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       <title>Today Allahabad High court News News | Latest Allahabad High court News News | Breaking Allahabad High court News News in English | Latest Allahabad High court News News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Allahabad High court News समाचार:Today Allahabad High court News News ,Latest Allahabad High court News News,Aaj Ka Samachar ,Allahabad High court News समाचार ,Breaking Allahabad High court News News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>High Court: जमानत याचिका के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी-धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब धर्म परिवर्तन नहीं</title><link>https://up.inkhabar.com/states/high-court-allahabad-high-courts-comment-during-bail-petition-religious-freedom-does-not-mean-religious-conversion/</link><pubDate>August 13, 2024, 7:48 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/rty-1.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। जबरन इस्लाम कबूल कराने और यौन शोषण करने के आरोपी अजीम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 का उद्देश...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; जबरन इस्लाम कबूल कराने और यौन शोषण करने के आरोपी अजीम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 का उद्देश्य सभी व्यक्तियों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देना है। जो भारत की सामाजिक सद्भावना को दर्शाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जमानत याचिका को किया रद्द&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को रद्द करते हुए कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य भारत में धर्मनिरपेक्षता की भावना को बरकरार रखना है। कोर्ट ने कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म को मानने का अधिकार देता है वो उसका पालन कर सकता है और संविधान उसका प्रचार करने का अधिकार भी देता है। लेकिन, यह व्यक्तिगत अधिकार धर्म परिवर्तन कराने के सामूहिक अधिकार में परिवर्तित नहीं होता। क्योंकि धार्मिक स्वतंत्रता, धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरित होने वाले व्यक्ति दोनों को समान रूप से प्राप्त होती है। हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी अजीम को जमानत देने से इनकार करते हुए की।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गंभीर धाराओं के साथ केस दर्ज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने अजीम पर एक लड़की को जबरन इस्लाम कबूल कराने और उसका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। ये आरोप गंभीर है। आरोपी के खिलाफ धारा 323/ 504/506 आईपीसी और धारा 3/5(1) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत शिकायत दर्ज की गई है। इस मामले पर हाईकोर्ट में न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। आरोपी याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपनी जमानत अर्जी लगाई थी और दावा किया था कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसने दावा किया कि शिकायत कराने वाली लड़की उसके साथ रिश्ते में थी। लड़की स्वेच्छा से अपना घर छोड़कर चली गई थी, लेकिन कोर्ट ने आरोपी पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी अजीम को जमानत याचिका को खारिज कर दिया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Gyanvapi Case: कल तक बढ़ी सर्वे पर लगी रोक, शुक्रवार को फिर सुनवाई करेगा हाई कोर्ट</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/gyanvapi-case-prohibition-on-survey-extended-till-tomorrow-high-court-will-hear-again-on-friday/</link><pubDate>July 26, 2023, 12:33 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-2023-07-25T142617.927-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। ज्ञानवापी में ASI सर्वेक्षण पर लगी रोक कल तक के लिए बढ़ा दी गयी है। शुक्रवार को इलाहबाद हाई कोर्ट फिर इस मामले में सुनवाई करेगा। CJ प्रीतिंकर दिवाकर ने आज अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ASI के वैज्ञानिकों को 4.30 बजे त...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; ज्ञानवापी में ASI सर्वेक्षण पर लगी रोक कल तक के लिए बढ़ा दी गयी है। शुक्रवार को इलाहबाद हाई कोर्ट फिर इस मामले में सुनवाई करेगा। CJ प्रीतिंकर दिवाकर ने आज अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ASI के वैज्ञानिकों को 4.30 बजे तलब किया था। ASI की तरफ से वैज्ञानिक आलोक त्रिपाठी कोर्ट में पेश हुए। वहां उन्होंने कोर्ट में बताया कि जीपीआर और फोटोग्राफी विधि से कैसे सर्वेक्षण किया जायेगा। इसके अलावा उन्होंने कोर्ट में जानकरी दी कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण से मूल ढांचे को कोई क्षति नहीं पहुंचेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;कोर्ट ने ASI से पूछा ये सवाल&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस बीच HC ने ASI ये यह भी पूछा कि सर्वे कितना हो चुका है? इसे कब तक में पूरा कर लिया जायेगा? जिस पर ASI ने कहा कि अगर अनुमति मिली तो 31 जुलाई तक सर्वे पूरा कर लिया जायेगा। इससे पहले मस्जिद पक्ष की तरफ से कहा गया कि इस सर्वे से संरचना को क्षति पहुंच सकती है जबकि मंदिर पक्ष का कहना है कि सर्वे के बाद ही मंदिर के स्ट्रक्चर का सही से पता चलेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;इस वजह से सर्वे की मांग&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया है कि वादियों के पास कोई सबूत नहीं है। साक्ष्य जुटाने के लिए हिंदू पक्ष सर्वे चाहता है। बिना साक्ष्य के उन्होंने वाद दायर किया है। वहीं जब मुस्लिम पक्ष के वकील नकवी ने कोर्ट में वाराणसी कोर्ट द्वारा दिए आदेश को पढ़ा तो चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि अपनी शिकायत के संबंध में दलील दीजिए और यह सर्वे अवैध क्यों है इस बारे में बताइये।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;हिंदू पक्ष की दलील&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अलावा चीफ जस्टिस ने हिंदू पक्ष के वकील से पूछा है कि खुदाई करवाना जरूरी है क्या? इस सवाल का जवाब देते हुए हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि खुदाई जरूरी है लेकिन मस्जिद के अंदर नहीं। हिंदू पक्ष की तरफ से यह दलील दी जा रही है कि राम जन्मभूमि में भी ऐसा सर्वे हुआ था, वहां पर तो कोई नुकसान नहीं हुआ था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>उत्तर प्रदेश: यूपी के दो आईएएस अधिकारीयों को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का दिया निर्देश</title><link>https://up.inkhabar.com/national/uttar-pradesh-supreme-court-directs-release-of-two-ias-officers-of-up/</link><pubDate>April 21, 2023, 2:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/download-2023-04-20T185555.543-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>लखनऊ। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा दी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दो आईएएस अधिकारीयों को रिहा करने का जारी किया निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल यानी कल अदालत की अवमानना ​​के मामले में न्यायिक हिरासत से उत्तर प्रदेश प्रशासन के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों शाहिद मंज़र अब्बास रिज़वी और सरयू प्रसाद मिश्रा को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है. दरअसल रिटायर्ड जजों की सुविधाओं से जुड़े आदेश में देरी पर नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव और विशेष सचिव वित्त को हिरासत में लेने का आदेश था. हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अगले शुक्रवार को सुनवाई की तारीख लगाई. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक मांगी थी. राज्य सरकार ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में केस मेन्शन किया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई कोर्ट ने लगाए थे आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि हाई कोर्ट ने कहा था कि ये दोनों अफसर मांगी गई जानकारी को कई आदेशों के बावजूद भी पेश नहीं कर रहे थे. दोनों अफसरों को अवमानना का आरोप लगाते हुए 20 अप्रैल यानी कल इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य वित्त के खिलाफ वारंट जारी करते हुए बीते दिन हाजिर होने के आदेश दिए थे.&lt;/p&gt;
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