लखनऊ। इन दिनों होली की रौनक हर तरफ देखने को मिल रही है। रंगों के त्योहार को लोग धूमधाम से पूरे देश में मनाते है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। होली फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल होली का त्योहार 14 मार्च को मनाया जा […]
लखनऊ। इन दिनों होली की रौनक हर तरफ देखने को मिल रही है। रंगों के त्योहार को लोग धूमधाम से पूरे देश में मनाते है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। होली फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल होली का त्योहार 14 मार्च को मनाया जा रहा। रंगों के इस त्योहार में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।
गुजिया इन्हीं पकवानों में से एक है, जिसके बिना होली का पर्व अधूरा माना जाता है। यह भारत में बनने वाली एक लोकप्रिय मिठाई है, जिसे आमतौर पर होली के मौके पर मनाया जाता है। यह कई लोगों की पसंदीदा मिठाई होती है, जिसे लोग बड़ी चांव से खाते हैं। लेकिन क्या आपको बता हैं कि रंगो के इस त्योहार में गुजिया क्यों बनाई जाती है। गुजिया और होली का क्या संबंध है। चलिए आपको बताते हैं गुजिया के इतिहास के बारे में ।
हर साल होली के मौके पर गुजिया बनाई जाती है। साथ ही इसका भोग भी लगाया जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में होली के मौके पर बनने वाली गुजिया असल में भारतीय नहीं है। यह तुर्किए के रास्ते होते हुए भारत पहुंची थी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देशभर में मशहूर हो गई। दरअसल, कई इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि गुजिया तुर्किए की फेमस मिठाई बकलावा से प्रेरित है। बकलावा को मैदे की कई परतों के बीच ड्राई फ्रूट्स, चीनी और शहद की फिलिंग भरकर बनाया जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि बकलावा केवल शाही परिवारों में बनाई जाने वाली मिठाई है। इसी मिठाई की तर्ज पर भारत में गुजिया की शुरुआत हुई। इतिहासकारों की मानें तो गुजिया का जिक्र सबसे पहले 13वीं शताब्दी में मिलता है, जब इसे धूप में सुखाकर खाया जाता था। बाद में बदलते समय के साथ इसमें कई एक्सपेरिमेंट किए गए और इसका वर्तमान गुजिया के रूप में सामने आया। हालांकि इसकी उत्पत्ति को लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं है।