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आज है पापमोचिनी एकादशी, जानें इसका महत्व और पूजा विधि

लखनऊ। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु जी को समर्पित होता है। इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती […]

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Papamochani Ekadashi
  • March 25, 2025 12:34 pm Asia/KolkataIST, Updated 1 week ago

लखनऊ। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु जी को समर्पित होता है। इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

एकादशी का शुभ मुहूर्त

इस दिन व्रत करने से व्यक्ति अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति पा सकता है। आइए जानते हैं कब रखा जाता है पापमोचिनी एकादशी का व्रत। साथ ही जानें इस व्रत का महत्व और पूजा विधि। एकादशी तिथि के शुभ मुहूर्त का आरंभ सुबह 25 मार्च को 5 बजकर 6 मिनट पर होगा। वहीं,एकादशी तिथि की समाप्ति 26 मार्च दोपहर में 3 बजकर 45 मिनट पर होगी। ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक 25 मार्च को ही पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी 26 मार्च को दोपहर में 12 बजे के बाद किया जाएगा।

एकादशी का महत्व

पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सारे पापों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। हिंदू धर्म में पापमोचिनी व्रत का बहुत महत्व होता है। पापमोचिनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को धन संपत्ति का सुख प्राप्त होता है। साथ ही घरों में माता लक्ष्मी का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत करते हैं, उन पर भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है।

पापमोचिनी एकादशी की पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान सू्र्य को अर्घ्य देना चाहिए। फिर मंदिर की साफ सफाई करने के बाद दीप जलाना चाहिए। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद दोनों को पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। साथ ही माता लक्ष्मी को श्रृंगार सामग्री चढ़ानी चाहिए। भगवान विष्णु और माता पार्वती को मीठे का भोग लगाएं। फिर व्रत कथा का पाठ करके अंत में भगवान की पूरी श्रद्धा के साथ आरती करें। पूजा करने के बाद सभी में प्रसाद वितरित करें।


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