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       <title>Today सुप्रीम कोर्ट News | Latest सुप्रीम कोर्ट News | Breaking सुप्रीम कोर्ट News in English | Latest सुप्रीम कोर्ट News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का सुप्रीम कोर्ट समाचार:Today सुप्रीम कोर्ट News ,Latest सुप्रीम कोर्ट News,Aaj Ka Samachar ,सुप्रीम कोर्ट समाचार ,Breaking सुप्रीम कोर्ट News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://up.inkhabar.com/tag/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
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            <title>UP Inkhabar</title>
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            <description>Feed provided by UP Inkhabar.</description>
        </image><item><title>Breaking News: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा एक्ट को बताया सही, हाई कोर्ट के फैसले को किया खारिज</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/breaking-news-supreme-court-declared-up-madrassa-act-right-rejected-high-courts-decision/</link><pubDate>November 5, 2024, 6:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/sup.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। यूपी मदरसा एक्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मदरसा एक्ट संविधान का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यूपी मदरसा एक्ट संवैधानिक रुप से सही है। ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; यूपी मदरसा एक्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मदरसा एक्ट संविधान का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यूपी मदरसा एक्ट संवैधानिक रुप से सही है। उच्चतम न्यायालय ने कुछ प्रावधानों को छोड़कर यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 की संवैधानिक वैधता को कायम रखा है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Fee: पैसों की कमी के चलते नहीं भर पाया फीस, सुप्रीम कोर्ट बना सहारा</title><link>https://up.inkhabar.com/states/fee-due-to-lack-of-money-could-not-pay-the-fees-supreme-court-became-the-support/</link><pubDate>October 1, 2024, 2:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/qwe-1-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। पैसों की कमी के चलते टाइम से IIT दाखिले की फीस न भर पाने वाले छात्र के हक में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को उसका एडमिशन करने का निर्देश दिया है। याचिका दायर करने वाला छात्र यूपी का स्थानीय निवासी है। और उसके पिता एक दिहाड़ी ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; पैसों की कमी के चलते टाइम से IIT दाखिले की फीस न भर पाने वाले छात्र के हक में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को उसका एडमिशन करने का निर्देश दिया है। याचिका दायर करने वाला छात्र यूपी का स्थानीय निवासी है। और उसके पिता एक दिहाड़ी मजदूर है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;समय रहते फीस नहीं भर पाए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;रिपोर्ट के मुताबिक छात्र का दाखिला प्रतिष्ठित आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स में हुआ था। उसे 24 जून शाम 5 बजे तक अपना दाखिला सुरक्षित करने के लिए ऑनलाइन फीस जमा करानी थी। उसके मजदूर पिता को इतने पैसे इकट्ठे करने में वक्त लग गया। उन्होंने किसी तरह शाम 4.45 बजे तक फीस के पैसे इकट्ठे कर लिए, लेकिन समय सीमा से पहले ऑनलाइन फीस का पोर्टल बंद हो गया और वह फीस नहीं भर पाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उसके पसंद के कोर्स में दाखिला दें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद उसे दाखिला नहीं दिया गया। इससे आहत छात्र के पिता ने तीन महीने तक एससी/एसटी आयोग, झारखंड और मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अंत में जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट छात्र की मदद के लिए आगे आया है। सोमवार को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ ने IIT धनबाद को निर्देश देते हुए कहा कि छात्र को कोर्स की उसी सीट पर दाखिला दिया जाए, जिस पर उसका शुरू में दाखिला हुआ था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नई सीट की व्यवस्था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने यह फैसला सुनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो कि न्यायालय को ऐसी परिस्थितियों से निपटने में पूर्ण न्याय करने का अधिकार देते हैं। कोर्ट ने कहा कि छात्र के लिए एक नई सीट की व्यवस्था की जाए। जिससे अन्य छात्र को इससे परेशानी न हो। सीजेआई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हम ऐसे युवा प्रतिभाशाली लड़के को ऐसे जाने नहीं दे सकते।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीएम योगी वाला बुलडोजर एक्शन अब नहीं चलेगा</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/big-decision-of-supreme-court-cm-yogis-bulldozer-action-will-no-longer-work/</link><pubDate>September 17, 2024, 10:22 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-8-5-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ की तरह बुलडोजर एक्शन लेने वाले राज्यों पर सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुलडोजर एक्शन पर लगाम लगा दी है और सभी प्रदेशों को आदेश दिया है. अब कोई भी प्रदेश बिना इजाजत के बुलडोजर...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;: यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ की तरह बुलडोजर एक्शन लेने वाले राज्यों पर सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुलडोजर एक्शन पर लगाम लगा दी है और सभी प्रदेशों को आदेश दिया है. अब कोई भी प्रदेश बिना इजाजत के बुलडोजर एक्शन नहीं ले पाएंगे. बता दें कि बुलडोजर एक्शन के विरोध में दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि आगामी सुनवाई तक किसी भी प्रदेश में कोई बुलडोजर नहीं चलेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने दिए कुछ शर्तें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हालांकि, बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कुछ शर्तें भी रखी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में राज्य सरकारों को बुलडोजर कार्रवाई करने की छूट दी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि उनका आदेश सड़क, फुटपाथ, रेलवे लाइन, जलस्रोतों के अतिक्रमण पर लागू नहीं होगा। यानी अगर कोई सड़क, फुटपाथ या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण करता है तो राज्य सरकार उसके खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई कर सकती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एमपी में बुलडोजर एक्शन में सभी समुदाय शामिल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एसजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई में सभी समुदाय के लोग शामिल थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगे कोई कार्रवाई करने पर रोक लगा दी. हालांक‍ि, कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सड़क, फुटपाथ, रेलवे लाइन, जलस्रोतों पर अतिक्रमण पर लागू नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट 1 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Statement: बुलडोजर न्याय पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद सामने आया मायावती का बड़ा बयान, कही ये बात</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/statement-mayawatis-big-statement-came-out-after-the-supreme-courts-comment-on-bulldozer-justice-said-this/</link><pubDate>September 3, 2024, 4:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/POLITICS-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। बुलडोजर न्याय&amp;#8217; एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बड़ा बयान दिया है। मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बुलडोजर का भी उपयोगी अब सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; बुलडोजर न्याय&amp;#8217; एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बड़ा बयान दिया है। मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बुलडोजर का भी उपयोगी अब सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले के मुताबिक ही होना चाहिए। उचित तो यही होगा कि इसका इस्तेमाल करने की जरूरत ही ना पड़े।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मायावती ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मायावती ने पोस्ट किया कि &amp;#8216;देश में आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए। अपराधियों के अपराध की सजा उनके परिवार और करीबी लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। यह सब हमारी पार्टी की रही सरकार ने &amp;#8216;कानून द्वारा कानून का राज’स्थापित करके भी दिखाया है।&amp;#8217; बुलडोजर का उपयोग अब सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय के मुताबिक ही होना चाहिए। हालांकि उचित तो यही होगा कि इसका इस्तेमाल करने की जरूरत ही ना पड़े, क्योंकि आपराधिक तत्वों को सख्त कानूनों के तहत भी निपटाया जा सकता है।&amp;#8217;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट जारी करेगा दिशा-निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मायावती ने लिखा कि &amp;#8216; आपराधिक तत्वों के परिवार व नजदीकियों पर बुलडोजर का इस्तेमाल करने की बजाय संबंधित अधिकारियों पर ही कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। जो ऐसे तत्वों से मिलकर, पीड़ितों को सही न्याय नहीं देते हैं। सभी सरकारें इस ओर जरूर ध्यान दें।&amp;#8217; बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपराध के आरोपियों के घरों या संपत्तियों को ध्वस्त करने की बढ़ती प्रवृत्ति की आलोचना की थी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए &amp;#8220;बुलडोजर न्याय&amp;#8221; का मामला बताया था। कोर्ट ने घोषणा की है कि इस मुद्दे के समाधान के लिए वह दिशा-निर्देश जारी करेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Teacher Recruitment: शिक्षक भर्ती के मामले में ओबीसी वर्ग ने दायर की कैविएट</title><link>https://up.inkhabar.com/desh-pradesh/teacher-recruitment-obc-category-filed-caveat-in-the-matter-of-teacher-recruitment/</link><pubDate>August 22, 2024, 6:23 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/thjk-300x169.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटकी पड़ी है। कोर्ट ने 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए रहे हैं। इस बीच ओबीसी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटकी पड़ी है। कोर्ट ने 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए रहे हैं। इस बीच ओबीसी वर्ग के अभ्यार्थियों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ओबीसी वर्ग ने दायर की याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऐसा माना जा रहा है कि जनरल कैटेगरी के अभ्यार्थी सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे संभावना है कि OBC अभ्यर्थियों की ओर से पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई है। ताकि कोर्ट कोई फैसला लेने से पहले उनके पक्ष को भी सुने। ओबीसी वर्ग के अभ्यार्थियों ने अनारक्षित वर्ग के अभार्थियों के सुप्रीम कोर्ट जाने की सूरत में उनका भी पक्ष सुनने के लिए ये कैविएट दाखिल की है। OBC अभ्यर्थियों की मांग हौ कि जनरल श्रेणी के अभ्यर्थियों के समायोजन की सूरत में हाईकोर्ट में रिट करने वाले लगभग 4000 ओबीसी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नियुक्ति पत्र न मिलने पर करेंगे विरोध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नहीं वो जनरल वर्ग के समायोजन का विरोध करेंगे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन शिक्षकों के लिए परेशानी बढ़ गई है जो पिछले चार-पांच सालों से नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जनरल वर्ग के अभ्यार्थी इस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर रूख कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष में याचिका दायर कर सकते है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bharat Bandh: भारत बंद में आपातकालीन सेवाएं जारी, परिचालन में होगी परेशानी</title><link>https://up.inkhabar.com/national/bharat-bandh-emergency-services-continue-in-bharat-bandh-there-will-be-problems-in-operations/</link><pubDate>August 21, 2024, 2:34 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/egk-300x169.webp</image><category>देश</category><excerpt>लखनऊ। आज 21 अगस्त यानी बुधवार को भारत बंद रहेगा। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में बुधवार को भारत बंद की घोषणा की है। राजस्थान में एससी/एसटी समुदायों से म...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; आज 21 अगस्त यानी बुधवार को भारत बंद रहेगा। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में बुधवार को भारत बंद की घोषणा की है। राजस्थान में एससी/एसटी समुदायों से महत्वपूर्ण समर्थन पाने वाले इस बंद में देश भर से व्यापक भागीदारी की उम्मीद कर रहे है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जरूरतमंद को आरक्षण मिले&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अधिकारियों को विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए है। सुप्रीम कोर्ट के राज्यों को एससी और एसटी ग्रुप में उप-वर्गीकरण को मंजूरी देने के फैसले ने व्यापक विवाद को पैदा किया है। इस फैसले का मकसद सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों को आरक्षण देने को प्राथमिकता देना है, लेकिन अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इसका विरोध किया है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने विरोध के साथ एकता दिखाने के लिए सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद करने का आह्वान किया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इमरजेंसी सेवाएं जारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनिश्चित है कि क्या देश भर के बाजार इसका पालन करेंगे, क्योंकि बाजार समितियों की तरफ से इसको लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि बंद के कारण सार्वजनिक परिवहन और निजी क्षेत्र के परिचालन में परेशानी हो सकती है, लेकिन एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंद के आह्वान के बावजूद सरकारी कार्यालय, पेट्रोल पंप, बैंक, स्कूल और खुले रहेंगे। इसके अतिरिक्त चिकित्सा देखभाल, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन, रेल सेवाएं और बिजली आपूर्ति समेत आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Mukhtar Ansari: SC से बोले उमर अंसारी, कहा- जेल में दिया गया जहर… योगी सरकार को मिला नोटिस</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/mukhtar-ansari-omar-ansari-spoke-to-sc-said-poison-given-in-jail-yogi-government-got-notice/</link><pubDate>July 15, 2024, 9:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-6-3-300x169.png</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ : गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत को तीन माह से ऊपर हो गया है। मुख्तार का परिवार शुरू से आरोप लगा रहा है कि उसे जेल में जहर दिया गया। इसके चलते परिवार सुप्रीम कोर्ट भी गया है। सोमवार (15 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ &lt;/strong&gt;: गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत को तीन माह से ऊपर हो गया है। मुख्तार का परिवार शुरू से आरोप लगा रहा है कि उसे जेल में जहर दिया गया। इसके चलते परिवार सुप्रीम कोर्ट भी गया है। सोमवार (15 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई की। मुख्तार के बेटे उमर की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत में मौत को लेकर सवाल उठाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुख्तार को जेल में जहर दिया- उमर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोप है कि मुख्तार को जेल में जहर दिया गया। इसकी जांच जरूरी है। सिब्बल ने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्तार अंसारी को जेल में जान से मारने की धमकी की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अब उसकी मौत हो चुकी है। इसलिए यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है। ऐसे में वह इस याचिका में संशोधन कर नई याचिका दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए कोर्ट से इजाजत मांगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को दिया नोटिस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन की उमर अंसारी की मांग पर यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी किया है। यूपी सरकार के जवाब के बाद शीर्ष अदालत तय करेगी कि संबंधित याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की जाएगी या नहीं। मुख्तार अंसारी के बेटे उमर ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने कहा था कि उसके पिता की जान को खतरा है, इसलिए उसे यूपी की जेल से ट्रांसफर किया जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उसे जेल ले जाया गया और जान चली गई: सिब्बल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत में जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की बेंच ने उमर की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्तार को जेल ले जाया गया और उसकी मौत हो गई। इस मामले की जांच होनी चाहिए। इस पर जस्टिस रॉय ने कहा कि हम उसे वापस नहीं ला सकते। सिब्बल ने जवाब दिया कि इस देश में लोगों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पैगंबर को जिसका डर था, वही हुआ: सिब्बल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी नटराज ने कहा कि शुरुआत में जो मांग की गई थी, उसका समाधान हो गया है। सिब्बल ने तुरंत कहा कि पैगंबर को जिसका डर था, वही हुआ है। वरिष्ठ वकील कह रहे थे कि उमर अब्दुल्ला ने मुख्तार की जान को खतरे में डालने की बात कही थी और उसकी मौत भी हो गई। इसके जवाब में जस्टिस रॉय ने कहा कि आप (कपिल सिब्बल) कहते हैं कि कैदी को जेल में इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई में उमर अब्दुल्ला की याचिका में संशोधन के लिए यूपी की योगी सरकार को नोटिस जारी किया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>दिल की दुश्मन बनी कोविशील्ड, दौड़ते-खेलते लोगों की हो रही मौतों के लिए VACCICNE जिम्मेदार- BHU कार्डियोलॉजिस्ट</title><link>https://up.inkhabar.com/national/covishield-has-become-the-enemy-of-the-heart-vaccicne-is-responsible-for-the-deaths-of-people-while-running-bhu-cardiologist/</link><pubDate>May 3, 2024, 10:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/download-2024-05-03T154412.559-300x211.png</image><category>देश</category><excerpt>लखनऊ। कोरोना वैक्सीन लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। वैक्सीन से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं. पहली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी है और दूसरी सुप्रीम कोर्ट से. वैक्सीन के सर्टिफिकेट से PM नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा ली गई है. दूसरी तरफ ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; कोरोना वैक्सीन लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। वैक्सीन से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं. पहली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी है और दूसरी सुप्रीम कोर्ट से. वैक्सीन के सर्टिफिकेट से PM नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा ली गई है. दूसरी तरफ कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की जांच की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;डॉक्टर दे रहे अपनी राय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर चारो तरफ चर्चा की जा रही है। डॉक्टर इस पर अपनी-अपनी राय बता रहे है। कोविड की तरह ही बिना किसी हृदय की बीमारी और बिना किसी लक्षण के चलते &amp;#8211; फिरते, नाचते गाते, दौड़ते खेलते अचानक यूथ और स्वस्थ लोगों को हृदयाघात हो जा रहा है। जबकि सीने में दर्द, घबराहट और पसीना आना इसकी पहचान थी। इसके लिए बिना चार क्लीनिकल जांच और साइड इफ़ेक्ट पर अध्ययन किये ही अंधाधुंध लोगों को लगाई गई कोविड वैक्सीन ही इसकी जिम्मेदार है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रो. डॉ. ओम शंकर ने बताया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;BHU कार्डियोलॉजिस्ट ने कहा कि कोविड के लिए वैक्सीन नहीं आया, बल्कि वैक्सीन के लिए कोविड आया था. इतनी जल्दी कोई भी वैक्सीन नहीं तैयार किया जा सकता है. उस पर लंबा शोध कर के तैयार किया जाता है. सरकार को चाहिए कि आने वाले बजट में मेडिकल के लिए बजट बढ़ा कर कार्डियक इंस्टीट्यूट अलग से बनाएं। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक हर तीसरा व्यक्ति हृदय रोग से ग्रसित है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे पर SC ने लगाई रोक, इलाहबाद HC का फैसला ख़ारिज</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/sc-bans-survey-of-shahi-idgah-mosque-rejects-allahabad-hcs-decision/</link><pubDate>January 16, 2024, 6:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-2024-01-16T120152.127-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे को लेकर इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल इलाहबाद HC ने एडवोकेट कमिश्नर को सर्वे का आदेश दिया था अब SC ने आयुक्त नियुक्त करने के इलाहाबाद उच्च न्याया...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे को लेकर इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल इलाहबाद HC ने एडवोकेट कमिश्नर को सर्वे का आदेश दिया था अब SC ने आयुक्त नियुक्त करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>शाही ईदगाह मामले में मुस्लिम पक्ष को झटका, इलाहबाद HC के फैसले पर SC ने रोक लगाने से किया इंकार</title><link>https://up.inkhabar.com/states/shock-to-muslim-side-in-shahi-eidgah-case-sc-refuses-to-stay-allahabad-hcs-decision/</link><pubDate>December 15, 2023, 8:22 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/download-2023-12-14T165758.483-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ। शाही ईदगाह मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कृष्‍ण जन्‍मभूमि और शाही ईदगाह परिसर के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मालूम हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को कृष्‍ण जन्‍मभूमि और शाह...</excerpt><content>
&lt;p&gt;लखनऊ।&lt;a href=&quot;https://up.inkhabar.com/states/shri-krishna-janmabhoomi-after-gyanvapi-now-survey-of-shahi-idgah-will-be-done-approval-received-from-high-court/&quot;&gt; शाही ईदगाह &lt;/a&gt;मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कृष्‍ण जन्‍मभूमि और शाही ईदगाह परिसर के सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मालूम हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को कृष्‍ण जन्‍मभूमि और शाही ईदगाह परिसर के सर्वे की अनुमति दी थी। जिसे लेकर मथुरा ईदगाह कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि ईदगाह कमिटी को सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>रात में अकेले मिलने के लिए बुलाते हैं…, महिला जज ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से मांगी इच्छामृत्यु</title><link>https://up.inkhabar.com/states/call-to-meet-alone-at-night-female-judge-asks-supreme-court-chief-justice-for-euthanasia/</link><pubDate>December 15, 2023, 8:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/download-12-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ।यूपी के बांदा में तैनात सिविल जज अर्पिता साहू ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग की है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। साथ ही उसमें कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि इसको ल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt;यूपी के बांदा में तैनात सिविल जज अर्पिता साहू ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की मांग की है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। साथ ही उसमें कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि इसको लिखने का उद्देश्य मेरी कहानी बताने और प्रार्थना करने के अलावा कुछ और नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;शारीरिक मानसिक शोषण का आरोप&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि मैं बहुत उत्साह के साथ न्यायिक सेवा में शामिल हुई। सोचा कि आम लोगों को न्याय दिलवाऊंगी। लेकिन मुझे क्या पता था कि न्याय के लिए हर दरवाजे का भिखारी बनना पड़ेगा। मुख्य न्यायाधीश को संबोधित पत्र में उन्होंने लिखा कि काफी निराश मन से कहना पड़ रहा है कि उनका शारीरिक और मानसिक शोषण हुआ है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;ये है मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने ऐसा आरोप लगाते हुए कहा कि बाराबंकी में तैनाती के दौरान प्रताड़ना से गुजरना पड़ा। उन्होंने जिला जज पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। उनसे रात में भी जिला जज से मिलने के लिए कहा गया। उन्होंने वर्ष 2022 में इस मामले की शिकायत इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से की लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनकी परेशानी को जानने की कोशिश तक नहीं की गई। जुलाई 2023 में अर्पिता साहू ने फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट की आंतरिक समिति के सामने इस मामले को उठाया लेकिन जांच शुरू होने में 6 महीने लग गए। इस दौरान हजार ईमेल भेजने पड़े। अर्पिता ने प्रस्तावित जांच को महज दिखावा बताया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को लिखा पत्र&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अर्पिता ने पत्र में आगे लिखा है कि मैंने जांच लंबित रहने के दौरान जिला जज के ट्रांसफर का निवेदन किया था लेकिन उनकी इस प्रार्थना पर भी ध्यान नहीं दिया गया। इस मामले की जांच अब जिला जज के अधीन होगी। ऐसे में उन्हें मालूम है जांच का नतीजा क्या निकलेगा? इसलिए उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से जिंदगी को खत्म करने की अनुमति देने की गुहार लगाई है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Article 370: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले CM योगी, SC का निर्णय अभिनंदनीय</title><link>https://up.inkhabar.com/states/article-370-cm-yogi-said-on-the-decision-of-supreme-court-scs-decision-is-welcome/</link><pubDate>December 11, 2023, 10:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-2023-11-09T111728.140-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत का संविधान जम्मू कश्मीर के संविधान से ऊंचा है। SC के फैसले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्रतिक्रिया दी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;SC का निर्णय अभिनंदनीय&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सीएम योगी ने एक्स पर लिखा है कई उच्चतम न्यायालय द्वारा धारा 370 और 35 A के संबंध में दिया गया निर्णय अभिनंदनीय है। यह &amp;#8216;एक भारत-श्रेष्ठ भारत&amp;#8217; की भावना को मजबूती प्रदान करने वाला है। &amp;#8216;राष्ट्र प्रथम&amp;#8217; की भावना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू- कश्मीर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने वाले ऐतिहासिक कार्य के लिए 25 करोड़ प्रदेश वासियों की ओर से उनका पुनः हार्दिक आभार। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री के यशस्वी नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख क्षेत्र सुशासन, विकास और समृद्धि के नए मापदंड स्थापित करेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;क्या था अनुच्छेद 370&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान प्रावधान क प्रावधान था। यह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। इस अनुच्छेद की वजह से भारतीय संविधान की उपयोगिता राज्य में सीमित हो जाती थी। इसके तहत भारत के राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर राज्य के किसी हिस्से में बदलाव करके संविधान लागू कर सकते थे लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Article 370: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेता बोल उठे- मेरा भारत महान</title><link>https://up.inkhabar.com/states/article-370-after-the-supreme-courts-decision-congress-leaders-said-my-india-is-great/</link><pubDate>December 11, 2023, 8:26 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-2023-11-13T141051.852-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत का संविधान जम्मू कश्मीर के संविधान से ऊंचा है। इसी फैसले के बाद कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;मेरा भारत महान&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि &amp;#8216;एक “निशान” एक “विधान” मेरा “भारत” महान। दरअसल ये नारा भाजपा का था लेकिन अब इसकी राग कांग्रेस नेता अलाप रहे हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर CJI ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी। जब राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे तभी जम्मू- कश्मीर की संप्रभुता खत्म हो गई थी। इसका संविधान भारत के संविधान के अधीन था। अनुच्छेद 370 स्थायी नहीं बल्कि एक अस्थायी व्यवस्था है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि 370 को हटाना जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;क्या था अनुच्छेद 370&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान प्रावधान क प्रावधान था। यह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। इस अनुच्छेद की वजह से भारतीय संविधान की उपयोगिता राज्य में सीमित हो जाती थी। इसके तहत भारत के राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर राज्य के किसी हिस्से में बदलाव करके संविधान लागू कर सकते थे लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Article 370 Verdict: बरक़रार रहेगा अनुच्छेद 370, भारत के संविधान से चलेगा जम्मू कश्मीर-SC</title><link>https://up.inkhabar.com/states/article-370-verdict-article-370-will-remain-intact-jammu-and-kashmir-will-be-governed-by-the-constitution-of-india-supreme-court/</link><pubDate>December 11, 2023, 6:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/download-2023-12-11T114356.420-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर गई थी, जिसे लेकर उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत का संविधान जम्मू कश्मीर के संविधान से ऊंचा है।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए 370 हटाना सही&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;CJI ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी। जब राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे तभी जम्मू- कश्मीर की संप्रभुता खत्म हो गई थी। इसका संविधान भारत के संविधान के अधीन था। अनुच्छेद 370 स्थायी नहीं बल्कि एक अस्थायी व्यवस्था है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि 370 को हटाना जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जल्द हो चुनाव&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि नए परिसीमन के आधार पर जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव हो। इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश दे दिया गया है। साथ ही अदालत ने ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाये।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;क्या था अनुच्छेद 370&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान प्रावधान क प्रावधान था। यह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। इस अनुच्छेद की वजह से भारतीय संविधान की उपयोगिता राज्य में सीमित हो जाती थी। इसके तहत भारत के राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर राज्य के किसी हिस्से में बदलाव करके संविधान लागू कर सकते थे लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की सहमति जरुरी थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>अमर मणि और मधुमणि त्रिपाठी जेल से हुए रिहा, मधुमिता हत्याकांड में हुई थी सजा</title><link>https://up.inkhabar.com/politics/amar-mani-and-madhumani-tripathi-released-from-jail-sentenced-in-madhumita-murder-case/</link><pubDate>August 25, 2023, 4:54 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-32-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>लखनऊ: पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि जेल से रिहा हो गए हैं। इसके बाद महाराजगंज के नौतनवां कस्बे में पूर्व मंत्री के आवास पर समर्थकों की भीड़ लगी हुई है। प्रशंसक मिठाई और ढोल बजाकर जश्न मना रहे हैं। बताते चलें कि कवियत्री मधुम...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;: पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि जेल से रिहा हो गए हैं। इसके बाद महाराजगंज के नौतनवां कस्बे में पूर्व मंत्री के आवास पर समर्थकों की भीड़ लगी हुई है। प्रशंसक मिठाई और ढोल बजाकर जश्न मना रहे हैं। बताते चलें कि कवियत्री मधुमिता शुक्‍ला के हत्या के मामले में 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की विशेष अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को जेल से रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अच्छे आचरण करने वाले कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसमें इन दोनों की तरफ से भी याचिका दाखिल की गई थी। अब शासन ने भी दोनों को जेल से रिहा करने के आदेश दे दिए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है मधुमिता शुक्ला हत्याकांड?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;9 मई 2003 को लखनऊ के निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उस समय की यूपी की तत्कालीन बसपा सरकार को हिला दिया था। बताया जाता है कि जांच के दौरान मधुमति शुक्ला और अमरमणि त्रिपाठी के बीच प्रेम-प्रसंग का मामला निकल कर सामने आया था। उस समय अमरमणि त्रिपाठी बसपा के कद्दावर नेताओं में शुमार थे। देहरादून की फास्ट ट्रैक अदालत ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, भतीजा रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को दोषी करार ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>ASI सर्वे पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, कहा- दखल देने का कोई औचित्य नहीं</title><link>https://up.inkhabar.com/states/hearing-continues-in-the-supreme-court-regarding-the-demand-to-ban-the-asi-survey-said-there-is-no-justification-to-interfere/</link><pubDate>August 4, 2023, 10:12 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/ज्ञानवापी-मामला-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में हो रहे ASI सर्वे पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गयी है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ मामले में सुनवाई कर रही है। दरअसल मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में हो रहे ASI सर्वे पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गयी है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ मामले में सुनवाई कर रही है। दरअसल मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं सुनवाई के दौरान SC ने कहा है कि ASI सर्वे का काम जारी रहेगा। सर्वे रिपोर्ट को सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखा जाये। अभी दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>प्राइवेट स्कूलों को &amp;#8216;सुप्रीम&amp;#8217; राहत, फीस वापस करने के आदेश पर लगाई रोक</title><link>https://up.inkhabar.com/states/supreme-relief-to-private-schools-stay-on-order-to-refund-fees/</link><pubDate>May 4, 2023, 11:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-2023-05-04T172305.527-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। नोएडा सहित यूपी के सभी प्राइवेट स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड के समय प्राइवेट स्कूलों द्वारा ली गई फीस में से 15% वापस करने के आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड के स...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; नोएडा सहित यूपी के सभी प्राइवेट स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड के समय प्राइवेट स्कूलों द्वारा ली गई फीस में से 15% वापस करने के आदेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड के समय प्राइवेट स्कूलों द्वारा ली गई फीस में से 15 फीसदी वापस करने के निर्देश दिए थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए क्या था मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ लोटस वैली इंटरनेशनल स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना उनका पक्ष जाने आदेश दे दिया। बता दें कि इलाहाबाद HC ने आदेश जारी कर कहा था कि वर्ष 2020-21 में राज्य के सभी स्कूलों में ली गई कुल फीस का 15 फीसदी जोड़कर आगे के सेशन में व्यवस्थित किया जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;ये था HC का निर्देश&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अलावा कोर्ट की तरफ से यह भी निर्देश दिया गया था कि जिन बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है। उन्हें वर्ष 2020-21 में वसूले गए शुल्क का 15 फीसदी वापस लौटाना होगा। इलाहाबाद HC का कहना था कि कोविड के समय जब स्कूल पहले जैसी सुविधा नहीं दे रहे हैं तो पहले की तरह फीस वसूली भी नहीं कर सकते। वहीं अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्राइवेट स्कूलों को राहत दी है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>उत्तर प्रदेश: यूपी के दो आईएएस अधिकारीयों को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का दिया निर्देश</title><link>https://up.inkhabar.com/national/uttar-pradesh-supreme-court-directs-release-of-two-ias-officers-of-up/</link><pubDate>April 21, 2023, 2:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/download-2023-04-20T185555.543-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>लखनऊ। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ&lt;/strong&gt;। बुधवार को वित्त सचिव एसएमए रिजवी और विशेष सचिव सरयू प्रसाद मिश्रा समेत यूपी कैडर के दो आईएएस अफसरों को हिरासत में ले लिया गया था. जिसपर कार्यवाई करने से भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने तुरंत रोक लगा दी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दो आईएएस अधिकारीयों को रिहा करने का जारी किया निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल यानी कल अदालत की अवमानना ​​के मामले में न्यायिक हिरासत से उत्तर प्रदेश प्रशासन के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों शाहिद मंज़र अब्बास रिज़वी और सरयू प्रसाद मिश्रा को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है. दरअसल रिटायर्ड जजों की सुविधाओं से जुड़े आदेश में देरी पर नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव और विशेष सचिव वित्त को हिरासत में लेने का आदेश था. हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अगले शुक्रवार को सुनवाई की तारीख लगाई. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक मांगी थी. राज्य सरकार ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में केस मेन्शन किया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाई कोर्ट ने लगाए थे आरोप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि हाई कोर्ट ने कहा था कि ये दोनों अफसर मांगी गई जानकारी को कई आदेशों के बावजूद भी पेश नहीं कर रहे थे. दोनों अफसरों को अवमानना का आरोप लगाते हुए 20 अप्रैल यानी कल इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य वित्त के खिलाफ वारंट जारी करते हुए बीते दिन हाजिर होने के आदेश दिए थे.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>यूपी: दोषसिद्धि मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अब्दुल्ला आजम, SC सुनवाई को तैयार</title><link>https://up.inkhabar.com/politics/up-abdullah-azam-reaches-supreme-court-in-conviction-case-ready-for-sc-hearing/</link><pubDate>April 20, 2023, 6:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/download-2023-04-20T122431.581-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>लखनऊ। सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने दोषसिद्धि मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद कोर्ट से तय की गई 2 वर्ष की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। जिसके बाद अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने दोषसिद्धि मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद कोर्ट से तय की गई 2 वर्ष की सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। जिसके बाद अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब्दुल्ला आजम खान ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा करने की मांग की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;पहले भी किया था रुख&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि इससे पहले भी अब्दुल्ला ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था लेकिन उस वक़्त SC ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा था लेकिन अब सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। गौरतलब है कि 15 साल पुराने मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 2 साल कैद की सजा मिलने पर अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द कर दी गई थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;ये था मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यूपी विधानसभा सचिवालय ने अब्दुल्ला आजम की सीट को रिक्त घोषित कर दिया था क्योंकि फरवरी 2023 में 15 साल पुराने मामले में मुरादाबाद की एक स्पेशल कोर्ट ने रामपुर की स्वार सीट से सपा विधायक अब्दुल्ला आजम को 2 साल की सजा सुनाई थी।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>