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आज है महीने का आखिरी प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

लखनऊ। आज प्रदोष व्रत किया जा रहा है। पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार महीने मार्च का आखिरी प्रदोष व्रत वीरवार यानी 27 मार्च को रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन […]

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  • March 27, 2025 11:05 am Asia/KolkataIST, Updated 7 days ago

लखनऊ। आज प्रदोष व्रत किया जा रहा है। पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार महीने मार्च का आखिरी प्रदोष व्रत वीरवार यानी 27 मार्च को रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शंकर की पूजा की जाती है।

प्रदोष व्रत को करने के लाभ

इस दिन भगवान शिव की पूजा करने सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को आरोग्य का वरदान भी मिलता है। साथ ही महादेव की कृपा से जीवन में आ रही सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। इस व्रत में विशेष रूप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र और भांग- धतूरा अर्पित किए जाते है। आज के दिन शिव मंत्रों का जाप करना जरूरी होता है। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा की जाती है।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

आइए जानते हैं, प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा और इसकी पूजा विधि। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 मार्च 2025, देर रात 1 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इसकी समाप्ति 27 मार्च 2025, रात 11 बजकर 3 मिनट पर होगी। प्रदोष व्रत की पूजा खास तौर पर प्रदोष काल में की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त: 27 मार्च 2025, शाम 6 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। भगवान शिव को याद करते हुए व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर बेलपत्र, आक के फूल, धूप चढ़ाएं। साथ ही शिवलिंग पर जल अर्पित करें। पूजा के दौरान प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। भगवान की आरती उतारें। इसके बाद भगवान शिव को उनकी प्रिय खीर का भोग लगाएं। ध्यान रहे, भगवान शिव की पूजा करने के साथ-साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की पूजा भी करनी चाहिए। पूजा करने के बाद सभी में प्रसाद वितरित करें।


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