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       <title>Today शुभ मुहूर्त News | Latest शुभ मुहूर्त News | Breaking शुभ मुहूर्त News in English | Latest शुभ मुहूर्त News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का शुभ मुहूर्त समाचार:Today शुभ मुहूर्त News ,Latest शुभ मुहूर्त News,Aaj Ka Samachar ,शुभ मुहूर्त समाचार ,Breaking शुभ मुहूर्त News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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            <title>UP Inkhabar</title>
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            <description>Feed provided by UP Inkhabar.</description>
        </image><item><title>Narak Chaturdashi: आज है नरक चतुर्देशी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title><link>https://up.inkhabar.com/festival/today-is-narak-chaturdashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link><pubDate>October 30, 2024, 10:33 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/्गबो.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>लखनऊ। नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर हर साल मां लक्ष्मी और गणेशी की पूजा नहीं बल्कि यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर यम का दीपक जलाया जाता है। जिसे यम दीपक के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस दीपक [&amp;...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर हर साल मां लक्ष्मी और गणेशी की पूजा नहीं बल्कि यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर यम का दीपक जलाया जाता है। जिसे यम दीपक के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस दीपक को जलाने से घर परिवार के लोगों पर से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। आइए जानते है यम दीप जलाने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यम दीपक कोई धनतेरस के दिन जलाता है तो कोई नरक चतुर्दशी के दिन। इस साल 30 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान यमराज की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद के बाद शुभ मुहूर्त में शाम के समय यमराज के नाम से दीप जलाया जाता है। &lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मंत्रों का जाप करें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नरक चतुर्दशी पर यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा। जो शाम 7 बजकर 2 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। &amp;#8216;मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह | त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ||&amp;#8217; मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी के मौके पर सुबह जल्दी उठकर नहाएं। नहाने के बाद शाम के समय भगवान यमराज की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद यम का दीपक जलाने के लिए मिट्टी का चौमुखा दीपक लें। फिर शाम को प्रदोष काल में दक्षिण दिशा की तरफ ये दीपक जलाकर रखें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Dhanteras: खरीदारी करने के लिए आज धनतेरस पर 1 घंटा 41 मिनट का शुभ समय</title><link>https://up.inkhabar.com/festival/dhanteras-1-hour-41-minutes-auspicious-time-for-shopping-today-on-dhanteras/</link><pubDate>October 29, 2024, 5:14 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/्पोल-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>लखनऊ। धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इसी तिथि पर देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप म...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इसी तिथि पर देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;धनतेरस के दिन रखें प्रदोष व्रत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाता है, जिसमें शाम के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है. इस योग में आप जो भी कार्य करेंगे उसका तीन गुना फल मिलेगा। इस साल धनतेरस पर आपको 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;धनतेरस के दिन आभूषण खरीदना शुभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, आभूषण, वाहन, घर, दुकान आदि खरीदते हैं। जिनके पास कम पैसे होते हैं, वे धनिया, झाड़ू, नमक, पीतल के बर्तन आदि खरीदते हैं। लेख में आगे जानें क्या है शुभ मुहूर्त और धनतेरस का महत्व?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आज 29 अक्टूबर को धनतेरस के दिन पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त रहेगा. धनतेरस पर पूजा का शुभ समय शाम 6:31 बजे से रात 8:13 बजे तक है. धनतेरस पर प्रदोष काल का समय शाम 5:38 बजे से रात 8:13 बजे तक है। उस दिन वृषभ काल का समय शाम 6:13 बजे से रात 8:27 बजे तक है। यह मुहूर्त देश की राजधानी नई दिल्ली पर आधारित है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;धनतेरस का क्या है महत्व?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी और कुबेर की कृपा से धन और समृद्धि बढ़ती है। सुख-समृद्धि बढ़ती है। धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Radha Asthami: राधा अष्टमी में व्रत कर सकते समय रखें इस बात का खास ध्यान</title><link>https://up.inkhabar.com/festival/radha-asthami-take-special-care-of-the-time-when-you-can-fast-on-radha-ashtami/</link><pubDate>September 11, 2024, 3:36 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/radha-300x225.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>लखनऊ। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा रानी का धरती पर आती है, इसलिए इस दिन को राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं और लड़किया...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा रानी का धरती पर आती है, इसलिए इस दिन को राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  महिलाएं और लड़कियां लंबी आयु और राधा रानी की कृपा पाने के लिए उपवास करती है। यदि आप व्रत रखती है तो आपकों कुछ बातों को जानना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। जो 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट अगले दिन समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय की सहायता से तिथि की गणना की जाती है। ऐसे में 11 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। राधा अष्टमी का शुभ मुहूर्त 11 सितंबर की सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक होगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खाने से पहले राधा रानी को भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राधा अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में सुबह जल्दी नहाकर राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान आप आलू, साबूदाना की सब्जी, शकरकंद और कुट्टू के आटे के पकोड़े, फल और मिठाई का सेवन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त दूध और दही को अपने फलाहार में शामिल कर सकते हैं। खाना बनाने में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। इस बात का खास ध्यान रखें कि खाने से राधा रानी को भोग लगाएं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Hartalika Teej: आज हरतालिका तीज , जानें पूजा से जुड़ी हर बातें</title><link>https://up.inkhabar.com/festival/hartalika-teej-today-hartalika-teej-know-everything-related-to-the-puja/</link><pubDate>September 6, 2024, 2:20 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/TEEJ-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>लखनऊ। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हरतालिका तीज आज शुक्रवार 6 सितंबर को है. इस पर्व के रखने से सुहागिन महिलाओं को पति की दीर्घायु और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा वर पाने का आशीर्वाद  मिलता है. इस पर्व को करने से महिलाओं पर भगवान शिव और माता पार्वती...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt;  हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हरतालिका तीज आज शुक्रवार 6 सितंबर को है. इस पर्व के रखने से सुहागिन महिलाओं को पति की दीर्घायु और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा वर पाने का आशीर्वाद  मिलता है. इस पर्व को करने से महिलाओं पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा रहती है. इस दिन उपवास रखने से लोगों को सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा मिलता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद महीना के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी गुरुवार दोपहर 12:21 बजे पर शुरू होगी और 06 सितंबर को दोपहर 03:21 बजे पर समाप्त होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हरतालिका तीज आज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उदयातिथि के मुताबिक, हरतालिका तीज का उपवास आज 06 सितंबर को रखा जाएगा. इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 06:02 बजे से सुबह 08: 33 बजे तक रहने वाला है. इस मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान और पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महिलाएं व्रत में झूला झूलती है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस व्रत में महिलाएं झूले लगाती हैं, जिस पर वे एक दूसरे को झूला झुलाती हैं, संगीत और भगवान का भजन गाती है. इस दिन सास और घर के बड़े लोग,&amp;nbsp; नई दुल्हन को कपड़े, हरी चूड़ियां, श्रृंगार का सामान और मिठाइयां देती हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दुल्हन का शृंगार और सुहाग हमेशा बना रहे और घर में वंश की वृद्धि हो.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत पर इन चीजों का लगाएं भोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि हरतालिका तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र प्रेम का प्रतीक है. इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती को संतरा,&amp;nbsp;&amp;nbsp; पेड़ा, बर्फी, बादाम, काजू, पिस्ता, पान, आम, खीर, केला, सेब, अंगूर,&amp;nbsp; मठरी, पिरिकिया, गंगाजल, भांग, चंदन, बेल पत्र, दूध, धतूरा और अक्षत चढ़ाएं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तीज पर फलों के ताजा भाव (रुपये में)&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नासपाति 100– 120 किलो&lt;br&gt;नारंगी 140– 150 किलो&lt;br&gt;खीरा 40– 50 किलो&lt;br&gt;सेब 120– 140 किलो&lt;br&gt;मौसमी 80– 100 किलो&lt;br&gt;आनार 220–240 किलो&lt;br&gt;नारियल 50– 70 पीस&lt;br&gt;अमरूद 40– 50 किलो&lt;br&gt;केला 50– 70 दर्जन&lt;/p&gt;
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