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       <title>Today Maha Kumbh 2025 News News | Latest Maha Kumbh 2025 News News | Breaking Maha Kumbh 2025 News News in English | Latest Maha Kumbh 2025 News News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Maha Kumbh 2025 News समाचार:Today Maha Kumbh 2025 News News ,Latest Maha Kumbh 2025 News News,Aaj Ka Samachar ,Maha Kumbh 2025 News समाचार ,Breaking Maha Kumbh 2025 News News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Maha Kumbh: महाकुंभ मेले की शुरूआत, करोड़ों की संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु, संगम में करेंगे स्नान</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/maha-kumbh-mela-begins-millions-of-devotees-arriving-will-take-bath-in-sangam/</link><pubDate>January 13, 2025, 3:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/qw4r6.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। तीर्थराज प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर सनातन आस्था के महापर्व महाकुंभ 2025 की शुरुआत आज से आरंभ हो गई है। पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ महाकुंभ मेले में कल्पवास की भी शुरूआत हो गई है। 2025 के इस महाकुंभ में 40 से 45 करोड़ श्रद्धालुओ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;तीर्थराज प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर सनातन आस्था के महापर्व महाकुंभ 2025 की शुरुआत आज से आरंभ हो गई है। पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ महाकुंभ मेले में कल्पवास की भी शुरूआत हो गई है। 2025 के इस महाकुंभ में 40 से 45 करोड़ श्रद्धालुओं के महाकुंभ में पहुंचने की संभावना है, जो गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महाकुंभ में कल्पवास करना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके साथ ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर महाकुंभ की प्राचीन परंपरा कल्पवास का निर्वहन करेंगे। पौराणिक मान्यता के मुताबिक श्रद्धालु एक माह तक नियमपूर्वक संगम तट पर कल्पवास करेंगे। इसके लिए सीएम योगी के नेतृत्व में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने खास इंतजाम किए हैं। महाकुंभ सनातन आस्था का सबसे बड़े आयोजन होने के साथ बहुत सी सनातन परंपराओं का भी निर्वहन किया जा रहा है। जिसमें से महाकुंभ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है संगम तट पर कल्पवास करना।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गंगा स्नान कर जाप करते है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शास्त्रीय मान्यता के मुताबिक कल्पवास, पौष पूर्णिमा की से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक पूरे एक महीने तक चलता है। इस महाकुंभ में कल्पवास 13 जनवरी से शुरू होकर 12 फरवरी तक संगम तट पर किया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक कल्पवास में श्रद्धालु संकल्पपूर्वक, नियमपूर्वक एक माह तक संगम तट पर निवास करते हैं। कल्पवास के दौरान श्रद्धालु तीनों काल गंगा स्नान कर, जाप करना, ध्यान,पूजन और सत्संग करते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी इंतजाम किए है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;महाकुंभ 2025 में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के कल्पवास करने की संभावना है। महाकुंभ की खास परंपरा कल्पवास का निर्वहन करने के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने सीएम योगी की प्रेरणा से सभी जरूरी इंतजाम किए हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>महाकुंभ में मिठास घोल रहे रबड़ी वाले बाबा, श्रद्धालुओं का लग रहा ताता</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/rabdi-baba-is-adding-sweetness-to-the-maha-kumbh-devotees-are-feeling-the-presence-of-baba/</link><pubDate>January 11, 2025, 7:12 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/Cguy-300x169.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होने वाले भव्य महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। महाकुंभ की दिव्य छठा देखने को मिल रही है। महाकुंभ में पहले ही तमाम साधु-संतों और अखाड़ों के तपस्वियों का पहुंचना शुरू हो गया है, जिसमें कई रंग देखने को मि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होने वाले भव्य महाकुंभ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। महाकुंभ की दिव्य छठा देखने को मिल रही है। महाकुंभ में पहले ही तमाम साधु-संतों और अखाड़ों के तपस्वियों का पहुंचना शुरू हो गया है, जिसमें कई रंग देखने को मिल रहा है। महाकुंभ में आने वाले कई संत अपने हठयोग और अनोखी तपस्या को लेकर चर्चा में है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रबड़ी बाबा के नाम से फेमस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इन्हीं में से एक है रबड़ी वाले बाबा। श्री महंत देव गिरि महाराज लोगों को खिलाने के लिए जाने जाते हैं। वो महाकुंभ में आने वाले लोगों को रबड़ी बनाकर उसका स्वाद चखा रहे है, जिसकी वजह से लोग उन्हें रबड़ी वाले बाबा भी कहकर बुलाते हैं। श्री महंत देव गिरि महाराज जिन्हें लोग रबड़ी वाले बाबा के नाम से जानते है। इन दिनों कुंभ नगरी में सुर्खियां बटोर रहे है। वो दिनभर रबड़ी बनाते हैं और रोजाना हजारों लोगों को अपनी रबड़ी का स्वाद चखाते हैं। रबड़ी वाले बाबा श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाण में श्रीमंहत पद पर हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रबड़ी बनाकर खिलाना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बाबा कई दिनों से महाकुंभ में रबड़ी बनाकर लोगों को खिला रहे हैं। उन्होंने इसे ईश्वर का आशीर्वाद बताया और कहा कि वो केवल लोगों की सेवाभाव से इस काम को कर रहे हैं। रबड़ी वाले बाबा ने कहा कि वो 9 दिसंबर से महाकुंभ में हैं। ये आयोजन छह फरवरी तक जारी रहेगा। हजारों लोग रोजाना इस रबड़ी का स्वाद चखते हैं। सुबह 8 बजे से बाबा की कढ़ाई चढ़ जाती है। उससे पहले हम अपने दिन की शुरूआत पूजा-पाठ से करते हैं, जिसके बाद रबड़ी बनाने का काम शुरू करते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;श्रीमंहत सबसे बड़ा पद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कुंभ में आने वाले लोगों को रबड़ी का रसपान कराते हैं। उन्होंने कहा कि कढ़ाई चढ़ाने से पहले पूजा की जाती है। बाबा ने बताया कि हमें रबड़ी बनाने का विचार 2019 में आया था। तब से हमने डेढ़ महीना लोगों को रबड़ी खिलाई। ये इसी का आशीर्वाद है कि पहले हम नागा बाबा थे और अब पंचायती अखाड़े के श्रीमहंत है। श्री मंहत का पद अखाड़े में सबसे बड़ा पद माना जाता है।&lt;/p&gt;



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</content></item><item><title>Maha Kumbh: महाकुंभ में शामिल हुए छोटू बाबा, 32 सालों ने नहीं किया स्नान, जानें इसकी वजह</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/maha-kumbh-chhotu-baba-attended-maha-kumbh-did-not-take-bath-for-32-years-know-the-reason/</link><pubDate>January 1, 2025, 9:41 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/maha-300x169.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। प्रयागराज महाकुंभ कई मायनों में अहम माना जाता है। वैसे तो हज़ारों की संख्या में नागा साधु अपनी छावनियों में दाखिल होकर धूनी रमाते महाकुंभ पहुंच रहे है, लेकिन इनमे से गंगापुरी महाराज लोगों के बीच काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। कोई उन्हें देखक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;प्रयागराज महाकुंभ कई मायनों में अहम माना जाता है। वैसे तो हज़ारों की संख्या में नागा साधु अपनी छावनियों में दाखिल होकर धूनी रमाते महाकुंभ पहुंच रहे है, लेकिन इनमे से गंगापुरी महाराज लोगों के बीच काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। कोई उन्हें देखकर रुक जाता है, कोई उनके साथ फोटो खींचवाना चाहता है। लोग गंगापुरी महाराज को देखकर हैरान हो रहे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; ज्यादातर समय कैंप में बिताते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उनके सड़क पर आते ही लोगों की भीड़ लग जाती है। लोगों के बीच घिर जाने की वजह से ही वह ज़्यादातर अपना समय कैंप में बिताते हैं या फिर गंगा के तट पर एकांत में साधना करते हैं। गंगापुरी महाराज सन्यासियों के सबसे बड़े और वैभवशाली जूना अखाड़े के नागा संत हैं। वह असम की कामाख्या पीठ से संबंधित हैं। बाकी संत महात्मा और करोड़ों श्रद्धालु महाकुंभ में मा गंगा की गोद में आस्था की डुबकी लगाने के लिए आ रहे हैं, लेकिन गंगापुरी महाराज यहां गंगा स्नान करने के लिए नहीं पहुंचे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;टाइनी बाबा कहकर बुलाते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गंगापुरी महाराज महाकुंभ में अपनी हाइट को लेकर भी चर्चा में बने हुए हैं। उनकी हाइट केवल तीन फिट है। यानी जितनी लंबाई किसी पांच &amp;#8211; छह साल के बच्चे की होती है। बाबा अपनी उम्र सत्तावन साल बताते हैं। कम हाइट होने की वजह से तमाम लोग उन्हें छोटू बाबा कहकर बुलाते हैं। तो वहीं कोई उन्हें टाइनी बाबा कहता है। हालांकि गंगापुरी महाराज कम हाइट को लेकर बिल्कुल भी निराश नहीं होते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाइट उनकी ताकत है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उनका कहना है कि महज तीन फिट की ऊंचाई उनकी कमज़ोरी नहीं बल्कि ताकत को दर्शाता है। इसी के चलते लोग उन्हें पसंद भी करते हैं। उन्हें देखने के लिए महाकुंभ में लोगों की भीड़ उमड़ी हैं। गंगापुरी जी महाराज से जुड़ी एक और ख़ास बात है कि वह पिछले बत्तीस सालों से नहाए नहीं हैं। इसके पीछे उनका एक संकल्प है, जिसकी पूर्ति बत्तीस सालों में भी नहीं हो पाई है। जब उनकी संकल्पना पूरी हो जाएगी तब वह स्नान करेंगे।&lt;/p&gt;
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