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       <title>Today Supreme Court News | Latest Supreme Court News | Breaking Supreme Court News in English | Latest Supreme Court News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Supreme Court समाचार:Today Supreme Court News ,Latest Supreme Court News,Aaj Ka Samachar ,Supreme Court समाचार ,Breaking Supreme Court News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://up.inkhabar.com/tag/supreme-court</link>
        <lastBuildDate>May 5, 2026, 12:21 am</lastBuildDate>
        <copyright>UP Inkhabar</copyright>
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            <title>UP Inkhabar</title>
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        </image><item><title>संभल मस्जिद कुंए पर पूजा-पाठ पर लगी रोक, लेकिन सार्वजनिक इस्तेमाल की दी इजाजत</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/worship-was-banned-at-the-well-of-sambhal-mosque-but-public-use-was-allowed/</link><pubDate>January 10, 2025, 8:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/download-7.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने संभल में शाही जामा मस्जिद के पास स्थित कुएं को हरि मंदिर का कुआं घोषित करने वाली नगर पालिका की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। मस्जिद समिति ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी। समिति का कहना था कि अगर कुएं की खुदाई ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ: &lt;/strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने संभल में शाही जामा मस्जिद के पास स्थित कुएं को हरि मंदिर का कुआं घोषित करने वाली नगर पालिका की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। मस्जिद समिति ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी। समिति का कहना था कि अगर कुएं की खुदाई कर उसे मंदिर का कुआं घोषित कर दिया जाए तो वहां पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी और कहा कि अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी लोग कर सकते हैं कुएं का इस्तेमाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ किया कि कुएं का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। इस पर कोई रोक नहीं है। दरअसल मस्जिद पक्ष के वकील इसे सिर्फ मस्जिद का कुआं बता रहे थे और वहां किसी भी तरह की अन्य गतिविधि पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह सार्वजनिक स्थान पर बना कुआं है, मस्जिद के अलावा अन्य लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुआं सार्वजनिक जमीन पर है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यूपी सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि कुआं सार्वजनिक भूमि पर है। मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि आधा कुआं मस्जिद के अंदर है और आधा बाहर। कोर्ट ने कुएं को लेकर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका आदेश केवल एक कुएं तक सीमित है जो मस्जिद के प्रवेश द्वार के पास है। संभल में अन्य कुओं और बावड़ियों की खुदाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है जो प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू पक्ष के वकील ने बताया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले की सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 2006 तक हिंदू उस कुएं में पूजा करते थे। इलाके में एक समुदाय विशेष की आबादी बढ़ने के कारण हिंदुओं ने वहां जाना बंद कर दिया। अब यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि यह मस्जिद का कुआं है। वे अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने इस संबंध में सबूत पेश करेंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>यूपी में 27 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ, हाईकोर्ट का आदेश बरकरार</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/the-way-is-cleared-for-recruitment-of-teachers-on-27-thousand-posts-in-up-high-courts-order-remains-intact/</link><pubDate>December 8, 2024, 6:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-13-2-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती में खाली रह गई 27 हजार से ज्यादा सीटों का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक शिक्षा में सहायक शिक्षकों के 68,500 पदों पर भर्ती के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश को बरकरार रखा है. इ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती में खाली रह गई 27 हजार से ज्यादा सीटों का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक शिक्षा में सहायक शिक्षकों के 68,500 पदों पर भर्ती के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश को बरकरार रखा है. इस मामले में हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकार खाली सीटों को भरे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, इस मामले में कुछ अभ्यर्थी कटऑफ अंक कम कर रिक्त पदों पर चयन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है. अब याचिका खारिज होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक आगे बढ़ेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हुए शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद करीब 1.37 लाख शिक्षकों के पद खाली हो गये. इसके बाद यूपी सरकार ने दो चरणों में बहाली की.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एक चरण में 68,500 और 69 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती की गई. इसके बाद इसकी परीक्षा आयोजित की गई. जब इसका परिणाम घोषित किया गया तो अनारक्षित वर्ग के लिए कटऑफ 45 प्रतिशत निर्धारित की गई, जबकि ओबीसी और अन्य श्रेणियों के लिए कटऑफ 40 प्रतिशत निर्धारित की गई। लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण 27 हजार से ज्यादा पद खाली रह गये.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या था हाईकोर्ट का फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा में कॉपियां बदले जाने का आरोप लगाकर कटऑफ कम करने की मांग की थी. इसके लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की गई थी. तब हाई कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. तब सरकार इस मामले में डबल बेंच में गयी थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;तब डबल बेंच ने आदेश दिया था कि सरकार खाली पदों को भरे. लेकिन कटऑफ अंक कम कर नियुक्ति की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए अभ्यर्थियों की याचिका वहां भी खारिज कर दी गई.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>SC: सरकारी बाबुओं की पत्नी को अध्यक्ष बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा सवाल</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/sc-supreme-court-asked-yogi-government-a-question-about-making-wife-of-government-officials-as-president/</link><pubDate>December 3, 2024, 8:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/yog-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपी सरकार को टॉप नौकरशाहों की पत्नियों को समिति के अध्यक्ष पदों पर नियुक्ति को लेकर बेहद अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को लेकर आपत्ति जताई है। आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी के जिला मजिस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपी सरकार को टॉप नौकरशाहों की पत्नियों को समिति के अध्यक्ष पदों पर नियुक्ति को लेकर बेहद अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को लेकर आपत्ति जताई है। आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी के जिला मजिस्ट्रेट, सचिवों, जिलाधिकारियों और कई अन्य नौकरशाहों की पत्नियां सहकारी समितियों के अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उपनियमों के तहत ऐसा करना जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम के उपनियमों के तहत ऐसा करना जरूरी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नियमों में संशोधन करने का निर्देश जारी किया। निर्देश देते हुए कहा कि औपनिवेशक मानसिकता को दर्शाने वाली प्रथा को समाप्त करना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुईयां की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला बुलंदशहर की 1957 से कार्यरत जिला महिला समिति के विवाद से जुड़ा है, जिसमें समिति को सरकार की ओर से पट्टे पर दी गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हार्टकोर्ट ने सुनवाई से मना किया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जमीन के लिए बुलंदशहर के कार्यवाहक डीएम की पत्नी को अध्यक्ष बनाया जाना जरूरी था क्योंकि सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के उपनियमों में ऐसा प्रावधान है। समिति ने नियमों में संशोधन किया, जिसे पहले उप-रजिस्टरार ने रद्द कर दिया और फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी समिति की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। अब समिति ने आखिर में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को लेकर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को भी बुलंदशहर के जिलाधिकारी की पत्नी को जिले में रजिस्ट्रर सोसाइटी की अध्यक्ष के रूप में काम करने के लिए अनिवार्य करने वाले अजीबो गरीब नियम को स्वीकृति देने पर राज्य सरकार की खिंचाई की। इसे राज्य की सभी महिलाओं के लिए अपमानजनक करार दिया। कोर्ट ने कहा था, &amp;#8216;चाहे वह रेड क्रॉस सोसाइटी हो या बाल कल्याण समिति, हर जगह जिलाधिकारी की पत्नी को ही अध्यक्ष बनाया जाता हैं। ऐसा क्यों होना चाहिए?&amp;#8217;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>&amp;#8216;लिमिट में रहो… &amp;#8216;, UP पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, अनुराग दुबे से जुड़ा है मामला</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/stay-within-limits-supreme-courts-advice-to-up-police-case-related-to-anurag-dubey/</link><pubDate>November 28, 2024, 11:43 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/download-14-2-300x158.png</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यूपी पुलिस पॉवर एंजॉय कर रही है. राज्य पुलिस को संवेदनशील होने की जरूरत है. जस्टिस सूर्यकांत ने आज कोर्ट में यह टिप्पणी गैंगस्टर अनुराग दुबे की गिरफ्तारी पूर्व जमान...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ: &lt;/strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यूपी पुलिस पॉवर एंजॉय कर रही है. राज्य पुलिस को संवेदनशील होने की जरूरत है. जस्टिस सूर्यकांत ने आज कोर्ट में यह टिप्पणी गैंगस्टर अनुराग दुबे की गिरफ्तारी पूर्व जमानत अर्जी (अग्रिम जमानत) पर सुनवाई के दौरान की।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनुराग दुबे पुलिस से डरे हुए हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अनुराग दुबे के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं और वह जांच के लिए पुलिस के सामने पेश होने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि पुलिस उनके खिलाफ नया मामला दर्ज करेगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूपी पुलिस को कोर्ट से मिला आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने यूपी पुलिस की ओर से पेश वकील से पूछा, आप कितने केस दायर करेंगे? आप अपने डीजीपी से कहें कि हम सख्त आदेश पारित कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग दुबे को तत्काल राहत देते हुए यूपी पुलिस को आदेश दिया है कि अग्रिम जमानत पर सुनवाई तक अनुराग दुबे को गिरफ्तार न किया जाए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गिरफ्तारी से पहले ले कोर्ट से इजाजत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग दुबे को गिरफ्तारी से राहत देते हुए यूपी पुलिस को निर्देश दिया कि अगर पुलिस को लगता है कि किसी खास मामले में गिरफ्तारी जरूरी है तो उसे कोर्ट की इजाजत लेनी होगी और कारण बताना होगा. कोर्ट ने यूपी पुलिस के वकील से यह भी कहा कि अगर पुलिस अनुराग दुबे को कोर्ट की इजाजत के बिना गिरफ्तार करती है तो कोर्ट संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें अनुराग दुबे का पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अनुराग दुबे उर्फ ​​डब्बन के खिलाफ फर्रुखाबाद के मऊ दरवाजा थाने में धारा 84 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज है. अनुराग के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और जालसाजी सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है. कोर्ट में अनुराग के पेश नहीं होने के कारण घर के दीवार पर हाजिरी नोटिस चिपका दिया गया है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>लखीमपुर खीरी मामले में आरोपी आशीष मिश्रा की बढ़ी मुश्किलें, SC ने जारी किया नोटिस</title><link>https://up.inkhabar.com/crime/difficulties-increased-for-accused-ashish-mishra-in-lakhimpur-kheri-case-sc-issued-notice/</link><pubDate>November 27, 2024, 8:43 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/download-6-1-300x225.png</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाहों को धमकी देने के आरोप पर जवाब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी। हिंसा में...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाहों को धमकी देने के आरोप पर जवाब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंसा में आठ लोगों की हुई थी मौत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे से एक हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें उनके मुवक्किल को आरोपों का खंडन करने के बाद अपना रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हलफनामा दाखिल के लिए मिला था समय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शिकायतकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील ने बताया था कि उन्होंने आशीष मिश्रा पर गवाहों को डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की थी। सिद्धार्थ दवे ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि यह एक अंतहीन प्रक्रिया है. सिद्धार्थ दवे ने कहा, &amp;#8220;तस्वीरों में आशीष मिश्रा नहीं हैं. ये इस कोर्ट के लिए नहीं बल्कि बाहर के लिए है.&amp;#8221; इसके बाद शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा को चार हफ्ते के भीतर आरोपों से इनकार करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;22 जुलाई को मिली थी आशीष को जमानत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;22 जुलाई को कोर्ट ने आशीष मिश्रा को जमानत दे दी थी और उनके दिल्ली या लखनऊ जाने पर रोक लगा दी थी. 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई. हिंसा तब भड़की जब किसान इलाके में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। इस दौरान एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था. बाद में किसानों ने कथित तौर पर ड्राइवर और दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी. हिंसा में एक पत्रकार की भी जान चली गई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;फरवरी में बढ़ाई गई थी अंतरिम जमानत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;फरवरी में, शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा की अंतरिम जमानत बढ़ा दी थी और अपनी रजिस्ट्री को मामले की प्रगति पर ट्रायल कोर्ट से रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए कहा था। पिछले साल 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान आशीष मिश्रा को उत्तर प्रदेश या दिल्ली में नहीं रहना चाहिए. ऐसे मामले में गवाहों पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने से बचने के लिए किया गया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जमानत की शर्तों में मिली थी कई छूटें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;26 सितंबर को, शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत शर्तों में ढील दी, जिससे उन्हें अपनी बीमार मां की देखभाल और अपनी बेटी के इलाज के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यात्रा करने और रहने की अनुमति मिल गई। पिछले साल 6 दिसंबर को, ट्रायल कोर्ट ने किसानों की मौत के मामले में आशीष मिश्रा और 12 अन्य के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य दंडात्मक कानूनों के तहत कथित अपराधों के लिए आरोप तय किए, जिससे मुकदमा शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Breaking News: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, नहीं हटेंगे शब्द धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/breaking-news-historic-decision-of-supreme-court-words-secularism-and-socialist-will-not-be-removed/</link><pubDate>November 25, 2024, 7:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/sup-1-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान की प्रस्तावना में 1976 में पारित 42वें संशोधन के मुताबिक &amp;#8220;समाजवादी&amp;#8221; और &amp;#8220;धर्मनिरपेक्ष&amp;#8221; शब्दों को शामिल करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को रद...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान की प्रस्तावना में 1976 में पारित 42वें संशोधन के मुताबिक &amp;#8220;समाजवादी&amp;#8221; और &amp;#8220;धर्मनिरपेक्ष&amp;#8221; शब्दों को शामिल करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को रद्द कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रस्तावना शक्ति को सीमित नहीं करती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि संसद की संशोधन शक्ति प्रस्तावना तक भी फैली हुई है। प्रस्तावना को अपनाने की तारीख संसद की प्रस्तावना में संशोधन करने की शक्ति को सीमित नहीं करती है। इस आधार पर, पूर्वव्यापीता के तर्क को रद्द कर दिया गया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Breaking News: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा एक्ट को बताया सही, हाई कोर्ट के फैसले को किया खारिज</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/breaking-news-supreme-court-declared-up-madrassa-act-right-rejected-high-courts-decision/</link><pubDate>November 5, 2024, 6:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/sup-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। यूपी मदरसा एक्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मदरसा एक्ट संविधान का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यूपी मदरसा एक्ट संवैधानिक रुप से सही है। ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; यूपी मदरसा एक्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मदरसा एक्ट संविधान का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यूपी मदरसा एक्ट संवैधानिक रुप से सही है। उच्चतम न्यायालय ने कुछ प्रावधानों को छोड़कर यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 की संवैधानिक वैधता को कायम रखा है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>ज्ञानवापी मामले पर बोले रामभद्राचार्य &amp;#8216;हम हाई कोर्ट जाएंगे, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, फैसला हमारे पक्ष…</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/rambhadracharya-said-on-gyanvapi-case-we-will-go-to-the-high-court-we-will-go-to-the-supreme-court-the-decision-will-be-in-our-favor/</link><pubDate>October 27, 2024, 7:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/j-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: ज्ञानवापी मामले को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका शुक्रवार को वाराणसी कोर्ट में खारिज कर दी गई. इस मामले पर जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, &amp;#8216;हम इसे लेकर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और कोर्ट हमारे पक्ष में ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; ज्ञानवापी मामले को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका शुक्रवार को वाराणसी कोर्ट में खारिज कर दी गई. इस मामले पर जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, &amp;#8216;हम इसे लेकर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला देगा.&amp;#8217;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;&amp;#8216;हम सुप्रीम कोर्ट का लेंगे सहारा&amp;#8221;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ज्ञानवापी मामले पर मीडिया से बात करते हुए रामभद्राचार्य ने कहा, &amp;#8216;हम हाईकोर्ट जाएंगे, फिर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट हमारे अनुकूल फैसले देंगे. सनातन बोर्ड बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए. उसके लिए हम सरकार से अनुरोध करेंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू पक्ष द्वारा की गई याचिका खारिज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ज्ञानवापी मामले में वाराणसी कोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूरे परिसर का एएसआई सर्वे कराने की मांग की गई थी. हिंदू पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी याचिका में दलील देते हुए कहा था कि मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे 100 फीट का शिवलिंग है, जिसका पेनिट्रेटिंग रडार से पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाया जाएं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;वजूखाना का भी सर्वेक्षण जरुरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने यह भी मांग की थी कि वजूखाना का भी सर्वेक्षण कराया जाए जो कि पिछले अध्ययन सर्वेक्षण में नहीं किया गया था. इसके अलावा बचे हुए बेसमेंट का भी सर्वे किया जाना चाहिए. हिंदू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि हम वकील के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं. इसका पूरा रिसर्च करने के बाद हम उच्च न्यायालय जाएंगे। इससे पहले विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी दलील में कोर्ट के सामने सफाई दी कि पिछला ASI सर्वे अधूरा था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जिस जगह पर शिवलिंग है वहां सर्वे नहीं हुआ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने दावा किया कि जिस क्षेत्र में हिंदू पक्ष द्वारा शिवलिंग का दावा किया जा रहा है, वहां पिछली बार सर्वेक्षण नहीं किया गया था और इसलिए पूरे ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार के आदेश पर लगाई रोक, नहीं बंद होंगे सरकारी मदरसे</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/supreme-court-bans-yogi-governments-order-government-madrassas-will-not-be-closed/</link><pubDate>October 21, 2024, 8:37 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-65-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की योगी सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्रों को सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित करने के आदेश दिए गए थे। योगी सरकार के खिला...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की योगी सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्रों को सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित करने के आदेश दिए गए थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;योगी सरकार के खिलाफ दायर की गई थी याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;योगी सरकार के इस आदेश के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका दायर की थी. उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की रिपोर्ट पर आधारित था। इसमें शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का पालन नहीं करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने और सभी मदरसों की जांच करने के आदेश दिए थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस सूची पर CJI दिवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले को लेकर नोटिस जारी किया जाए. इसके अलावा 7 जून, 25 जून और 27 जून को जारी NCPCR रिपोर्ट और उसके बाद के सभी कदमों पर रोक लगा दी गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सपा चीफ ने बीजेपी पर लगाए थे आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि विपक्षी दलों ने इस मामले पर बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला था। इस दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी पर अल्पसंख्यक संस्थानों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप भी लगाया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Fee: पैसों की कमी के चलते नहीं भर पाया फीस, सुप्रीम कोर्ट बना सहारा</title><link>https://up.inkhabar.com/states/fee-due-to-lack-of-money-could-not-pay-the-fees-supreme-court-became-the-support/</link><pubDate>October 1, 2024, 2:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/qwe-1-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। पैसों की कमी के चलते टाइम से IIT दाखिले की फीस न भर पाने वाले छात्र के हक में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को उसका एडमिशन करने का निर्देश दिया है। याचिका दायर करने वाला छात्र यूपी का स्थानीय निवासी है। और उसके पिता एक दिहाड़ी ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; पैसों की कमी के चलते टाइम से IIT दाखिले की फीस न भर पाने वाले छात्र के हक में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को उसका एडमिशन करने का निर्देश दिया है। याचिका दायर करने वाला छात्र यूपी का स्थानीय निवासी है। और उसके पिता एक दिहाड़ी मजदूर है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;समय रहते फीस नहीं भर पाए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;रिपोर्ट के मुताबिक छात्र का दाखिला प्रतिष्ठित आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स में हुआ था। उसे 24 जून शाम 5 बजे तक अपना दाखिला सुरक्षित करने के लिए ऑनलाइन फीस जमा करानी थी। उसके मजदूर पिता को इतने पैसे इकट्ठे करने में वक्त लग गया। उन्होंने किसी तरह शाम 4.45 बजे तक फीस के पैसे इकट्ठे कर लिए, लेकिन समय सीमा से पहले ऑनलाइन फीस का पोर्टल बंद हो गया और वह फीस नहीं भर पाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उसके पसंद के कोर्स में दाखिला दें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद उसे दाखिला नहीं दिया गया। इससे आहत छात्र के पिता ने तीन महीने तक एससी/एसटी आयोग, झारखंड और मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अंत में जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट छात्र की मदद के लिए आगे आया है। सोमवार को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ ने IIT धनबाद को निर्देश देते हुए कहा कि छात्र को कोर्स की उसी सीट पर दाखिला दिया जाए, जिस पर उसका शुरू में दाखिला हुआ था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नई सीट की व्यवस्था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने यह फैसला सुनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो कि न्यायालय को ऐसी परिस्थितियों से निपटने में पूर्ण न्याय करने का अधिकार देते हैं। कोर्ट ने कहा कि छात्र के लिए एक नई सीट की व्यवस्था की जाए। जिससे अन्य छात्र को इससे परेशानी न हो। सीजेआई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हम ऐसे युवा प्रतिभाशाली लड़के को ऐसे जाने नहीं दे सकते।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>UP Politics: ‘बुलडोजर मामले’ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मायावती ने दिया बड़ा बयान</title><link>https://up.inkhabar.com/politics/up-politics-mayawati-gave-a-big-statement-on-the-supreme-courts-decision-in-the-bulldozer-case/</link><pubDate>September 18, 2024, 8:03 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-5-8-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>लखनऊ: बीते दिन 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में प्राधिकारियों को उसकी इजाजत के बिना आपराधिक मामलों में आरोपियों की संपत्ति सहित अन्य संपत्तियों को 1 अक्टूबर तक बुलडोजर नहीं चलाने का आदेश दिया है. जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; बीते दिन 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में प्राधिकारियों को उसकी इजाजत के बिना आपराधिक मामलों में आरोपियों की संपत्ति सहित अन्य संपत्तियों को 1 अक्टूबर तक बुलडोजर नहीं चलाने का आदेश दिया है. जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बेंच ने स्पष्ट कहा है कि यह आदेश सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, रेलवे लाइन या जलाशयों जैसे सार्वजनिक जगहों पर बने अनधिकृत ढांचों पर लागू नहीं होगा. शीर्ष कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब बसपा मुखिया मायावती का बड़ा बयान सामने आया गया है. उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग राज्यों में हो रही बुलडोजर एक्शन पर बसपा चीफ मायावती ने अपनी चिंता जाहिर की है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक्स पर ट्वीट कर मायावती ने उठाया सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर ट्वीट किया, &amp;#8220;बुलडोजर विध्वंस कानून का राज का प्रतीक नहीं होने के बावजूद इसके प्रयोग की बढ़ती प्रवृति चिन्तनीय। वैसे बुलडोजर व अन्य किसी मामले में जब आम जनता उससे सहमत नहीं होती है तो फिर केन्द्र को आगे आकर उस पर पूरे देश के लिए एक-समान गाइडलाइन्स बनाना चाहिए, जो नहीं किए जा रहे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;1. बुलडोजर विध्वंस कानून का राज का प्रतीक नहीं होने के बावजूद इसके प्रयोग की बढ़ती प्रवृति चिन्तनीय। वैसे बुलडोजर व अन्य किसी मामले में जब आम जनता उससे सहमत नहीं होती है तो फिर केन्द्र को आगे आकर उस पर पूरे देश के लिए एक-समान गाइडलाइन्स बनाना चाहिए, जो नहीं किए जा रहे हैं। 1/2&lt;/p&gt;&amp;mdash; Mayawati (@Mayawati) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/Mayawati/status/1836239905900396843?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;September 18, 2024&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कानूनी राज के अमल होने पे ध्यान दें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बसपा मुखिया ने आगे लिखा, &amp;#8221; वरना बुलडोजर एक्शन के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट को इसमें दख़ल देकर केन्द्र सरकार की ज़िम्मेवारी को खुद नहीं निभाना पड़ता, जो यह ज़रूरी था। केन्द्र व राज्य सरकारें संविधान व कानूनी राज के अमल होने पर ज़रूर ध्यान दें।&amp;#8221;&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;2. वरना बुलडोजर एक्शन के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट को इसमें दख़ल देकर केन्द्र सरकार की ज़िम्मेवारी को खुद नहीं निभाना पड़ता, जो यह ज़रूरी था। केन्द्र व राज्य सरकारें संविधान व कानूनी राज के अमल होने पर ज़रूर ध्यान दें। 2/2&lt;/p&gt;&amp;mdash; Mayawati (@Mayawati) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/Mayawati/status/1836239907922022781?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;September 18, 2024&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बुलडोजर का इस्तेमाल सुनिश्चित हो&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बसपा चीफ का बयान उन मामलों में आया है, जहां कई प्रदेशों में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया, जो आम पब्लिक और विपक्षी पार्टियों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। मायावती का मानना है कि बुलडोजर का इस्तेमाल सही तरीके से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिससे जनता में विश्वास बना रहे और न्याय मिल सके।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई के दौरान कोर्ट में क्या-क्या हुआ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बेंच ने साफ़ तौर पर कह दिया है कि बुलडोजर का इस्तेमाल सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों आदि पर बने अनधिकृत ढांचों पर लागू नहीं होगा. बेंच ने यह भी कहा.&amp;#8221;यदि अवैध ध्वस्तीकरण का एक भी उदाहरण है…तो यह हमारे संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है.&amp;#8221;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>UP Politics: &amp;#8216;नहीं चाहिए भाजपा, नहीं चाहिए बाढ़,&amp;#8217; अखिलेश यादव ने बाढ़ को लेकर सीएम योगी पर बोला हमला</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/up-politics-dont-want-bjp-dont-want-floods-akhilesh-yadav-attacks-cm-yogi-on-floods/</link><pubDate>September 18, 2024, 5:31 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-1-9-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: इस साल कई राज्यों में मानसून में भारी बारिश हुई, जिस की वजह से कई जगहों पर बाढ़ की स्थिति बनी हुई हैं। बाढ़ की वजह से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. कई जगहों पर लोग अपने घरों को छोड़कर पर मजबूर हो गए हैं। इस बीच लोग पलायन भी शुरू क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ: &lt;/strong&gt;इस साल कई राज्यों में मानसून में भारी बारिश हुई, जिस की वजह से कई जगहों पर बाढ़ की स्थिति बनी हुई हैं। बाढ़ की वजह से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. कई जगहों पर लोग अपने घरों को छोड़कर पर मजबूर हो गए हैं। इस बीच लोग पलायन भी शुरू कर दिए है. इस दौरान रिहायशी इलाकों में इतना पानी भर गया कि नावें चलानी पड़ीं. इसे लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि अगर सही तरीके से बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया होता तो बाढ़ को रोका जा सकता था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक्स पर लिखा नहीं चाहिए भाजपा, नहीं चाहिए बाढ़&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रदेश में जल भराव को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जमकर हमला बोला है। बता दें कि सीएम योगी के गृहक्षेत्र गोरखपुर में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की एक खबर का हवाला देते हुए बुलडोजर नीति पर कई सवाल किये और हमला बोलते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, &amp;#8220;बुलडोज़र बंद, नाव चालू, अगर उप्र की भाजपा सरकार ने बुलडोज़र का सकारात्मक सदुपयोग किया होता तो बाढ़ से बचाव हो सकता था। नहीं चाहिए भाजपा, नहीं चाहिए बाढ़!&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बुलडोज़री सोच का ही ध्वस्तीकरण &amp;#8211; अखिलेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दूसरी तरफ अखिलेश यादव बुलडोजर एक्शन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से भी काफी खुश है. सपा मुखिया ने बुलडोज़र एक्शन पर लगाम लगाने के निर्देश का खुलकर स्वागत किया। इतना ही नहीं सपा चीफ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने बुलडोजर को ही नहीं बल्कि बुलडोजर का दुरुपयोग करनेवालों की विध्वंसक राजनीति को भी किनारे लगा दिया है. बुलडोज़री सोच का ही ध्वस्तीकरण हो गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कई जिलों में फसल नुकसान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि इन दिनों उत्तर प्रदेश के कई जिले में बाढ़ की स्थिति है। बाढ़ के कारन हजारों लोगों अपने घरों से पलायन करने पर मजबूर है. लोग राहत कैंपों में जाकर रहने पर बेबस है. बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। इतना ही नहीं प्रदेश के निचले इलाकों में पानी घुस गया है जिसके कारन से कई खेतो के फसल बर्बाद हुआ है। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Statement: बुलडोजर न्याय पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद सामने आया मायावती का बड़ा बयान, कही ये बात</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/statement-mayawatis-big-statement-came-out-after-the-supreme-courts-comment-on-bulldozer-justice-said-this/</link><pubDate>September 3, 2024, 4:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/POLITICS-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। बुलडोजर न्याय&amp;#8217; एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बड़ा बयान दिया है। मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बुलडोजर का भी उपयोगी अब सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; बुलडोजर न्याय&amp;#8217; एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बड़ा बयान दिया है। मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बुलडोजर का भी उपयोगी अब सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले के मुताबिक ही होना चाहिए। उचित तो यही होगा कि इसका इस्तेमाल करने की जरूरत ही ना पड़े।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मायावती ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मायावती ने पोस्ट किया कि &amp;#8216;देश में आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए। अपराधियों के अपराध की सजा उनके परिवार और करीबी लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। यह सब हमारी पार्टी की रही सरकार ने &amp;#8216;कानून द्वारा कानून का राज’स्थापित करके भी दिखाया है।&amp;#8217; बुलडोजर का उपयोग अब सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय के मुताबिक ही होना चाहिए। हालांकि उचित तो यही होगा कि इसका इस्तेमाल करने की जरूरत ही ना पड़े, क्योंकि आपराधिक तत्वों को सख्त कानूनों के तहत भी निपटाया जा सकता है।&amp;#8217;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट जारी करेगा दिशा-निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मायावती ने लिखा कि &amp;#8216; आपराधिक तत्वों के परिवार व नजदीकियों पर बुलडोजर का इस्तेमाल करने की बजाय संबंधित अधिकारियों पर ही कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। जो ऐसे तत्वों से मिलकर, पीड़ितों को सही न्याय नहीं देते हैं। सभी सरकारें इस ओर जरूर ध्यान दें।&amp;#8217; बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपराध के आरोपियों के घरों या संपत्तियों को ध्वस्त करने की बढ़ती प्रवृत्ति की आलोचना की थी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए &amp;#8220;बुलडोजर न्याय&amp;#8221; का मामला बताया था। कोर्ट ने घोषणा की है कि इस मुद्दे के समाधान के लिए वह दिशा-निर्देश जारी करेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Teacher Recruitment: शिक्षक भर्ती के मामले में ओबीसी वर्ग ने दायर की कैविएट</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/teacher-recruitment-obc-category-filed-caveat-in-the-matter-of-teacher-recruitment/</link><pubDate>August 22, 2024, 6:23 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/thjk-300x169.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटकी पड़ी है। कोर्ट ने 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए रहे हैं। इस बीच ओबीसी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटकी पड़ी है। कोर्ट ने 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए रहे हैं। इस बीच ओबीसी वर्ग के अभ्यार्थियों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ओबीसी वर्ग ने दायर की याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऐसा माना जा रहा है कि जनरल कैटेगरी के अभ्यार्थी सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे संभावना है कि OBC अभ्यर्थियों की ओर से पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई है। ताकि कोर्ट कोई फैसला लेने से पहले उनके पक्ष को भी सुने। ओबीसी वर्ग के अभ्यार्थियों ने अनारक्षित वर्ग के अभार्थियों के सुप्रीम कोर्ट जाने की सूरत में उनका भी पक्ष सुनने के लिए ये कैविएट दाखिल की है। OBC अभ्यर्थियों की मांग हौ कि जनरल श्रेणी के अभ्यर्थियों के समायोजन की सूरत में हाईकोर्ट में रिट करने वाले लगभग 4000 ओबीसी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नियुक्ति पत्र न मिलने पर करेंगे विरोध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नहीं वो जनरल वर्ग के समायोजन का विरोध करेंगे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन शिक्षकों के लिए परेशानी बढ़ गई है जो पिछले चार-पांच सालों से नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जनरल वर्ग के अभ्यार्थी इस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर रूख कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष में याचिका दायर कर सकते है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Mukhtar Ansari: SC से बोले उमर अंसारी, कहा- जेल में दिया गया जहर… योगी सरकार को मिला नोटिस</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/mukhtar-ansari-omar-ansari-spoke-to-sc-said-poison-given-in-jail-yogi-government-got-notice/</link><pubDate>July 15, 2024, 9:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-6-3-300x169.png</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ : गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत को तीन माह से ऊपर हो गया है। मुख्तार का परिवार शुरू से आरोप लगा रहा है कि उसे जेल में जहर दिया गया। इसके चलते परिवार सुप्रीम कोर्ट भी गया है। सोमवार (15 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ &lt;/strong&gt;: गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत को तीन माह से ऊपर हो गया है। मुख्तार का परिवार शुरू से आरोप लगा रहा है कि उसे जेल में जहर दिया गया। इसके चलते परिवार सुप्रीम कोर्ट भी गया है। सोमवार (15 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई की। मुख्तार के बेटे उमर की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत में मौत को लेकर सवाल उठाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुख्तार को जेल में जहर दिया- उमर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोप है कि मुख्तार को जेल में जहर दिया गया। इसकी जांच जरूरी है। सिब्बल ने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्तार अंसारी को जेल में जान से मारने की धमकी की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अब उसकी मौत हो चुकी है। इसलिए यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है। ऐसे में वह इस याचिका में संशोधन कर नई याचिका दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए कोर्ट से इजाजत मांगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को दिया नोटिस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन की उमर अंसारी की मांग पर यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी किया है। यूपी सरकार के जवाब के बाद शीर्ष अदालत तय करेगी कि संबंधित याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की जाएगी या नहीं। मुख्तार अंसारी के बेटे उमर ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने कहा था कि उसके पिता की जान को खतरा है, इसलिए उसे यूपी की जेल से ट्रांसफर किया जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उसे जेल ले जाया गया और जान चली गई: सिब्बल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत में जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की बेंच ने उमर की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्तार को जेल ले जाया गया और उसकी मौत हो गई। इस मामले की जांच होनी चाहिए। इस पर जस्टिस रॉय ने कहा कि हम उसे वापस नहीं ला सकते। सिब्बल ने जवाब दिया कि इस देश में लोगों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पैगंबर को जिसका डर था, वही हुआ: सिब्बल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी नटराज ने कहा कि शुरुआत में जो मांग की गई थी, उसका समाधान हो गया है। सिब्बल ने तुरंत कहा कि पैगंबर को जिसका डर था, वही हुआ है। वरिष्ठ वकील कह रहे थे कि उमर अब्दुल्ला ने मुख्तार की जान को खतरे में डालने की बात कही थी और उसकी मौत भी हो गई। इसके जवाब में जस्टिस रॉय ने कहा कि आप (कपिल सिब्बल) कहते हैं कि कैदी को जेल में इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई में उमर अब्दुल्ला की याचिका में संशोधन के लिए यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी किया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Supreme Court News: SC ने PM मोदी के कथित &amp;#8216;हेट स्पीच&amp;#8217; के खिलाफ दायर याचिका खारिज की, जानिए क्या कहा?</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/supreme-court-news-sc-rejects-the-petition-filed-against-pm-modis-alleged-hate-speech-know-what-it-said/</link><pubDate>May 14, 2024, 11:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/7-7-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court News) ने मंगलवार (14 मई) को लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेताओं के कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया है। दरअसल, पूर्व नौकरशाह ईएएस शाह और...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court News) ने मंगलवार (14 मई) को लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेताओं के कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया है। दरअसल, पूर्व नौकरशाह ईएएस शाह और फातिमा नाम की याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को पीएम मोदी के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की थी। इस याचिका में पीएम मोदी के द्वारा 21 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में दिए गए चुनावी भाषण पर आपत्ति जताई गई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;&amp;#8216;ये याचिका दाखिल करने का विषय नहीं&amp;#8217;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में शीर्ष अदालत (Supreme Court News) में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि यह ऐसा विषय नहीं है, जिसके लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जाए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखनी चाहिए। पीठ ने इस मामले पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त की, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने का फैसला किया है। जिसके बाद याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज कर दिया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या बोले याचिकाकर्ता के वकील?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मैंने पीएम मोदी के द्वारा दिए गए भाषणों को संलग्न किया है, जहां उन्होंने साफ तौर पर भगवान के नाम पर वोट मांगा है। इस पर जस्टिस नाथ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले चुनाव आयोग से संपर्क किए बिना सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जस्टिस ने आगे कहा, इस तरह अनुच्छेद 32/226 के तहत न आएं। इसके लिए आपको प्राधिकरण से संपर्क करना होगा। अगर आप हटना चाहते हैं, तो हम आपको इजाजत देंगे।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;वहीं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता अपनी याचिका को वापस लेने के लिए पर सहमत हो गए। लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग से संपर्क करने की इजाजत मांगी। इस पर अदालत ने कहा कि यह आपका काम है, आपकी समस्या है। इसके अलावा कोर्ट ने एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी जिसमें कथित नफरत भरे भाषणों के लिए पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग हुई थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Mukhtar Ansari Case: अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी, मुख्तार अंसारी के फातिहा में जाएंगे</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/mukhtar-ansari-case-abbas-ansari-gets-approval-from-supreme-court-will-go-to-mukhtar-ansaris-fatiha/</link><pubDate>April 9, 2024, 10:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/04/5-1-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी(Mukhtar Ansari Case) के बेटे अब्बास अंसारी को पिता की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए जेल से बाहर आने की मंजूरी मिल गई है। बता दें कि आज मंगलवार (9 अप्रैल) को शाम को पांच बजे से पहले उन्हें सड़क मार्ग से कासगंज स...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी(Mukhtar Ansari Case) के बेटे अब्बास अंसारी को पिता की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए जेल से बाहर आने की मंजूरी मिल गई है। बता दें कि आज मंगलवार (9 अप्रैल) को शाम को पांच बजे से पहले उन्हें सड़क मार्ग से कासगंज से गाजीपुर के लिए रवाना किया जाएगा। इसके बाद कल यानी बुधवार (10 अप्रैल) को फातिहा पढ़ने के बाद अब्बास अंसारी को गाजीपुर जेल में रखा जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परिवार से मिलने की इजाजत मिली&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अलावा अब्बास अंसारी को 11 और 12 अप्रैल, 2024 को जेल में परिवार से मिलने की इजाजत दी गई है। जिसके बाद 13 अप्रैल को वापस उन्हें कासगंज जेल में ले जाया जाएगा। जानकारी के अनुसार, 11 या 12 तारीख को अगर कोई धार्मिक रस्म होगी तो अब्बास अंसारी उसमें भी शामिल हो सकेंगे, जिसके लिए उन्हें गाजीपुर जेल से बाहर आने की अनुमति रहेगी। हालांकि, इस दौरान अब्बास मीडिया को कोई भी बयान नहीं देंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दिल का दौरा पड़ने से हुई थी मौत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गौरतलब है कि 28 मार्च 2024 को जेल में बंद नेता और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी(Mukhtar Ansari Case) की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। डीजी (जेल) एस.एन. साबत के अनुसार, मुख्तार अंसारी ने रमजान के दौरान रोजा रखा था। इसी दौरान गुरुवार को रोजा खोलने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई थी। हालांकि, मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने मुख्तार अंसारी को जेल में स्लो प्वाइजन देने का दावा किया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>यूपीः मुस्लिम बच्चे को पिटवाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/up-supreme-court-reprimands-government-for-beating-muslim-child/</link><pubDate>September 25, 2023, 3:50 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/Clipboard-2023-09-25T212244.534-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। यूपी के शामली में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में मुस्लिम बच्चे की अन्य छात्रों से कथित पिटाई करवाने के मामले को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो फिर इस घटना से सरकार की अंतरात्मा ह...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; यूपी के शामली में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में मुस्लिम बच्चे की अन्य छात्रों से कथित पिटाई करवाने के मामले को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो फिर इस घटना से सरकार की अंतरात्मा हिल जानी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुस्लिम बच्चे को पिटवाने का आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को एक बार फिर फटकार लगाई है. बता दें, इस मामले मे आरोप है कि शामली के निजी विद्यालय की प्रिंसिपल तृप्ता त्यागी ने एक मुस्लिम बच्चे को अन्य छात्रों से पिटवाया था. इसके अलावा उसे लेकर सांप्रदायिक टिप्पणियां भी की थीं. जब बच्चे ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी तो उसके परिजन और अन्य लोगों ने इस मामले को जमकर बवाल किया था. बवाल करने के दौरान स्कूल की प्रिंसिपल और बच्चे के परिजनों के बीच समझौता करने की बात सामने आई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूपी सरकार ने इस मामले में क्या किया &amp;#8211; SC&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जब यह मामला देश के उच्चतम न्यायालय में पहुंचा तो अदालत ने इस मसले को चिंताजनक और गंभीर बताते हुए कहा कि जांच की नगरानी के लिए एक सीनियर आईपीएस अधिकारी को तैनात किया जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि यह जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ मामला है. साथ ही न्यायालय ने यूपी सरकार से जवाब भी मांगा है. कोर्ट का कहना है कि इस घटना में शामिल हो रहे बच्चों की काउंसिलिंग के लिए सरकार ने क्या किया है. कोर्ट ने मुजफ्फनगर पुलिस के ऊपर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में जो बच्चे के पिता ने आरोप लगाए थे, वे तो इसका हिस्सा ही नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को…..&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने कहा कि बच्चे के पिता ने दावा किया था कि उनके बच्चे को उसके मजहब के कारण पीटा गया था. जो कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में इस तरह की कोई बात शामिल ही नहीं है. न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उसका उल्लंघन किया गया है. यूपी सरकार ने इस मामले को लेकर कहा था कि यह घटना सांप्रदायिक नहीं थी, लेकिन इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को है. जबकि कोर्ट ने पिछले 6 सितंबर को यूपी सरकार से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था. अदालत ने इस केस में सरकार से पूछा था कि आखिर मामले में उत्तर प्रदेश द्वारा क्या एक्शन लिया गया है. बच्चे के परिवार के संरक्षण के लिए अभी तक क्या-क्या किया गया है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>आज ज्ञानवापी सर्वे का तीसरा दिन, दीवार पर मूर्ति मिलने का दावा</title><link>https://up.inkhabar.com/states/today-is-the-third-day-of-gyanvapi-survey-claims-to-have-found-idol-on-the-wall/</link><pubDate>August 6, 2023, 5:22 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-92-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे लगातार जारी है. आज सर्वे का तीसरा दिन है. सर्वे के लिए 42 लोगों की टीम ज्ञानवापी परिसर में पहुंच चुकी है. जानकारी के अनुसार यह टीम 4 अलग -अलग हिस्सों में बंटकर सर्वे करेंगी। बताय...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे लगातार जारी है. आज सर्वे का तीसरा दिन है. सर्वे के लिए 42 लोगों की टीम ज्ञानवापी परिसर में पहुंच चुकी है. जानकारी के अनुसार यह टीम 4 अलग -अलग हिस्सों में बंटकर सर्वे करेंगी। बताया जा रहा है कि आज का सर्वे बाकी के दिनों से अलग होगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज ज्ञानवापी सर्वे का तीसरा दिन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई का सर्वे जारी है. आज एएसआई टीम मशीनों का इस्तेमाल करने वाली है और यही वजह है कि आज का सर्वे काफी अलग होने वाला है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सर्वे में मुस्लिम पक्ष के शामिल होने की उम्मीद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें, सर्वे में मुस्लिम पक्ष के शामिल रहने की संभावना है वो इसलिए क्योंकि शनिवार के सर्वे में भी मुस्लिम पक्ष शामिल हुआ था. जबकि शुक्रवार को सर्वे के पहले दिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई भी सामने नहीं आया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीता साहू ने मूर्ति मिलने का किया था दावा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कल सर्वे के बाद हिंदू पक्ष की ओर से याचिका दायर करने वाली महिला सीता साहू ने एक मूर्ति मिलने का दावा किया है. सीता साहू की मानें तो मूर्ति किसकी है, यह जांच की जा रही है. साहू ने कहा है कि मूर्ति में जो आकृति है, वह आधी पशु और आधी मानव की है. दावा किया जा रहा है कि सर्वे के डर से मुस्लिम पक्ष ने कुछ मूर्तियां इसमें छिपा दी हैं. हिंदू पक्ष चाहता है कि मलबा हटाया जाए.बताया जा रहा है कि हिंदू पक्ष की तरफ से आज सिर्फ वकीलों को ही अंदर जाने की इजाजत दी गई है.महिला याचिकाकर्ता ज्ञानवापी परिसर नहीं जाएंगी. वहीं, मुस्लिम पक्ष की तरफ से आज सिर्फ एक वकील रहेंगे. हिंदू पक्ष के सोहन लाल का दावा है कि अगर तहखाना खुला तो कई बड़े प्रमाण मिल सकते हैं, जबकि रेखा पाठक ने भी सीता साहू की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पश्चिमी दीवार पर आधा मानव और आधा पशु वाली आकृति मिली है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;किस तरह का होगा सर्वे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शनिवार को ASI के सर्वे का दूसरा दिन था जांच करीब 7 घंटे तक चला. इस दिन स्वस्तिक, त्रिशूल जैसे चिन्हो की वीडियोग्राफी कराई गई. वहीं मंगलवार को बिना खुदाई के जमीन के नीचे सर्वे को अंजाम देने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग किया जाएगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>UP News: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कल ASI करेगी ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/up-news-asi-will-conduct-survey-of-gyanvapi-masjid-tomorrow-before-supreme-court-hearing/</link><pubDate>July 23, 2023, 4:43 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-89-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: लखनऊ: वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का कल सर्वे किया जायेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कल सुबह 7 बजे ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे करेगी। इसको लेकर वाराणसी के कमिश्नर के साथ ASI की बैठक चल रही है। AS...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;: &lt;/p&gt;



&lt;p&gt;लखनऊ: वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का कल सर्वे किया जायेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कल सुबह 7 बजे ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे करेगी। इसको लेकर वाराणसी के कमिश्नर के साथ ASI की बैठक चल रही है। ASI को वाराणसी की जिला अदालत में 4 अगस्त को रिपोर्ट सौंपना है। इसके पहले ज्ञानवापी परिसर की वैज्ञानिक विधि से जांच की मांग मामले में 21 जुलाई को वाराणसी कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया था। हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद के पूरे परिसर के सर्वे की मांग की गई थी। जिसपर सुनवाई के बाद वाराणसी जिला अदालत ने मस्जिद परिसर के सर्वे की मांग स्वीकार कर ली थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>उत्तर प्रदेश: यूपी के दो आईएएस अधिकारीयों को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का दिया निर्देश</title><link>https://up.inkhabar.com/national/uttar-pradesh-supreme-court-directs-release-of-two-ias-officers-of-up/</link><pubDate>April 21, 2023, 2:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/download-2023-04-20T185555.543-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>लखनऊ। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा दी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दो आईएएस अधिकारीयों को रिहा करने का जारी किया निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल यानी कल अदालत की अवमानना ​​के मामले में न्यायिक हिरासत से उत्तर प्रदेश प्रशासन के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों शाहिद मंज़र अब्बास रिज़वी और सरयू प्रसाद मिश्रा को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है. दरअसल रिटायर्ड जजों की सुविधाओं से जुड़े आदेश में देरी पर नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव और विशेष सचिव वित्त को हिरासत में लेने का आदेश था. हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अगले शुक्रवार को सुनवाई की तारीख लगाई. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक मांगी थी. राज्य सरकार ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में केस मेन्शन किया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई कोर्ट ने लगाए थे आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि हाई कोर्ट ने कहा था कि ये दोनों अफसर मांगी गई जानकारी को कई आदेशों के बावजूद भी पेश नहीं कर रहे थे. दोनों अफसरों को अवमानना का आरोप लगाते हुए 20 अप्रैल यानी कल इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य वित्त के खिलाफ वारंट जारी करते हुए बीते दिन हाजिर होने के आदेश दिए थे.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>UP News: अतीक-अशरफ हत्याकांड मामला पहुंचा सर्वोच्च न्यायालय, 16 अप्रैल को दायर हुई याचिका</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/up-news-atiq-ashraf-murder-case-reaches-supreme-court-petition-filed-on-april-16/</link><pubDate>April 17, 2023, 2:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-31-300x169.jpg</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ। प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के मर्डर का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. हत्याकांड के एक दिन बाद यानी 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमे हत्या की पूर्व जज के नेतृत्व में जांच करने का अनुरोध ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के मर्डर का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. हत्याकांड के एक दिन बाद यानी 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमे हत्या की पूर्व जज के नेतृत्व में जांच करने का अनुरोध किया गया है. वकील विशाल तिवारी ने याचिका में लिखा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हुए सभी 183 एनकाउंटर की भी जांच होनी चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पत्रकार के भेष में आए थे हमलावर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार यानी 15 अप्रैल को प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वे पत्रकारों उन दोनों से सवाल जवाब कर रहे थे. पूरे हत्याकांड की वीडियो सामने आ गई है. पुलिस द्वारा तीन हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया है. हमलावरों ने पत्रकार के भेष में हत्या की थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की उठी मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि अतीक और अशरफ की हत्या के कुछ घंटे पहले असद को सुपुर्द ए खाक किया गया था. पुलिस द्वारा 13 अप्रैल यानी गुरूवार को झांसी में असद और उसके एक साथी को मुठभेड़ में मार गिराया गया था. उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को जानकारी दी थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल के दौरान छह वर्षों में 183 कथित अपराधियों का एनकाउंटर किया है और इसमें असद और उसका साथी भी शामिल हैं. एक याचिका दायर कर अतीक और अशरफ की हत्याओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई है.&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>