लखनऊ। चीन के हांगझोउ में हो रहे एशियन गेम्स में यूपी की बेटी पारुल चौधरी ने स्वर्मिण दौड़ लगाई है। उत्तर प्रदेश के मेरठ की अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी ने भारत को पहले चांदी और फिर सोना दिलाया। सोमवार को 3,000 मीटर स्टीपल चेज में पारुल ने रजत पदक जीता तो वहीं मंगलवार को 5,000 […]
लखनऊ। चीन के हांगझोउ में हो रहे एशियन गेम्स में यूपी की बेटी पारुल चौधरी ने स्वर्मिण दौड़ लगाई है। उत्तर प्रदेश के मेरठ की अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी ने भारत को पहले चांदी और फिर सोना दिलाया। सोमवार को 3,000 मीटर स्टीपल चेज में पारुल ने रजत पदक जीता तो वहीं मंगलवार को 5,000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अपने स्वर्णिम रफ़्तार को पदक में बदलने वाली पारुल हालांकि राष्ट्रीय रिकार्ड से महज 4.4 सेकेंड पीछे रह गई।
बता दें कि पारुल ने इस वर्ष जुलाई में बैंकॉक में आयोजित एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में दो पदक जीते थे। एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में पारुल ने 3,000 मीटर स्टीपल चेज में स्वर्ण पदक जीता था जबकि 5,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता था। वहीं अब एशियन गेम्स में स्टीपल चेज में रजत पदक और 5,000 मीटर में स्वर्ण पदक जीता है। मंगलवार को 5000 मीटर की दौड़ में पारुल जापान की रीरिका हीरोनेका से पीछे चल रही थीं लेकिन अंतिम 40 मीटर में उन्होंने जापानी प्रतिद्वंदी को पीछे छोड़कर सोना जीत लिया।
पारुल चौधरी इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। गोल्डन गर्ल पारुल का जीवन संघर्षमय रहा है। साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाली पारुल ने अपनी बड़ी बहन के साथ गांव में ही खेलों में भाग लेना शुरू किया। गांव की टूटी-फूटी सड़कों पर ही अभ्यास करती थीं। अपने कोच के कहने पर स्टेडियम में जाकर अभ्यास करना शुरू किया। उनकी मां राजेश देवी कहती है कि उनकी बिटिया ने तो गाय का नोनी घी और चने की रोटी खाकर ही गोल्ड जीत लिया।