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       <title>Today farmer protest News | Latest farmer protest News | Breaking farmer protest News in English | Latest farmer protest News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का farmer protest समाचार:Today farmer protest News ,Latest farmer protest News,Aaj Ka Samachar ,farmer protest समाचार ,Breaking farmer protest News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://up.inkhabar.com/tag/farmer-protest</link>
        <lastBuildDate>April 20, 2026, 3:25 am</lastBuildDate>
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        </image><item><title>किसान आंदोलन के बीच &amp;#8216;संयुक्त किसान मोर्चा&amp;#8217; के नेताओं ने अपने आप को किया अलग, राकेश टिकैत ने बताई वजह</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/amidst-the-farmers-movement-the-leaders-of-united-kisan-morcha-separated-themselves-rakesh-tikait-told-the-reason/</link><pubDate>December 5, 2024, 6:34 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-3-1.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ: बीते कई दिनों से देश के अन्य राज्यों से नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर आए किसान केंद्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच यहां धरना दे रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं में फूट पड़ गई है। बताया जा रहा है कि यह आंदोलन...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; बीते कई दिनों से देश के अन्य राज्यों से नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर आए किसान केंद्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच यहां धरना दे रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं में फूट पड़ गई है। बताया जा रहा है कि यह आंदोलन 10 संगठनों द्वारा चलाया जा रहा था, लेकिन इसके मुख्य घटक भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और कई संगठनों ने इस विरोध से खुद को अलग कर लिया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राकेश टिकैत ने बताई अलग होने की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आज गुरुवार को मीडिया से बातचीत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि किसानों के विरोध और समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने दो दिन पहले पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. उन्होंने कहा कि उनकी राय है कि किसान संगठन के लोगों को धरना स्थल पर ही इस कमेटी से बात करनी चाहिए और अपनी मांगों को प्रमुखता से उनके सामने रखना चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दिल्ली कूच से समस्या का समाधान नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राकेश टिकैत ने आगे कहा दिल्ली कूच से समस्या का समाधान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सभी किसान संगठनों का एकजुट होना जरूरी है, तभी दिल्ली कूच सफल होगा. उन्होंने कहा कि किसान नेताओं को कमेटी के लोगों से बात करनी चाहिए लेकिन कुछ नेता इसके लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इसी वजह से भारतीय किसान यूनियन इस प्रदर्शन से अलग हो गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;टकराव से नहीं बल्कि आपसी बातचीत से होगा समाधान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आगे कहा कि अन्य संगठन जैसा चाहे कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार किसान आंदोलन से कई संगठनों ने अपने आप को अलग कर लिया है। उनका भी मानना ​​है कि कमेटी के सामने अपनी बात रखकर किसानों की बुनियादी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. वहीं कुछ किसान नेताओं का मानना है कि इसका समाधान टकराव से नहीं बल्कि आपसी बातचीत से निकलेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Farmer Protest: किसान नेताओं की गिरफ्तारी पर प्रदर्शन जारी, ये पांच मांगों को लेकर धरने पर बैठे अन्नदाता</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/farmer-protest-demonstration-continues-on-the-arrest-of-farmer-leaders-farmers-sitting-on-strike-with-these-five-demands/</link><pubDate>December 4, 2024, 7:59 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-30-300x168.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ: देशभर में किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. किसान अपनी मांगें मनवाने के लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं. ऐसे में कई राज्यों के किसान अपनी मांगों को लेकर आज ग्रेटर नोएडा में पहुंचे हुए हैं. संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; देशभर में किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. किसान अपनी मांगें मनवाने के लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं. ऐसे में कई राज्यों के किसान अपनी मांगों को लेकर आज ग्रेटर नोएडा में पहुंचे हुए हैं. संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान परिषद और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) सहित कई किसान-नेतृत्व वाले संगठनों के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों के इस प्रदर्शन को किसान नेताओं के अलावा राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला है. बता दें कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की पांच मांगें प्रमुख हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें इनकी क्या है मांगें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;(01)- 64% का मुआवज़ा&lt;br&gt;(02)- 10% का विकसित प्लॉट&lt;br&gt;(03)- अवादी का निस्तारण&lt;br&gt;(04)- नक्सा नीति संशोधन&lt;br&gt;(05)- गांवों का विकास (क्योंकि गांवों में पंचायत यानी प्रधानी खत्म होने के बाद गांवों का विकास करना सरकार की जिम्मेदारी है) उत्तर प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी समाजवादी पार्टी ने भी किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महामाया फ्लाईओवर पर प्रदर्शन करने का ऐलान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सपा के गौतमबुद्ध नगर जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी भी महापंचायत में पहुंचे. कांग्रेस और बसपा ने भी किसानों का समर्थन किया है. किसानों ने आज 4 दिसंबर को नोएडा के महामाया फ्लाईओवर पर धरने पर बैठने का ऐलान किया है. किसानों की गिरफ्तारी पर आज महापंचायत भी होनी है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जगदीप धनखड़ का मिला समर्थन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इधर, यूपी सरकार ने आंदोलन का समाधान निकालने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है. किसानों के प्रदर्शन को उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ का समर्थन मिला है. जगदीप धनखड़ ने सरकार से पूछा कि किसानों से किए गए वादे पूरे क्यों नहीं किए गए और प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत क्यों नहीं की गई. जगदीप धनखड़ ने कहा कि संकट में फंसे किसानों का आंदोलन का सहारा लेना देश की भलाई के लिए अच्छा संकेत नहीं है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>रागिनी गायन से दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसान काट रहे रात, जानें इस लोकगीत का महत्व</title><link>https://up.inkhabar.com/uncategorized/farmers-sitting-on-delhi-border-are-spending-the-night-singing-ragini-know-the-importance-of-this-folk-song/</link><pubDate>December 3, 2024, 3:52 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/nm-238x300.webp</image><category>Uncategorized</category><excerpt>लखनऊ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रागिनी गायन का बड़ा महत्व है। दुख हो या सुख सभी समय में रागिनी गाई जाती है। यमुना, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के हजारों किसान दिल्ली कूच के लिए दिल्ली बॉर्डर पर धरना दिए हुए हैं। वहां बैठे सभी किसान अपनी रात रा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रागिनी गायन का बड़ा महत्व है। दुख हो या सुख सभी समय में रागिनी गाई जाती है। यमुना, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के हजारों किसान दिल्ली कूच के लिए दिल्ली बॉर्डर पर धरना दिए हुए हैं। वहां बैठे सभी किसान अपनी रात रागिनी गायन गीत गाकर काट रहे हैं। आखिर चलिए जानते है रागिनी गायन का क्या है महत्व।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूपी लोकसंगीत के लिए भी जाना जाता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। इस राज्य का गठन 26 जनवरी 1950 को हुआ था। उत्तर प्रदेश अपनी कई प्रसिद्धि के साथ-साथ अपने लोक संगीत के लिए भी जाना जाता है और लोक गीत यहां की संस्कृति को भी दर्शाते हैं। इसलिए इस आर्टिकल में हम यहां के लोकगीत के बारे में जानेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लोकगीत किसे कहते है?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लोकगीत एक प्रकार का पारंपरिक और ग्रामीण संगीत है। लोककथाओं की अवधारणा मूल रूप से परिवारों और अन्य छोटे सामाजिक समूहों के माध्यम से पेश की गई थी।कहा जाता है कि लोक साहित्य की तरह लोक संगीत भी भारत के विभिन्न राज्यों में आज भी देखने को मिलता है और वहां की शैली के अनुरूप देखा जाता है। हर राज्य में लोकगीतों को नाम भी दिये जाते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूपी का लोकगीत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उत्तर प्रदेश सबसे बड़े राज्यों में से एक है और यहां का राज्य काफी मशहूर है। लोक संगीत उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में लोक मनोरंजन का एक हिस्सा है। इसमें लोकगीत भी शामिल हैं इसलिए उत्तर प्रदेश के लोकगीतों के बारे में यहां बताया जा रहा है:&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रागिनी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;रागिनी या ढोला उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र का एक लोक गीत है। यह उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र का एक प्रमुख लोक गीत है। उत्तर प्रदेश में ढोला के नाम पर कुछ लोकगीत भी गाए जाते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिरहा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संगीत शैलियों में बिरहा विशेष रूप से लोकप्रिय है। बिरहा उन महिलाओं की मनःस्थिति को दर्शाता है जो आजीविका की तलाश में अपने पतियों से अलग हो जाती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सोहर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;उत्तर प्रदेश के लोकगीतों में सोहर सर्वाधिक लोकप्रिय है। ये गीत क्षेत्रों में प्रचलित धार्मिक संस्कृति से संबंधित हैं। सोहर मुख्यतः बच्चे के जन्म के समय किया जाता है। आमतौर पर भोजपुरी क्षेत्र में लोकगीतों को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भिखारी ठाकुर को दिया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कजरी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;कजरी भी प्रमुख लोकगीतों में से एक है और सावन के महीने में महिलाओं द्वारा गाया जाता है। यह अर्ध-शास्त्रीय गायन के रूप में भी विकसित हुआ और इसकी गायन शैली बनारस से जुड़ी हुई है। कजरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध लोकगीत भी माना जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चुनावी दौर में भी गाई जाती रागिनी&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;उत्तर प्रदेश में जब भी चुनावी बिगुल बजता है तो नेता के आगमन से पहले सभी जनसभाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, आपने भी कभी न कभी लोक संगीत जरूर सुना होगा. उस संगीत को रागिनी कहा जाता है। चुनाव के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत की लोक गायन शैली और उसके भूले-बिसरे गायकों की याद आती है.&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;किसान आंदोलन में सुनने को मिल रहा रागिनी&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;देश के कई राज्यों के किसान हजारों की संख्या में अपनी मांगो को लेकर नोएडा से दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। चिल्ला बॉर्डर, महामाया फ्लाईओवर समेत अन्य बॉर्डर पर किसानों का झुंड लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। वहीं ठिठुरन भरी रात में भी वो अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। इस दौरान सभी किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गाई जाने वाली लोकगीत रागिनी को गा कर रात काट रहे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-video&quot;&gt;&lt;/figure&gt;
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