लखनऊ। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती है। साथ ही गणेश भगवान की विधि-विधान से पूजा की जाती है। चैत्र माह में पड़ने की वजह से इसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस साल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 17 मार्च […]
लखनऊ। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती है। साथ ही गणेश भगवान की विधि-विधान से पूजा की जाती है। चैत्र माह में पड़ने की वजह से इसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस साल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 17 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। गणपति भगवान की पूजा से जीवन में चल रही सारी परेशानियां नष्ट हो जाती हैं। इसलिए इन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है।
संकष्टी चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 मार्च यानी आज शाम 7 बजकर 33 मिनट पर होगी। वही इस तिथि की समाप्ति 18 मार्च को रात 10 बजकर 09 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा। 7 बजे से 10 बजे तक का शुभ मुहूर्त है। इस मुहूर्त में विघ्नहर्ता की पूजा करने से आपको मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे दिन से जो भी मांगो, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
संकष्टी चतुर्थी पर सुबह उठकर जल्दी स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद लाल और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। मंदिर में लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणपति स्थापित करें। भगवान गणेश की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करें। भगवान गणपति की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। भगवान गणपति को लाल गुलाब के फूल अर्पित करें। पूजा में तिल के लड्डू, चावल, फूल तांबे के लौटे में जल, गुड़, मोली, रोली, धूप, प्रसाद के तौर पर केला और मोदक रखें। विधिपूर्वक पूजा करने के बाद मोदक को प्रसाद के रूप में बांटे।
भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजनीय माना जाता है। हर शुभ कार्य से पहले गणपति जी की पूजा की जाती है। इनका व्रत करने से भक्तों की सभी बाधाएं दूर होती हैं। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का व्रत करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता की कथा सुनने से गणपति की कृपा प्राप्त होती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के कम से कम 12 नामों का भी स्मरण करना चाहिए, ताकि भविष्य में आने वाली सभी कठिनाइयों दूर हो। जीवन सुखमय हो।