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नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

लखनऊ। चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 31 मार्च से हो गई। नवरात्रि का पर्व देशभर बड़ी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। वहीं चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार, मां कात्यायनी को शक्ति और विजय की देवी […]

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Worship Maa Katyayani
  • April 3, 2025 11:04 am Asia/KolkataIST, Updated 20 hours ago

लखनऊ। चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 31 मार्च से हो गई। नवरात्रि का पर्व देशभर बड़ी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। वहीं चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार, मां कात्यायनी को शक्ति और विजय की देवी माना जाता है। इनकी सवारी शेर है और वे चार भुजाओं वाली हैं। साथ ही मां कात्यायनी सिर पर सदैव मुकुट सुशोभित रहता है। आइए जानते हैं कि पूजन विधि और मंत्र

मां कात्यायनी का महत्व

ऐसा माना जाता है कि अगर आपकी शादी नहीं हो रही है या विवाह में किसी तरह की बाधा है तो आपको मां कात्यानी की पूजा करनी चाहिए। मा कात्यानी की विधिपूर्वक पूजा करने से विवाह संबंधित सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती है। मां कात्यानी को सफलता और यश का प्रतीक माना जाता हैं। मां कात्यानी की पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। मां कात्यानी की पूजा करने से सफलता और बल की प्राप्ति होती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त आज 3 अप्रैल 2025 सुबह 07 बजकर 02 मिनट पर शुरू हो चुका है और यह पूरे दिन जारी रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 04:56 पर शुरू होगा। जिसकी समाप्ति 05:43 पर होगी। वहीं गोधूलि मुहूर्त की बात करें तो गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 51मिनट पर शुरू होगा। वहीं इसका समापन 07 बजकर14 मिनट पर समाप्त होगा। निशिता मुहूर्त रात के 12 बजे आरंभ होगा जो 1 बजकर 3 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।

पूजा करने की विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। हो सके तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। आज के दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है, क्योंकि यह रंग मां कात्यानी को प्रिय होता है। घर के मंदिर मां कात्यानी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। मां को पीले फूल, रोली, धूप, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाए। मां को पीले हलवा, मिठाई या शहद का भोग लगाएं। मां के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।


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