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       <title>Today इलाहाबाद हाई कोर्ट News | Latest इलाहाबाद हाई कोर्ट News | Breaking इलाहाबाद हाई कोर्ट News in English | Latest इलाहाबाद हाई कोर्ट News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का इलाहाबाद हाई कोर्ट समाचार:Today इलाहाबाद हाई कोर्ट News ,Latest इलाहाबाद हाई कोर्ट News,Aaj Ka Samachar ,इलाहाबाद हाई कोर्ट समाचार ,Breaking इलाहाबाद हाई कोर्ट News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://up.inkhabar.com/tag/%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
        <lastBuildDate>April 20, 2026, 9:34 am</lastBuildDate>
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        </image><item><title>ज्ञानवापी मामले पर बोले रामभद्राचार्य &amp;#8216;हम हाई कोर्ट जाएंगे, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, फैसला हमारे पक्ष…</title><link>https://up.inkhabar.com/top-news/rambhadracharya-said-on-gyanvapi-case-we-will-go-to-the-high-court-we-will-go-to-the-supreme-court-the-decision-will-be-in-our-favor/</link><pubDate>October 27, 2024, 7:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/j.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>लखनऊ: ज्ञानवापी मामले को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका शुक्रवार को वाराणसी कोर्ट में खारिज कर दी गई. इस मामले पर जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, &amp;#8216;हम इसे लेकर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और कोर्ट हमारे पक्ष में ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ:&lt;/strong&gt; ज्ञानवापी मामले को लेकर हिंदू पक्ष की याचिका शुक्रवार को वाराणसी कोर्ट में खारिज कर दी गई. इस मामले पर जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, &amp;#8216;हम इसे लेकर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला देगा.&amp;#8217;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;&amp;#8216;हम सुप्रीम कोर्ट का लेंगे सहारा&amp;#8221;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ज्ञानवापी मामले पर मीडिया से बात करते हुए रामभद्राचार्य ने कहा, &amp;#8216;हम हाईकोर्ट जाएंगे, फिर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट हमारे अनुकूल फैसले देंगे. सनातन बोर्ड बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए. उसके लिए हम सरकार से अनुरोध करेंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू पक्ष द्वारा की गई याचिका खारिज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ज्ञानवापी मामले में वाराणसी कोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूरे परिसर का एएसआई सर्वे कराने की मांग की गई थी. हिंदू पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी याचिका में दलील देते हुए कहा था कि मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे 100 फीट का शिवलिंग है, जिसका पेनिट्रेटिंग रडार से पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाया जाएं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;वजूखाना का भी सर्वेक्षण जरुरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने यह भी मांग की थी कि वजूखाना का भी सर्वेक्षण कराया जाए जो कि पिछले अध्ययन सर्वेक्षण में नहीं किया गया था. इसके अलावा बचे हुए बेसमेंट का भी सर्वे किया जाना चाहिए. हिंदू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि हम वकील के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं. इसका पूरा रिसर्च करने के बाद हम उच्च न्यायालय जाएंगे। इससे पहले विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी दलील में कोर्ट के सामने सफाई दी कि पिछला ASI सर्वे अधूरा था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जिस जगह पर शिवलिंग है वहां सर्वे नहीं हुआ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने दावा किया कि जिस क्षेत्र में हिंदू पक्ष द्वारा शिवलिंग का दावा किया जा रहा है, वहां पिछली बार सर्वेक्षण नहीं किया गया था और इसलिए पूरे ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>High Court: नवनियुक्त कर्मचारियों को कोर्ट से लगा बड़ा झटका, ना हाजिरी लगेगी और ना ही वेतन मिलेगा</title><link>https://up.inkhabar.com/states/high-court-newly-appointed-employees-get-a-big-blow-from-the-court-neither-will-they-be-required-to-attend-nor-will-they-get-salary/</link><pubDate>September 6, 2024, 2:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/COURT-1-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। कोऑपरेटिव भर्ती भ्रष्टाचार में सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को अब उच्च न्यायालय से भी बड़ा झटका लगा है। 46 समितियों में बहाल किए गए 90 नए कर्मचारियों को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई है। जिससे आर का आदेश वैसे ही लागू रहेगा। ये कर्मचारी ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; कोऑपरेटिव भर्ती भ्रष्टाचार में सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को अब उच्च न्यायालय से भी बड़ा झटका लगा है। 46 समितियों में बहाल किए गए 90 नए कर्मचारियों को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई है। जिससे आर का आदेश वैसे ही लागू रहेगा। ये कर्मचारी न तो अपनी हाजिरी लगा सकेंगे और ना ही इन्हें इनकी सैलरी मिलेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया&lt;/strong&gt; &lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एक तरह से देखा जाए तो इन सभी कर्मचारियों को समितियों से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सहारनपुर में पिछले साल ही नवंबर-दिसंबर के महीने में 46 कोऑपरेटिव समितियों में काम करने के लिए अस्थाई तौर पर लोगों की नियुक्ति की गई है। शिकायतों पर जांच की गई तो नियुक्तियां नियम के विरूद्ध पाई गई। समितियो को औपचारिक तौर पर नियुक्ति करने का अधिकार ही प्राप्त नहीं था।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;घोटाले के ऑडियो वायरल&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;यहीं नहीं इन अस्थाई नियुक्तियों में भी जमकर घोटाला होने के ऑडियो वायरल हुए तो मामले की पोल खुली। शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए मामले की जांच कराई। जिसमें पूर्व एआर एसएन मिश्रा और 4 एडीसीओ और 4 एडीओ को उनके पद से हटा दिया गया है। वहीं एआर कोऑपरेटिव रविशंकर ने बढ़ते वेतन खर्च को ध्यान में रखते हुए इन कर्मियों के हाजिरी लगाने और वेतन आरहरण को रोक दिया गया है। इसमें 3 कर्मियों को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Recruitment: यूपी में 69 हजार पदों की भर्ती रद्द, नई मेरिट लिस्ट जारी करने के लिए कोर्ट ने दिए निर्देश</title><link>https://up.inkhabar.com/states/recruitment-recruitment-of-69-thousand-posts-canceled-in-up-court-gave-instructions-to-release-new-merit-list/</link><pubDate>August 17, 2024, 2:37 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/qwe-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। यूपी में 69 हजार शिक्षक पदों की भर्ती को रद्द कर दिया गया है। 69 हजार शिक्षक भर्ती में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए कहा है कि पूरी मेरिट लिस्ट को ही रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने सरकार को तीन म...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; यूपी में 69 हजार शिक्षक पदों की भर्ती को रद्द कर दिया गया है। 69 हजार शिक्षक भर्ती में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए कहा है कि पूरी मेरिट लिस्ट को ही रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने सरकार को तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आरक्षण के नियमों का पालन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने जारी किए जाने वाले रिजल्ट में आरक्षण के नियमों और बेसिक शिक्षा नियमावली का पालन करने का भी आदेश दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद नई चयन सूची बनने से पूर्व बीते चार सालों से सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षकों को रिटायर किया जाएगा। जून 2020 को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया था। इसमें सामान्य श्रेणी का कटऑफ 67.11 प्रतिशत और ओबीसी का कटऑफ 66.73 प्रतिशत था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बेंच के आदेश को संशोधित किया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;न्यायाधीश ए.आर मसूदी और न्यायाधीश बृजराज सिंह की कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को संशोधत किया। सिंगल बेंच ने 8 मार्च 2023 को फैसला दिया था कि 69 हजार शिक्षक भर्ती 2020 की लिस्ट को रद्द किया था। साथ ही अपेक्स टैलेंट रिवॉर्ड एग्जाम को पात्रता परीक्षा नहीं माना था। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने इस आदेश को संशोधित करते हुए आरक्षण नियमावली 1994 की धारा 3 (6) और बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 का पालन करने के निर्देश दिए थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नए सिरे से भर्ती के आदेश दिए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सामान्य सीट पर अगर आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट सामान्य कैंडिडेट के बराबर मार्क्स लाता है, तो उसे सामान्य वर्ग में रखा जाएगा। बाकी को 27 फीसदी और 21 फीसदी सीटों को ओबीसी और एससी वर्ग में रखा जाएगा। सपा सरकार में 1.72 लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक में समायोजित किया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने अखिलेश सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही नए सिरे से सहायक अध्यापकों की भर्ती का आदेश दिया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Atiq Ahmed: अतीक अहमद हत्याकांड में न्यायिक आयोग ने पुलिस को दी क्लीन चिट, पूर्व नियोजित साजिश से किया इनकार</title><link>https://up.inkhabar.com/crime/atiq-ahmed-judicial-commission-gives-clean-chit-to-police-in-atiq-ahmed-murder-case-denies-pre-planned-conspiracy/</link><pubDate>August 2, 2024, 5:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/ै्ू-300x169.webp</image><category>क्राइम</category><excerpt>लखनऊ। गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस हिरासत में हत्या की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने &amp;#8216;पूर्व नियोजित साजिश&amp;#8217; या &amp;#8216;पुलिस लापरवाही&amp;#8217; की संभावना से इनकार किया है। आयोग की रिपोर्ट गुरुवार को मानसून सत्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस हिरासत में हत्या की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने &amp;#8216;पूर्व नियोजित साजिश&amp;#8217; या &amp;#8216;पुलिस लापरवाही&amp;#8217; की संभावना से इनकार किया है। आयोग की रिपोर्ट गुरुवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन यूपी विधानसभा में पेश की गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; पुलिस को क्लीन दी चिट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज (सेवानिवृत्त) अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले के नेतृत्व में गठित 5 सदस्यीय आयोग को 15 अप्रैल, 2023 को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की जांच का मामला दिया गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह घटना 15 अप्रैल, 2023 की थी। जिसमें आरोपी अतीक अहमद और उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की हत्या हुई थी। जो थाना शाहगंज, प्रयागराज के अंतर्गत उमेश पाल हत्याकांड मामले में पुलिस हिरासत में रिमांड पर थे। अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की तीन अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसे राज्य पुलिस द्वारा अंजाम दी गई पूर्व नियोजित साजिश का नतीजा नहीं माना जा सकता है।&amp;#8221; आयोग ने पुलिस को इस मामले में क्लीन चिट भी दे दी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजू पाल केस के गवाह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पहले से ही गुजरात की साबरमती जेल और बरेली जिला जेल में बंद थे। दोनों को पुलिस ने उमेश पाल की हत्या के मामले में प्रयागराज लाया गया था, जो 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या का गवाह था। फरवरी 2023 को उमेश पाल की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी अगर 18 वर्ष से ऊपर की तो मेरिटल रेप अपराध नहीं</title><link>https://up.inkhabar.com/states/big-decision-of-allahabad-high-court-marital-rape-is-not-a-crime-if-the-wife-is-above-18-years-of-age/</link><pubDate>December 11, 2023, 9:51 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/download-2023-12-11T152029.018-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरिटल रेप को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि 18 साल या उससे अधिक आयु की पत्नी मेरिटल रेप का चार्ज लगाती है तो इस मामले में आरोपित व्यक्ति को संरक्षण जारी रहेगा। इस दौरान अदालत ने 2017 में दिए गए सु...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ।&lt;/strong&gt; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरिटल रेप को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि 18 साल या उससे अधिक आयु की पत्नी मेरिटल रेप का चार्ज लगाती है तो इस मामले में आरोपित व्यक्ति को संरक्षण जारी रहेगा। इस दौरान अदालत ने 2017 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया जिसमें SC ने कहा था कि एक पति और उसकी 15 से 18 वर्ष के बीच की आयु की पत्नी के बीच यौन संबंध को बलात्कार माना जायेगा। वहीं जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के मामले में बरी कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;SC में लंबित है याचिकाएं&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपी को आईपीसी की धारा 377 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने कहा कि भारत में अभी तक मेरिटल रेप को अपराध नहीं माना गया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मेरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाएं अभी भी SC में लंबित हैं। जब तक शीर्ष अदालत इस मामले में फैसला नहीं कर देती, तब तक पत्‍नी 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की नहीं हो जाती वैवाहिक बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान नहीं है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए पूरा मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल वर्ष 2013 में संजीव गुप्ता के खिलाफ उसकी पत्नी ने गाजियाबाद पुलिस थाना में IPC की धारा 498A , 323, 377 और दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। जिसके बाद गाजियाबाद की अदालत ने उक्त धाराओं के तहत उसे दोषी करार दिया। फिर अपीलीय अदालत ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। इस पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई। इलाहबाद हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 के तहत दोषसिद्धि को लेकर कहा कि विवाह के बाद, पति की ओर से पत्नी का बलात्कार किया जाना इस देश में अब तक अपराध नहीं है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला ; भगोड़ा अपराधी भी अग्रिम जमानत के लिए लगा सकता है अर्जी</title><link>https://up.inkhabar.com/states/big-decision-of-allahabad-high-court-fugitive-criminal-can-also-apply-for-anticipatory-bail/</link><pubDate>May 6, 2023, 1:11 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-2023-05-06T184110.119-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब भगोड़ा अपराधी भी अग्रिम जमानत के लिए अर्जी डाल सकता है। कोर्ट का कहना है कि सीआरपीसी की धारा 438 के तहत भगोड़ा अपराधी को भी अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने से मना नहीं कर सकते। जानिए ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लखनऊ। &lt;/strong&gt;इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब भगोड़ा अपराधी भी अग्रिम जमानत के लिए अर्जी डाल सकता है। कोर्ट का कहना है कि सीआरपीसी की धारा 438 के तहत भगोड़ा अपराधी को भी अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने से मना नहीं कर सकते।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए क्या था मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 82 और 438 अपराधियों द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन दाखिल करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाती है। बता दें कि कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। उदित आर्य के ऊपर अपनी पत्नी की दहेज हत्या का मामला दर्ज है। मामला मेरठ के गंगानगर थाने का है, जहां के युवक की जमानत याचिका को कोर्ट ने मंजूरी दे दी। उसके ऊपर अपनी पत्नी की हत्या को लेकर आईपीसी की धारा 498-ए, 304-बी व 3/4 DP एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज था।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>