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UP: राजू पाल की हत्या से शुरू हुई थी उमेश और माफिया अतीक अहमद में दुश्मनी, जानिए पूरी घटना

लखनऊ। बसपा विधायक रहे राजू पाल मर्डर केस के मुख्य गवाह उमेश पाल को शुक्रवार को घर में घुसकर गोली मार कर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने उमेश पर सुलेम सराय स्थित उसके आवास पर घुसकर कई राउंड फायर किया और फरार हो गया। इस हत्या का आरोप उमेश के परिजनों ने अतीक अहमद […]

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  • February 25, 2023 5:45 am Asia/KolkataIST, Updated 2 years ago

लखनऊ। बसपा विधायक रहे राजू पाल मर्डर केस के मुख्य गवाह उमेश पाल को शुक्रवार को घर में घुसकर गोली मार कर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने उमेश पर सुलेम सराय स्थित उसके आवास पर घुसकर कई राउंड फायर किया और फरार हो गया। इस हत्या का आरोप उमेश के परिजनों ने अतीक अहमद पर लगाया। गौरतलब है कि अतीक अहमद साल 2005 में हुए बीएसपी विधायक राजू पाल हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। जबकि उमेश पाल हत्याकांड का गवाह था।

मुख्य गवाह बनने के कारण अतीक ने उमेश को माना दुश्मन

बता दें कि पूर्व सांसद माफिया अतीक अहमद और उमेश पाल के बीच दुश्मनी बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के बाद शुरू हुई थी। राजू पाल की हत्या के बाद उमेश पाल इस घटना के मुख्य गवाह बने। जिस कारण अतीक अहमद गिरोह ने उमेश को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान लिया। उमेश पाल बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल के करीबी थे। सीबीआई का गवाह बनने के बाद अतीक अहमद लगातार उमेश को टार्चर करता था। उसे कई बार जान से मारने की धमकी दी गई। पूजा पाल भी आशंका जता चुकी थी कि गवाह को प्रभावित करने के लिए अतीक अहमद उमेश पाल की हत्या कर सकता है।

डराने के लिए कर लिया था अपहरण

उमेश पाल को डराने के लिए 28 फरवरी 2008 को अतीक अहमद गिरोह ने उसका अपहरण कर लिया। अज्ञात जगह ले जाकर अतीक अहमद के गुर्गों ने उमेश पाल को मारा-पीटा, लेकिन उमेश पाल डरे नहीं और माफिया व उसके आदमियों के खिलाफ हमले की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। इसके बाद इस अपहरण मामले में 11 जुलाई 2016 को गवाही देने के लिए कचहरी पहुंचे उमेश पाल पर कोर्ट में ही हमला कराया गया। जिसमें उमेश पाल बाल-बाल बच गए। इसके बाद साल 2016 में 14 जुलाई को धूमनगंज के जितेंद्र पटेल की हत्या में उमेश को नामजद करा दिया। हालांकि निर्दोष उमेश पाल को इसमें बाइज्जत बरी कर दिया गया।

सुरक्षा के लिए मिले थे सिपाही

इसके बाद भी अतीक अहमद ने उमेश पाल का पीछा नहीं छोड़ा। वो तरह-तरह के हथकंडे अपना कर परेशान करता रहा। 1 करोड़ की मांग भी की, साथ में धमकी दिया कि यदि पैसे नहीं दिए तो जान से मरवा दूंगा। उमेश पाल ने जिले व राजधानी के अफसरों को जान के खतरे की चिट्ठी लिख कर दी। शासन के निर्देश पर उमेश को हथियारों के साथ दो सिपाही सुरक्षा के लिए दिए गए लेकिन फिर भी अतीक अहमद और उसके साथियों ने उसकी जान ले ली।


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