लखनऊ: भारत में कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से कुछ मंदिर अपने रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण पूरी दुनिया में मशहूर हैं। उनमें से एक है तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर जिसे हम तिरूपति बालाजी मंदिर भी कहते हैं. यह एक हिंदू मंदिर है जो भारत […]
लखनऊ: भारत में कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से कुछ मंदिर अपने रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण पूरी दुनिया में मशहूर हैं। उनमें से एक है तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर जिसे हम तिरूपति बालाजी मंदिर भी कहते हैं. यह एक हिंदू मंदिर है जो भारत के आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमाला में स्थित है। जहां देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग भगवान विष्णु के एक रूप भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करने आते हैं।
बता दें कि तिरूपति बालाजी मंदिर की गिनती देश के सबसे अमीर मंदिरों में होती है, क्योंकि यहां भक्त हर साल अपनी श्रद्धा के अनुसार कई करोड़ रुपये, पैसा और सोना चढ़ाते हैं। इसके अलावा लोग यहां अपने बाल भी दान करते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में बाल दान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।
तिरूपति बालाजी का यह प्रसिद्ध मंदिर श्री वेंकटेश्वर स्वामी यानी भगवान विष्णु को समर्पित है। तिरुमाला के इस मंदिर में श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ विराजमान हैं। यह खूबसूरत मंदिर भारतीय वास्तुकला और शिल्प कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक बार भगवान बालाजी की मूर्ति पर बहुत सारी चींटियों का पहाड़ बन गया था। जिस पर प्रतिदिन एक गाय आती थी और दूध देकर चली जाती थी। जब यह बात गाय के मालिक को पता चली तो उसने गुस्से में आकर गाय को कुल्हाड़ी से मार डाला। इससे बालाजी के सिर पर चोट लग गयी और उनके बाल झड़ गये.
इसके बाद भगवान तिरूपति बालाजी की माता नीला देवी ने अपने बाल काटकर बालाजी के सिर पर रख दिये। ऐसे में भगवान के सिर का घाव पूरी तरह ठीक हो गया। जिसके बाद भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि बाल शरीर की सुंदरता बढ़ाते हैं, लेकिन आपने मेरे लिए अपने बालों का बलिदान दे दिया। आज से जो कोई भी मेरे लिए अपने बालों की बलि देगा उसकी हर इच्छा पूरी होगी. तब से भक्तगण अपने बाल तिरूपति बालाजी मंदिर में दान करते आ रहे हैं।