लखनऊ। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। […]
लखनऊ। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। होलिका दहन को संवत जलाना भी कहा जाता है।
इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया है। इसलिए होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन पैदा हो रही है। आइए आज जानते हैं कि होलिका दहन पर भद्रा का साया कब से कब तक रहेगा। भद्रा लगने की वजह से होलिका दहन का मुहूर्त क्या है, होलिका दहन से पूर्व पूजा का क्या विधान है।
होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। इस बार भद्रा काल लगने की वजह से खास ध्यान दिया जा रहा है। भद्रा के साए में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 13 मार्च यानी आज सुबह 10.36 से लेकर 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल की शुरूआत हो जाएगी। भद्रा काल रात 11.26 तक रहेगा। भद्रा काल से बचते हुए 13 मार्च की रात को 11.27 के बाद होलिका को दहन किया जाएगा।
पूजा की थाली लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाएं। उस भूमि को चुमकर माथे से लगाएं। भूमि पर थोड़ा सा जल चढ़ाएं। इसके बाद उसी स्थान पर घी का दीपक जलाकर रखें। गोबर के उपले, हल्दी और काले तिल के दाने होलिका में चढ़ाएं। होलिका की तीन बार परिक्रमा करते हुए कलावा बांधें। फिर होलिका में सूखा हुआ नारियल चढ़ाएं। आखिर में घर के लोगों को और स्वयं को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं।