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       <title>Today dr manmohan singh News | Latest dr manmohan singh News | Breaking dr manmohan singh News in English | Latest dr manmohan singh News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का dr manmohan singh समाचार:Today dr manmohan singh News ,Latest dr manmohan singh News,Aaj Ka Samachar ,dr manmohan singh समाचार ,Breaking dr manmohan singh News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>2008 में क्यों गिरने वाली थी UPA सरकार, अमर सिंह की बात पर मान गए मुलायम, इस तरह की थी मनमोहन गवर्मेंट की मदद</title><link>https://up.inkhabar.com/politics/why-upa-government-was-going-to-fall-in-2008-mulayam-agreed-to-amar-singhs-words-this-was-the-help-of-manmohan-government/</link><pubDate>December 27, 2024, 9:31 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-9-5.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>लखनऊ: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में शोक की लहर है. हर कोई उनके काम और देश के विकास में उनके योगदान को याद कर रहा है. उनकी नीतियों ने भारत को आर्थिक संकट से बचाया था। दुनिया के अग्रणी अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने कई ऐ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ: &lt;/strong&gt;पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में शोक की लहर है. हर कोई उनके काम और देश के विकास में उनके योगदान को याद कर रहा है. उनकी नीतियों ने भारत को आर्थिक संकट से बचाया था। दुनिया के अग्रणी अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने कई ऐसे फैसले लिये जो देश के लिये फायदेमंद साबित हुये। हालांकि एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके एक फैसले की वजह से उनकी ही सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;साल 2008 की वो बात&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;देश में साल 2008 में जब यूपीए की सरकार थी, सरकार का गठन सपा और लेफ्ट पार्टियों की सहयोग से बनी थी। लेकिन मनमोहन सिंह का एक निर्णय जो उनके सरकार पर संकट ला दिया। ऐसे में सपा के जनक मुलायम सिंह ने उनकी सरकार को इस संकट से उबारा था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परमाणु समझौता को लेकर विवाद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;साल 2008 में मनमोहन सरकार ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौता किया. लेकिन उनके सहकर्मी उनके इस फैसले के खिलाफ थे. सपा और तमाम वामपंथी दल सिंह साहब के इस फैसले के खिलाफ थे. हालांकि विपरित हालात होने के बाद भी मनमोहन सिंह अपने निर्णय से अपना कदम पीछे नहीं किए. जिस वजह से लेफ्ट पार्टियों ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिरने की नौबत आ गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आगे क्या हुआ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसे में लेफ्ट पार्टियों के समर्थन वापस लेने के बाद सभी की निगाहें अब सपा के तरफ थी कि वो सरकार का सपोर्ट करेगी या नहीं. हालांकि, सपा भी इस फैसले के खिलाफ थी. ऐसे में अमर सिंह कांग्रेस और सपा के बीच सहयोगी बने और मुलायम सिंह को मना लिया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बेहद खास थे अमर सिंह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अमर सिंह उन दिनों मुलायम सिंह के बेहद खास थे. मुलायम उनकी बात सुनते थे और उन्हें तवज्जो भी देते थे. अमर सिंह की सलाह के बाद मुलायम सिंह ने अपना रुख बदल लिया. उन्होंने परमाणु समझौते को लेकर सरकार का समर्थन किया. आख़िरकार मुलायम सिंह ने मनमोहन सिंह सरकार पर आए संकट को सुलझाया और इस तरह सरकार गिरने से बच गई.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>मनमोहन सिंह की सरकार से जुड़ी देश के लिए वो 10 बड़े फैसले, जानें यहां</title><link>https://up.inkhabar.com/politics/those-10-big-decisions-for-the-country-related-to-manmohan-singhs-government-know-here/</link><pubDate>December 27, 2024, 6:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-3-2-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>लखनऊ: पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधारों के जनक डॉ. मनमोहन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार रात 9.51 बजे दिल्ली के एम्स में उनका निधन हो गया। उन्होंने आरबीआई गवर्नर से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया. आर्थिक सुधारों की दिशा में उन्होंन...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधारों के जनक डॉ. मनमोहन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार रात 9.51 बजे दिल्ली के एम्स में उनका निधन हो गया। उन्होंने आरबीआई गवर्नर से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया. आर्थिक सुधारों की दिशा में उन्होंने जीएसटी, गरीबों को रसोई गैस की खरीद पर सब्सिडी, नरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, आरटीआई जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिनका असर देश की अर्थव्यवस्था पर आज भी दिख रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कई क्रांतिकारी कदम उठाए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह 1991 से लेकर 1996 तक देश के वित्त मंत्री रहे। इसके बाद वो 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री की पद पर रहे. इससे पहले वह आरबीआई के गवर्नर भी रह चुके हैं। उन्होंने भारत की आर्थिक संरचना को मजबूत और उदार बनाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बनाई। तो आइए जानते हैं उनके 10 बड़े आर्थिक सुधारों के बारे में.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एफडीआई में वृद्धि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों (खुदरा, विमानन, दूरसंचार, बीमा) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाई। इससे विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए और तकनीकी प्रगति हुई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आर्थिक स्थिति बेहतर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वित्त मंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) की नीति लागू की। औद्योगिक लाइसेंस राज समाप्त हुआ, विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हुई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2005 में नरेगा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2005 में नरेगा लागू किया, जो ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देने वाला कार्यक्रम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिली।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पेट्रोल-डीजल की कीमतों में डिरेगुलेशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने 2010 में पेट्रोल की कीमतों को बाजार से जोड़ने और डीजल की कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी की नीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि सब्सिडी का बोझ कम हुआ और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जीएसटी की नींव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने जीएसटी की नींव रखी, इसकी अवधारणा को आगे बढ़ाया और विभिन्न करों को एकीकृत करने की दिशा में काम किया। हालाँकि, यह कर प्रणाली बाद में वर्ष 2017 में लागू हुई। कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया। इससे लॉजिस्टिक लागत कम हुई और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बैंकिंग सेक्टर में काम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने बैंकों में एनपीए की समस्या को कम करने के लिए मजबूत नीतियां बनाईं। ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए बैंकों को ग्रामीण शाखाएँ खोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र को मजबूत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नीतियां बनाईं, जिससे भारत एक वैश्विक आईटी केंद्र बन गया। यह क्षेत्र भारत के लिए निर्यात और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बन गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त किया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वर्ष 2013 में ही डॉ. मनमोहन सिंह ने चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त कर दिया और कोयला आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाईं। इससे संबंधित क्षेत्रों में निवेश बढ़ा और उत्पादन में सुधार हुआ.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लागू की&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. मनमोहन सिंह ने गरीबों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लागू की। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ कुपोषण की समस्या भी कम हुई।&lt;/p&gt;
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