करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वक्फ विधेयक की […]
लखनऊ। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को 12 घंटे से अधिक समय तक चली तीखी बहस के बाद बुधवार देर रात लोकसभा में बहुमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में सुधार करना, प्रौद्योगिकी-संचालित प्रबंधन लागू करना, जटिलताओं का समाधान करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सरकार ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह देशहित में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि विपक्ष ने इसे असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया। इस विधेयक को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। अंततः इसे लोकसभा में 288 मतों के पक्ष और 232 मतों के विपक्ष में पारित किया गया। यह मतदान रात 2 बजे तक चला। सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के सुचारु प्रबंधन के लिए जरूरी था, वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधेयक से मुस्लिम की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ जाएगा।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इससे वक्फ बोर्ड और सरकार किसी भी मस्जिद या धार्मिक संस्था के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक पूरी तरह से पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने वाला है। रिजिजू ने कहा कि 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने वक्फ कानून में कुछ ऐसे संशोधन किए, जिनसे कई संपत्तियां दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून में ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस कानून के तहत वक्फ संपत्तियों पर गैर-मुस्लिमों का नियंत्रण बढ़ जाएगा और मदरसों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने चर्चा के दौरान गुस्से में आकर विधेयक की प्रति तक फाड़ दी। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कानून सरकार को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण देने का प्रयास है और इससे मुस्लिम समुदाय की स्वायत्तता प्रभावित होगी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करेगा।
विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके पारित होने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच फिर से टकराव देखने को मिल सकता है। लोकसभा में जिस तरह तीखी बहस देखने को मिली, उससे संकेत मिलता है कि राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर गहरी चर्चा होगी।