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चैत्र नवरात्रि में इस तरह करें कन्या पूजन, मां दुर्गा से मिलेगा आशीर्वाद

लखनऊ। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराने के बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। कन्या पूजन करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की खास कृपा बनी रहती है। इस […]

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  • April 5, 2025 11:11 am Asia/KolkataIST, Updated 1 day ago

लखनऊ। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराने के बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। कन्या पूजन करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की खास कृपा बनी रहती है। इस साल कन्या पूजन 5 और 6 तारीख के दिन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वहीं कुछ लोग नवमी के दिन कन्या को भोजन कराते हैं।

कैसे करें कन्या पूजन

चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि मां दुर्गा की उपासना का दिन होता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक कन्याओं को मां दुर्गा का जीवित रूप माना गया है, इसलिए नवमी के दिन उनकी पूजा करने से माता रानी का आशीर्वाद मिलता है।
नवमी तिथि पर 2 से 10 साल की आयु की 9 कन्याओं का पूजन किया जाता है। कन्याओं के साथ ही एक बालक (लंगूर) को भी कन्या पूजन में शामिल किया जाता है।

कन्याओं का चुनाव

लंगूर को भगवान भैरव का रूप माना जाता है। सर्वप्रथम सभी कन्याओं के पांव धोएं जाते हैं। उन्हें सीट पर बिठाया जाता है। पहले उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है। उन्हें अक्षत तथा फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद हाथों में लाल चुनरी बांधी दी जाती है। उनकी प्लेट में पूड़ी, चना और सूजी का हलवा परोसा जाता है। साथ ही केला और नारियल भी दिया जाता है। भोजन कराने की यह परंपरा शुभ मानी जाती है।

श्रद्धा प्रेम के साथ करें विदा

भोजन के बाद हर कन्या को दक्षिणा दी जाती है। आप दक्षिणा में पैसे, वस्त्र या कुछ सामान भेंट कर सकते हैं। फिर मां रानी के जयकारे लगाए जाते हैं। श्रद्धा और प्रेम के साथ उन्हें विदा किया जाता है। विदा करते समय पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। कन्या पूजन के दौरान पूर्ण शुद्धता और श्रद्धा का पालन करना चाहिए।


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