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       <title>Today Prayagraj Kumbh 2025 News | Latest Prayagraj Kumbh 2025 News | Breaking Prayagraj Kumbh 2025 News in English | Latest Prayagraj Kumbh 2025 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Prayagraj Kumbh 2025 समाचार:Today Prayagraj Kumbh 2025 News ,Latest Prayagraj Kumbh 2025 News,Aaj Ka Samachar ,Prayagraj Kumbh 2025 समाचार ,Breaking Prayagraj Kumbh 2025 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://up.inkhabar.com/tag/prayagraj-kumbh-2025</link>
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        </image><item><title>Keys: महाकुंभ नगरी पहुंचे चाबी वाले बाबा, अंहकारों का तोड़ेंगे ताला</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/keys-baba-with-the-keys-reaches-mahakumbh-city-will-break-the-lock-of-egos/</link><pubDate>December 30, 2024, 8:45 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/chabhi.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। संगम की रेती पर तैयार कुंभ नगरी में इस समय साधु-संतों का रहस्यमयी संसार दिखाई दे रहा है। कुंभ में पहुंचे हर बाबा की कोई न कोई खास कहानी है। कोई हाथ योगी वाले बाबा, कोई ई-रिक्शा वाले बाबा, कोई जानवर वाले बाबा तो कोई घोड़े वाले बाबा के नाम ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; संगम की रेती पर तैयार कुंभ नगरी में इस समय साधु-संतों का रहस्यमयी संसार दिखाई दे रहा है। कुंभ में पहुंचे हर बाबा की कोई न कोई खास कहानी है। कोई हाथ योगी वाले बाबा, कोई ई-रिक्शा वाले बाबा, कोई जानवर वाले बाबा तो कोई घोड़े वाले बाबा के नाम से मशहूर हैं। इस क्रम में एक चाबी वाले बाबा भी हैं, जो अपने एक हाथ में 20 किलो की लोहे की चाबी लेकर महाकुंभ पहुंचे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चाबी के पीछे का रहस्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस भारी-भरकम चाबी के पीछे की कहानी भी रहस्यमयी है। लोग इन्हें रहस्यमयी चाबी वाले बाबा के नाम से पहचानते हैं। बाबा के पास एक रथ है, जिसमें चाबी ही चाबी भरी होती हैं। बाबा की हर एक चाबी के पीछे एक कहानी होती है। 50 साल के चाबी वाले बाबा की खासियत ये है कि वह पूरे देश में पैदल अपने रथ को हाथों से खींचकर यात्रा करते रहते है। वे नए युग की कल्पना को लोगों तक पहुंच रहे हैं। चाबी वाले बाबा का असली नाम हरिश्चंद्र विश्वकर्मा है। वो यूपी के रायबरेली के निवासी हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बचपन से ही अध्यात्म से जुड़े&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वे कहते हैं कि हरिश्चंद्र विश्वकर्मा का बचपन से ही अध्यात्म से जुड़ाव था। घरवालों के डर से वे कुछ बोल नहीं पाते थे, लेकिन जब वह 16 साल के हुए तो उन्होंने समाज में फैली बुराइयों और नफरत से लड़ने का फैसला लिया और घर से निकल गए। 16 साल की उम्र में ही उन्होंने ठान लिया था कि वह अधात्म को अपनाएंगे। हरिश्चंद्र विश्वकर्मा कबीरपंथी विचारधारा के हैं, इसलिए लोग उन्हें कबीरा बाबा पुकारते थे। अयोध्या से यात्रा कर चाबी वाले बाबा अब प्रयागराज कुंभ नगरी में पहुंचे हैं। कबीरा बाबा कई साल से अपने साथ भारी-भरकम चाबी लिए हुए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यात्रा के तौर पर बनाते हैं चाबी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उस चाबी के साथ ही उन्होंने पूरे देश की पदयात्रा की हैं। अपनी यात्रा और अध्यात्म के बारे में कबीरा बाबा कहते हैं कि लोगों के मन में बसे अहंकार का ताला वे अपनी इस बड़ी सी चाबी से खोलते हैं। वह लोगों के अहंकार को चूर-चूर कर उन्हें एक नया रास्ता दिखाते हैं। अब बाबा के पास कई तरह की चाबियां मौजूद हैं। बाबा खुद ही अपने हाथों से चाबी बना देते हैं, जहां भी जाते हैं, यादगार के तौर पर चाबी का निर्माण कर लेते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इस बार प्रयागराज में कौन सा कुंभ लगने जा रहा, पौष पूर्णिमा से होगी शुरुआत</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/which-kumbh-is-going-to-be-held-in-prayagraj-this-time-it-will-start-from-paush-purnima/</link><pubDate>December 3, 2024, 3:39 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-13-300x200.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ: भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में कुम्भ मेले का विशेष महत्व है। कुम्भ मेले को भारतीय संस्कृति की विरासत के रूप में देखा जाता है। दरअसल, भारत में चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। जिसमें प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), हरिद्वार (उत्तराखंड), ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ: &lt;/strong&gt;भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में कुम्भ मेले का विशेष महत्व है। कुम्भ मेले को भारतीय संस्कृति की विरासत के रूप में देखा जाता है। दरअसल, भारत में चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। जिसमें प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), हरिद्वार (उत्तराखंड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) और नासिक (महाराष्ट्र) शामिल हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुंभ कई प्रकार के होते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पौराणिक मान्यता है कि इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है। दरअसल, कुंभ कई प्रकार के होते हैं। जिसमें कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ होता है। 2025 में प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होने जा रहा है. लेकिन ये कौन सा कुंभ है, इसे हम इस आर्टिकल में जानेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हर 3 साल में कुंभ का आयोजन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कुम्भ मेले को भारतीय संस्कृति की विरासत के रूप में देखा जाता है। दरअसल, कुंभ हर 3 साल में लगता है। भारत में चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। जिसमें प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), हरिद्वार (उत्तराखंड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) और नासिक (महाराष्ट्र) शामिल हैं। पौराणिक मान्यता है कि इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अर्ध कुंभ और महाकुंभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अर्ध कुंभ मेला 6 साल में एक बार हरिद्वार और प्रयागराज के तट पर लगता है। जबकि पूर्ण कुम्भ मेले का आयोजन 12 वर्ष में एक बार होता है, जो कि प्रयागराज में आयोजित होता है। 12 कुंभ मेलों के पूरा होने के बाद महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। इससे पहले साल 2013 में प्रयाराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पौष पूर्णिमा से शुरू होगा कुंभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हिंदू कैलेंडर के मुताबिक कुंभ साल 2025 में पौष पूर्णिमा से शुरू होने जा रहा है. यानी 13 जनवरी 2025 से इसकी शुरुआत होगी. 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्री के साथ इसका समापन होगा. यानी ये कुंभ 45 दिन तक चलने वाला है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;144 साल में लगता है महाकुंभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हालांकि पूर्ण कुंभ को महाकुंभ भी कहा जाता है। लेकिन सबसे बड़ा महाकुंभ हर 144 साल में होता है, जिसका आयोजन सिर्फ प्रयागराज में होता है। साल 2013 में 144 साल बाद प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था. 12 साल बाद इस बार 2025 में प्रयागराज में पूर्ण कुंभ का आयोजन होने जा रहा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हरिद्वार में कब लगता है कुंभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसा माना जाता है कि जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है।&amp;nbsp; जब बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा मेष राशि में मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो अमावस्या के दिन प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नासिक में कब लगता है कुंभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अलावा जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तो गोदावरी के तट पर नासिक में कुंभ का आयोजन होता है। जबकि बृहस्पति के सिंह राशि में और सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर उज्जैन में कुंभ का आयोजन होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों है कुंभ का शाही स्नान फेमस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कुंभ मेले के आयोजन की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है। समुद्र मंथन के दौरान अमृत तो प्राप्त हुआ, लेकिन इस अमृत कलश के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच 12 दिनों तक संघर्ष चला। ये 12 दिन पृथ्वी पर 12 वर्ष माने जाते हैं। संघर्ष के दौरान 12 स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरीं, जिनमें से चार बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। जिन्हें आज हम प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक के नाम से जानते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन नदियों का जल अमृत समान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है और इस दौरान नदियों का जल अमृत के समान माना जाता है। यही कारण है कि कुंभ के दौरान नदी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। प्रयागराज तीन नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है, इसलिए इसका विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Maha Kumbh Mela: प्रयागराज जाएंगे सीएम योगी, नगर निगम कार्यालय का करेंगे लोकार्पण</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/maha-kumbh-mela-cm-yogi-will-go-to-prayagraj-will-inaugurate-the-municipal-corporation-office/</link><pubDate>November 26, 2024, 8:53 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/9ी5-300x169.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। महाकुम्भ 2025 को लेकर प्रयागराज में तैयारियां जोरों-शोरों से की जा रही हैं। सीएम योगी के दिव्य और भव्य कुम्भ के विजन के मुताबिक एक ओर संगम क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के लिए महाकुम्भ नगरी बन रही है तो, वहीं दूसरी ओर नगर...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;महाकुम्भ 2025 को लेकर प्रयागराज में तैयारियां जोरों-शोरों से की जा रही हैं। सीएम योगी के दिव्य और भव्य कुम्भ के विजन के मुताबिक एक ओर संगम क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के लिए महाकुम्भ नगरी बन रही है तो, वहीं दूसरी ओर नगर निगम, प्रयागराज शहर के सुंदर बनाने के लिए काम किया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;27 नवंबर प्रयागराज आएंगे योगी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;महाकुम्भ के इन्हीं निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने सीएम योगी 27 नवंबर को प्रयागराज आएंगे। इसी क्रम में सीएम योगी प्रयागराज नगर निगम की नवनिर्मित कंट्रोल रूम बिल्डिंग का लोकापर्ण करेंगे। इस बिल्डिंग से नगर निगम सॉलिड वेस्ट, ग्रीवांस कंट्रोल रूम और प्रयागराज स्मार्ट सिटी ऑफिस का संचालन करेंगे। विश्व के सबसे बड़े मानवीय समागम महाकुम्भ का आयोजन प्रयागराज में किया जा रहा। सीएम योगी के विजन मुताबिक महाकुम्भ को दिव्य-भव्य और स्वच्छ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कंट्रोल रूम की बिल्डिंग का निर्माण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिशा में प्रयागराज में कई निर्माण कार्य और सौंदर्यीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयागराज नगर निगम में नये कंट्रोल रूम की बिल्डिंग का निर्माण किया गया है। Maha Kumbh Mela: प्रयागराज जाएंगे सीएम योगी, नगर निगम कार्यालय का लोकार्पण करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बिल्डिंग से सॉलिड वेस्ट कंट्रोल रूम, पब्लिक ग्रीवांस कंट्रोल रूम और प्रयागराज स्मार्ट सिटी के आफिस का संचालन कार्य किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>