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महाशिवरात्रि में गदा-त्रिशूल लेकर पहुंचे नागा साधु, आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं की लंबी भीड़

लखनऊ। महाशिवरात्रि के दिन नागा साधु स्नान के लिए शिविर से रवाना है। हाथ में गदा-त्रिशूल लेकर स्नान के लिए पहुंचे। शरीर पर भस्म और फूलों की माला डाले और हाथी-घोड़े की सवार होकर हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए घाट तक पहुंचे। काशी में कुछ इस अंदाज में 7 शैव अखाड़ों के लगभग 10 […]

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Mahashivratri
  • February 26, 2025 3:35 am IST, Updated 14 hours ago

लखनऊ। महाशिवरात्रि के दिन नागा साधु स्नान के लिए शिविर से रवाना है। हाथ में गदा-त्रिशूल लेकर स्नान के लिए पहुंचे। शरीर पर भस्म और फूलों की माला डाले और हाथी-घोड़े की सवार होकर हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए घाट तक पहुंचे। काशी में कुछ इस अंदाज में 7 शैव अखाड़ों के लगभग 10 हजार से ज्यादा नागा साधु बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं।

बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार किया गया

नागा संतों के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के रास्ते की बैरिकेडिंग की गई है। भारी संख्या में श्रद्धालु नागा संतों का आशीर्वाद लेने के लिए रात से किनारे पर खड़े हैं। सबसे पहले जूना अखाड़े के नागा संन्यासी मंदिर पहुंचे। महामंडलेश्वर अवधेशानंद भी इनके साथ हैं। वहीं मंदिर के बाहर आधी रात से ही भक्तों की लाइनें लगी हुई हैं। लगभग 2 लाख भक्त 3km लंबी कतार में आशीर्वाद के लिए खड़े हैं। सुबह 2:15 बजे बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती हुई। बाबा विश्वनाथ का दूल्हे की तरह श्रृंगार किया गया।

साधु बाबा के दर्शन के लिए आते हैं

इसके बाद, मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। मंगला आरती के दौरान प्रवेश रोकने पर श्रद्धालुओं ने बवाल मचा दिया। उनकी पुलिसकर्मियों से बहस हो गई। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह श्रद्धालुओं को समझा-बुझाकर शांत कराया। महाकुंभ पर महाशिवरात्रि का यह संयोग 6 साल बाद बना है। इससे पहले, 2019 के कुंभ में ऐसा संयोग बना था। उस समय कुंभ में 15 लाख श्रद्धालु काशी पहुंचे थे। कुंभ के बाद महाशिवरात्रि की खास बात यह रहती है कि शैव अखाड़े के नागा साधु भी बाबा का दर्शन करने आते हैं।

बाबा का जलाशभिषेक किया

8 मार्च 2024, यानी पिछले साल शिवरात्रि पर 11 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए थे। आज 25 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। डॉक्टर वरुण गिरि ने कहा कि आज बहुत ही खुशी का दिन है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन अच्छे से हुए। बाबा विश्वनाथ पर जल चढ़ाया। इससे अधिक आनंद की बात नहीं हो सकती।


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