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        <title></title>
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            <title>UP Inkhabar</title>
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                    <title><![CDATA[भक्ति आंदोलन के प्रसिद्ध संत रविदास की जयंती आज, समाज सुधार में दिया खास योगदान]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/today-is-the-birth-anniversary-of-ravidas-the-famous-saint-of-bhakti-movement-who-made-a-special-contribution-in-social-reform/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल माघ पूर्णिमा को संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस साल संत रविदास जयंती 12 फरवरी, बुधवार को है। संत रविदास ने रविदासिया संप्रदाय की स्थापना की। उन्हें संत शिरोमणि की उपाधि दी गयी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार गुरु रविदास जी का जन्म 1377 ई. में उत्तर प्रदेश [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><strong>लखनऊ:</strong> हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल माघ पूर्णिमा को संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस साल संत रविदास जयंती 12 फरवरी, बुधवार को है। संत रविदास ने रविदासिया संप्रदाय की स्थापना की। उन्हें संत शिरोमणि की उपाधि दी गयी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार गुरु रविदास जी का जन्म 1377 ई. में उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के एक गाँव में हुआ था, जबकि कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि उनका जन्म वर्ष 1399 में हुआ था। गुरु रविदास को रैदास, रोहिदास और रूहीदास के नाम से भी जाना जाता है।

&nbsp;
<h2><strong>भक्ति आंदोलन में लिया हिस्सा</strong></h2>
&nbsp;

गुरु भक्ति आंदोलन के प्रसिद्ध संत थे। उनके भक्ति गीतों और छंदों का भक्ति आंदोलन पर अमिट प्रभाव पड़ा। महान संत गुरु रविदास और उनके योगदान को दुनिया आज भी याद करती है और उनके सम्मान में हर साल रविदास जयंती का त्योहार मनाया जाता है।

&nbsp;
<h2><strong>समाज सुधार में रहा खास योगदान</strong></h2>
&nbsp;

शिक्षा के अलावा समाज सुधार में भी गुरु रविदास जी का विशेष योगदान देखने को मिलता है। उन्होंने सामाजिक समानता के लिए आवाज उठाई और लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक किया।

&nbsp;
<h2><strong>कैसे बने संत</strong></h2>
&nbsp;

पौराणिक कहानियों के अनुसार, एक बार की बात है जब संत रविदास को उनके पिता ने उनके अपने ही घर से उन्हें निकाल दिया था। जिसके बाद वे एक कुटिया में रहने को मजबूर हो गए थे और साधु-संतों की सेवा करना शुरू कर दिया था। बता दें कि संत रविदास जूते-चप्पल बनाने का काम करते थे। फिर वह भक्ति आंदोलन में कूद पड़े। इस वजह से कुछ संत रविदास के विचारों से अधिक प्रभावित होने लगे और उनके द्वारा कहे गए विचारों को मानने लगे। इस दौरान उनके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। जिससे वे गुरु रविदास शिरोमणि के रूप में प्रख्यात हो गए।

&nbsp;
<h3><strong>आज 648वीं जयंती</strong></h3>
&nbsp;

बता दें कि इस साल गुरु रविदास जी की 648वीं जयंती है. इस दिन संत रविदास के भक्त भजन कीर्तन करते हैं, जुलूस निकालते हैं और लंगर आदि का आयोजन करते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[माघी पूर्णिमा के मौके पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, ट्रैफिक प्लान में किया बदलाव]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/huge-crowd-of-devotees-gathered-on-the-occasion-of-maghi-purnima-traffic-plan-changed/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। वाराणसी में आज माघी पूर्णिमा स्नान के लिए 20 लाख श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। सुबह से ही गंगा स्नान का दौर चल रहा है। काशी के प्रमुख 10 गंगा घाट पर श्रद्धालुओं भारी भीड़ है। सुरक्षित स्नान के लिए गंगा में मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। देर रात अधिकारियों ने उसका निरीक्षण किया। स्नान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><strong>लखनऊ।</strong> वाराणसी में आज माघी पूर्णिमा स्नान के लिए 20 लाख श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। सुबह से ही गंगा स्नान का दौर चल रहा है। काशी के प्रमुख 10 गंगा घाट पर श्रद्धालुओं भारी भीड़ है। सुरक्षित स्नान के लिए गंगा में मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। देर रात अधिकारियों ने उसका निरीक्षण किया।
<h2><strong>स्नान के लिए आएंगे जूना अखाड़े</strong></h2>
काशी में तीन प्रमुख कार्यक्रम हैं, जिसमें सुबह से गंगा स्नान किया जा रहा है। महाकुंभ से आने वाले श्रद्धालुओं से काशी में भीड़ बढ़ गई है, जिससे विश्वनाथ मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की 5KM लंबी लाइन लगी हुई है। लोगों को मंदिर के चारों द्वार से दर्शन कराए जा रहे हैं। वहीं, आज काशी में गंगा स्नान के लिए जूना अखाड़े पंच और नागा साधु बैजनाथ आएंगे। नागा साधुओं की यात्रा 10KM लंबी होगी, जिसमें 1 हजार से ज्यादा नागा साधु मौजूद रहेंगे। माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान के चलते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है।
<h3><strong>पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर</strong></h3>
इस दौरान पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। गंगा घाट पर पुलिस ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की निगरानी कर रही है। गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। अस्सी घाट पर 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे हैं। अभी भक्तों का आना-जाना लगा हैं। काशी में माघी पूर्णिमा पर भक्त गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचे हैं। डुबकी लगाने के बाद लोग एक-दूसरे के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। भगवानपुर मोड़ से किसी भी वाहन को संत रविदास मन्दिर की ओर नहीं जाने दिया जाएगा।
<h3><strong>वाहनों को डॉफी की ओर किया डायवर्ट</strong></h3>
इन वाहनों को नगवा/ मालवीय गेट की ओर डायवर्ट किया जाएगा। रमना चौकी तिराहा से किसी तरह के वाहनों को संत रविदास मन्दिर तिराहा की तरफ नहीं आने दिया जाएगा। इन वाहनों को डॉफी की तरफ डायवर्ट कर दिया जाएगा।
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Prayagraj | Sea of pilgrims continues to converge at <a href="https://twitter.com/hashtag/MahaKumbh2025?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#MahaKumbh2025</a>, the meeting point of spirituality and culture <a href="https://t.co/E7nRnldwwv">pic.twitter.com/E7nRnldwwv</a></p>
— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1889513219989107119?ref_src=twsrc%5Etfw">February 12, 2025</a></blockquote>
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                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[क्या है मौनी अमावस्या, जानें इसके महत्व और लाभ?]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/what-is-mauni-amavasya-know-its-importance-and-benefits/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। महाकुंभ मेले के साथ मौनी अमावस्या का आना बहुत बड़ा शुभ अवसर है। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा मे स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। इस साल महाकुंभ मेले का योग भी त्रिवेणी संगम पर यानि प्रयागराज मे हो रहा है। इसीलिए मौनी अमावस्या को दिव्य [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> महाकुंभ मेले के साथ मौनी अमावस्या का आना बहुत बड़ा शुभ अवसर है। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा मे स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। इस साल महाकुंभ मेले का योग भी त्रिवेणी संगम पर यानि प्रयागराज मे हो रहा है। इसीलिए मौनी अमावस्या को दिव्य अवसर माना जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मौनी अमावस्या का संयोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह त्योहार माघ मास की अमावस्या को पड़ता है। यहीं कारण है कि इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह योग 29 जनवरी 2025 को बन रहा है। इसी दिन गंगा नदी में स्नान के साथ दान- पुण्य करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। हमारी हिन्दू संस्कृति के मुताबिक इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है, इसीलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है।<br>अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु श्री प्रियदर्शी जी महाराज द्वारा रचित, अभूतपूर्व ग्रंथ 'श्रीकृष्ण चरित मानस’ (रसायन महाकाव्य) में मौन व्रत रखने के कई महत्व बताए गए है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मौनी व्रत करने का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मौन केवल शब्दों का मौन नहीं बल्कि मन का मौन होता है। मानस में कहा गया है कि, मौन व्रत रखने से मन शांत होता है। यह आत्मा की शुद्धि का व्रत है, साथ ही साथ मौन व्रत से मन की एकाग्रता भी बढ़ती है। साथ ही ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है। व्रत करने से मनुष्य को कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। व्रत से निर्णय लेने में सफलता हासिल होती है। मौन व्रत से मनुष्य के जीवन में कई सारे सकारात्मक परिवर्तन आते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस व्रत के लाभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जब भी मन शांत होता है तब हम ईश्वर के साथ गहरे और दिव्य तरीके से जुड़ जाते हैं। यही कारण है कि मौनी अमावस्या इतनी महत्वपूर्ण है। मौनी अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना भी अच्छा माना जाता है, जिससे मनुष्य के पितृ दोष दूर हो जाते है। मौन व्रत का पालन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मन की स्थिरता मिलती है। मौन, जो अपने आप मे केवल एक शब्द नहीं है बल्कि वह एक मन है जिस पर विजय पाने से मनुष्य को सफलता हासिल होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है मकर संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/today-is-makar-sankranti-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। मकर संक्रांति सनातन धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन से खरमास खत्म हो जाता है। जिससे शुभ और मांगलिक कार्यों की फिर से शुरुआत हो [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> मकर संक्रांति सनातन धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन से खरमास खत्म हो जाता है। जिससे शुभ और मांगलिक कार्यों की फिर से शुरुआत हो जाती है। आइए जानते हैं मकर सक्रांति का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>साधन पितरों का तर्पण और पिंडदान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण की शुरूआत होती है। उत्तरायण को शुभ समय के रूप में माना जाता है। यह समय आत्मा और शरीर की शुद्धि के लिए खास होता है। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा और कई अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन दान, जप और तप किया जाए तो हजार गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन साधक अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान भी करते हैं, जिससे पितृतृप्ति होती है। साथ ही उनकी कृपा मिलती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह समर्पण, दान और करुणा का भी प्रतीक है। इस दिन किए गए दान और अच्छे कार्यों का फल जीवन में विकास और समृद्धि के रूप में प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के दिन यानी आज सूर्य देव सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रान्ति का शुभ मुहूर्त 14 जनवरी की सुबह 09:03 से शुरू होगा। जो शाम 05:46 बजे समाप्त होगा। महा पुण्य काल समय सुबह 09:03 से सुबह 10:48 बजे के बीच रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मकर संक्रांति का पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। अगर इस दिन किसी पवित्र नदी स्नान किया जाए तो और शुभ माना जाता है। अगर ऐसा संभव ना हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। नहाने के बाद व्रत का संकल्प लें। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर सुर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। सुर्य देव को अर्घ्य देने के साथ सूर्य चालीस पढ़ना शुभ होता है। अगर हो सके तो आखिर में सूर्य भगवान की आरती करें और गरीबों और जरुरतमंद को दान करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महाकुंभ में कल मकर संक्रांति पर कब होगा शाही स्नान, यहां देखें सबकुछ]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/when-will-the-royal-bath-take-place-tomorrow-on-makar-sankranti-in-maha-kumbh-see-everything-here/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ : महाकुंभ 2025 का महाआगाज आज सोमवार 13 जनवरी से हो चुका है। ऐसे में यह भव्य मेला 45 दिनों तक चलेगा। इस दौरान सात शाही स्नान यानी अमृत स्नान होगी। कल यानी 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन शाही स्नान होगा। इसमें तमाम अखाड़ें शामिल होंगे। इस शाही स्नान में अखाड़ों के संत, [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ : </strong>महाकुंभ 2025 का महाआगाज आज सोमवार 13 जनवरी से हो चुका है। ऐसे में यह भव्य मेला 45 दिनों तक चलेगा। इस दौरान सात शाही स्नान यानी अमृत स्नान होगी। कल यानी 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन शाही स्नान होगा। इसमें तमाम अखाड़ें शामिल होंगे। इस शाही स्नान में अखाड़ों के संत, महंत और नागा साधू संगम में डुबकी लगाते हैं। प्रत्येक अखाड़े का स्नान समय पहले से तय होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देखें शाही स्नान का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति पर होने वाले पहले शाही स्नान की समय सारिणी सामने आ गई है। शाही स्नान सुबह 6.15 बजे शुरू होकर दोपहर 3.40 बजे खत्म होगा। पूरी समय सारिणी यहां देखें-</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सन्यासी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li>श्री पंचायती अखाङा महानिर्वाणी एवं श्री शंभू पंचायती अटल अखाङा – 06:15 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाङा, एवं श्री पंचायती अखाङा आनन्द – 07:05 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>श्री पंचदशनाम जूना अखाङा एवं श्रीपंचदशनाम आवाहन अखाङा तथा श्री पंचाग्नि अखाङा – 08:00 बजे</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बैरागी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li>अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाङा – 10:40 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाङा – 11:20 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाङा – 12:20 बजे</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उदासीन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li>श्री पंचायती नया उदासीन अखाङा – 13:15 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>श्री पंचायती अखाङा, बङा उदासीन, निर्वाण – 14:20 बजे</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>श्री पंचायती निर्मल अखाङा – 15:40 बजे</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज पहले दिन करोड़ों लोगों ने किया स्नान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 13 जनवरी यानी पौष पूर्णिमा के स्नान के दिन प्रयागराज के संगम घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहां श्रद्धालुओं ने स्नान किया और महाकुंभ में हिस्सा लिया। सोमवार दोपहर 3 बजे तक करीब 1 करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकुंभ 2025 की शुरुआत में संगम क्षेत्र में पवित्र डुबकी लगाई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[Somvati Amavasya: आज है सोमवती अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/somvati-amavasya-today-is-somvati-amavasya-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। आज सोमवती अमावस्या का पर्व है। पूरे भारत में इस दिन को खास तरीके से मनाया जाता है। सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का बहुत महत्व होता है। सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान-दान का अपना महत्व होता है। इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> आज सोमवती अमावस्या का पर्व है। पूरे भारत में इस दिन को खास तरीके से मनाया जाता है। सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का बहुत महत्व होता है। सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान-दान का अपना महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पितरों का श्राद्ध करते हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सोमवती अमावस्या के दिन भगवान भोलेनाथ का पूजा करने का उत्तम समय माना जाता है। इस दिन पतिरों की आत्माशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सोमवती अमावस्या के दिन शिव-गौरी की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन व्रत करने से व्रतियों को भगवान शिव और मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ब्रह्मा मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 से शुरू होगा जो 6 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं प्रात संध्या का मुहूर्त 5.51 से आरंभ होगा जो 7.13 पर जाकर समाप्त होगा। अभिजित मुहूर्त की शुरूआत 12 बजकर 3 मिनट पर होगी और 12 बजकर 45 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। वहीं विजय मुहूर्त की शुरूआत 2.07 मिनट से होगी जो 2.49 पर खत्म होगा। सोमवती अमावस्या के दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। फिर मां गौरी और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोमवती अमावस्या की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के साथ ही शिव जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। शिव चालीसा का पढ़ना चाहिए। शिव जी को मीठे का भोग लगाना चाहिए। मीठे में आप खीर या दूध से बनी किसी चीज का भोग लगा सकते है। संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/somvati-amavasya-today-is-somvati-amavasya-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Tulsi Puja: आज है तुलसी पूजन, जानें इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/tulsi-puja-today-is-tulsi-puja-know-its-importance-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। तुलसी पूजन दिवस सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। जिसे हर साल 25 दिसंबर के दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से तुलसी माता की पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन तुलसी माता को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> तुलसी पूजन दिवस सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। जिसे हर साल 25 दिसंबर के दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से तुलसी माता की पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन तुलसी माता को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे की विधि-विधान से पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तुलसी पूजन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि तुलसी का पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। विधि-विधान से माता तुलसी की पूजा करने से अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तुलसी पूजन का ना केवल धार्मिक महत्व होता है बल्कि इसका सामाजिक महत्व भी है। तुलसी माता की पूजा पारिवारिक जीवन में भी गहरा प्रभाव डालती है। आइए जानते हैं तुलसी पूजन दिवस का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। हिंदू पंचांग के मुताबिक तुलसी पूजन दिवस हर साल 25 दिसंबर को सेलिब्रेट किया जाता है। उदया तिथि के अनुसार, तुलसी पूजन दिवस 25 दिसंबर को ही मनाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तुलसी पूजन का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तुलसी पूजन दिवस का धार्मिक महत्व होता है। मान्यता है कि तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का वास होता है। तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का रुप माना जाता है और उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान श्री हरि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन देवी तुलसी का पूजन करने से न केवल घर में सुख-शांति बनी रहती है, बल्कि व्यक्ति को जीवन में मानसिक शांति भी मिलती है। साथ ही सुख की भी बढ़ोत्तरी होती है। इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा करने से बिगड़े सारे काम बन जाते हैं। साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तुलसी पूजन की विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद लाल रंग के कपड़े पहनकर तुलसी के पौधे की पूजा करनी चाहिए। पहले तुलसी के पौधे के अच्छी तरह से साफ-सफाई करें। मां तुलसी को सजाएं। पौधे पर जल चढ़ाएं। पौधे के सामने घी का दीपक जलाएं। तुलसी मां को 16 श्रृंगार अर्पित करें। आरती उतारें। किसी मीठी चीज का भोग लगाएं। वैदिक मंत्रों का जाप करें। यह सब करने के बाद तुलसी के पौधे की आरती उतारें और आशीर्वाद ले। अंत में सभी सदस्यों को प्रसाद बांटे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/tulsi-puja-today-is-tulsi-puja-know-its-importance-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mahakumbh 2025: दुनिया के सबसे बड़े मेले &#8216;कुंभ&#8217; में जाने, रुकने और शाही स्नान की तारीखें यहां एक क्लिक में जानें]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/mahakumbh-2025-know-the-dates-of-visiting-staying-and-royal-bath-in-the-worlds-largest-fair-kumbh-in-one-click-here/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: सनातन धर्म में महाकुंभ मेले का अपना एक अलग ही महत्व है. महाकुंभ मेले का आयोजन 12 साल में एक बार किया है. यह संगम प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन या नासिक में आयोजित किया जाता है। वर्ष 2025 में संगमनगरी प्रयागराज में महाकुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है, जो 13 जनवरी पौष पूर्णिमा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> सनातन धर्म में महाकुंभ मेले का अपना एक अलग ही महत्व है. महाकुंभ मेले का आयोजन 12 साल में एक बार किया है. यह संगम प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन या नासिक में आयोजित किया जाता है। वर्ष 2025 में संगमनगरी प्रयागराज में महाकुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है, जो 13 जनवरी पौष पूर्णिमा से 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। महाकुंभ मेला अपनी विशिष्टता और भव्यता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विदेशी भी पहुंचेंगे मेले में</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि साल 2025 में संगमनगरी प्रयागराज&nbsp; में लगने वाले महाकुंभ मेले में देश ही नहीं बल्कि अन्य देशों से भी साधु संत और श्रद्धालु पहुंचेंगे. साथ ही देसी-विदेशी पर्यटक भी मेले का दीदार करने पहुंचेंगे. कुंभ मेले में शाही स्नान का विशेष महत्व होता है. इस दिन अखाड़ों के साधु-संत सज-धज कर संगम में स्नान करते हैं और उसके बाद श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2025 में प्रयागराज में लगने वाले धर्म और संस्कृति के सबसे बड़े मेले महाकुंभ के बारे में पूरी जानकारी कहां से मिलेगी…</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऑफिशियल वेबसाइट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महाकुंभ 2025 की सारी जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट https://kumbh.gov.in/से मिल सकती है. इस वेबसाइट पर सबकुछ बताया गया है कि संगमनगरी प्रयागराज कैसे पहुंच सकते हैं. यहां ठहरने की क्या व्यवस्था होगी और मेले में पर्यटकों के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति प्रयागराज में पर्यटन स्थलों, पर्यटक गाइड, स्नान तिथियों के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस वेबसाइट की मदद से आप अपने ठहरने की बुकिंग भी कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाकुंभ 2025 में शाही स्नान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति से माघी पूर्णिमा तक महाकुंभ मेले के दौरान संगम में स्नान करना पवित्र माना जाता है। इसके अलावा महाकुंभ 2025 में स्नान की कुछ तिथियां महत्वपूर्ण हैं. ऐसा माना जाता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र जल में स्नान करने से न केवल शरीर बल्कि मन की अशुद्धियां भी दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि महाकुंभ मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पर स्नान करने आते हैं। इसके अलावा कुछ भक्त पूरे एक महीने तक गंगा तट पर कल्पवास करते हैं और हर दिन तीन बार गंगा में स्नान करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाकुंभ का ऐतिहासिक महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं में महाकुंभ के बारे में बताया गया है। यह आत्म-बोध, शुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की शाश्वत खोज की एक प्रतीकात्मक यात्रा के रूप में कार्य करता है। इस समय यहां आने वाले लोग सांसारिक विषयों से परे जाकर आत्मशुद्धि में लीन हो जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाकुंभ में स्नान का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महाकुंभ मेले के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कुंभ के दौरान नदी में स्नान करने से व्यक्ति को जीवन भर के पापों से मुक्ति मिल जाती है। प्रयागराज में लगने वाले महाकुंभ मेले में स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है. यहां पवित्र मानी जाने वाली तीन नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। इसीलिए महाकुंभ में डुबकी लगाने का बहुत महत्व है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कल्पवास करने का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रयागराज महाकुंभ में कल्पवास करने वाले श्रद्धालु प्रतिदिन तीन बार स्नान करते हैं। इसके अलावा शाही स्नान का भी आयोजन किया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत स्नान करने आते हैं। साधु-संतों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक संगम में स्नान कर अपने पापों का नाश करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाकुंभ-2025 में स्नान की तारीखें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ मेले में स्नान पौष पूर्णिमा यानी 13 जनवरी को होगा. महाकुंभ 2025 में तीन शाही स्नान होंगे. पहला शाही स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर होगा.&nbsp; दूसरा शाही स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर होगा और आखिरी शाही स्नान 3 फरवरी को बसंत पंचमी पर होगा. इसके अलावा आखिरी स्नान 4 फरवरी यानी अचला सप्तमी, 12 फरवरी यानी माघ पूर्णिमा और 26 फरवरी यानी महाशिवरात्रि को होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/mahakumbh-2025-know-the-dates-of-visiting-staying-and-royal-bath-in-the-worlds-largest-fair-kumbh-in-one-click-here/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dattatreya Jayanti: आज है दत्तात्रेय जयंती, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dattatreya-jayanti-today-is-dattatreya-jayanti-know-the-auspicious-time-mantra-and-worship-method/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हिंदू धर्म में दत्तात्रेय जयंती का खास महत्व है। इसे भगवान दत्तात्रेय के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेवों, अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और शिव का अवतार माना जाता है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ महिलाएं व्रत भी करती है। दत्तात्रेय जयंती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ। </strong>हिंदू धर्म में दत्तात्रेय जयंती का खास महत्व है। इसे भगवान दत्तात्रेय के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान दत्तात्रेय को त्रिदेवों, अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और शिव का अवतार माना जाता है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ महिलाएं व्रत भी करती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दत्तात्रेय जयंती का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक दत्तात्रेय जयंती हर साल मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 14 दिसंबर, 2024 को मनाई जा रही है। दत्तात्रेय का शुभ शाम 4 बजकर 58 मिनट से आरंभ होकर 15 दिसंबर, 2024 को दोपहर 2 बजकर 31 मिनट तक चलेगा। इस तरह दत्तात्रेय जयंती 14 दिसंबर 2024 को महिलाए व्रत करेंगी। इस दिन दत्तात्रेय भगवान की पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयंती की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दत्तात्रेय जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। नहाने के बाद व्रत का संकल्प लें। संध्या के समय एक स्वच्छ स्थान पर पटिया रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। अब इस लाल वस्त्र पर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान को कुमकुम और चंदन का तिलक लगाए। तिलक लगाने के बाद फूल अर्पित करें। अब मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हाथ में फूल लेकर मुट्ठी बांध लें। फूल को मुट्ठी में लेने के बाद मंत्रो का जाप करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मंत्र का करें जाप</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>“ऊं अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषि: अनुष्टुप छन्द:, श्री दत्त परमात्मा देवता:, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग:.” भगवान दत्तात्रेय की पूजा समाप्त पर अबीर, चंदन और अन्य पूजा सामग्री को चढ़ाए। भगवान को मीठे का भोग लगाए। इसके बाद आरती उतारे और “ऊं द्रां दत्तात्रेयाय नम:” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना जरुरी होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dattatreya-jayanti-today-is-dattatreya-jayanti-know-the-auspicious-time-mantra-and-worship-method/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Trayodashi fast: आज हैं अनंग त्रयोदशी व्रत, जानें पूजा विधि और उपाय]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/trayodashi-fast-today-is-anang-trayodashi-fast-know-the-method-of-worship-and-remedies/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। सनातन धर्म में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी और मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को अनंग त्रयोदशी व्रत के रूप में मनाया जाता रहा है। श्रीमद् भागवत पुराण के मुताबिक इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने उन गोपियों के साथ वृंदावन में महारास किया था, जो उन्हें पति के रूप में चाहती थीं। साल 2024 में यह पर्व [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> सनातन धर्म में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी और मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को अनंग त्रयोदशी व्रत के रूप में मनाया जाता रहा है। श्रीमद् भागवत पुराण के मुताबिक इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने उन गोपियों के साथ वृंदावन में महारास किया था, जो उन्हें पति के रूप में चाहती थीं। साल 2024 में यह पर्व 13 दिसंबर को मनाया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा की विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन अनंग त्रयोदशी व्रत की कथा पढ़ना शुभ माना जाता है। अनंग त्रयोदशी के मौके पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद कामदेव और उनकी पत्नी देवी रति की पूजा करना जरुरी होता है। कामदेव की पूजा में सुगंधित फूल, चंदन, इत्र, फल चढ़ाए जाते है। भगवान कामदेव और देवी रति की पूजा करने के दौरान सुखद दांपत्य जीवन की कामना करना चाहिए। कामदेव को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अनंग त्रयोदशी व्रत के उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कामदेव के मंत्र ‘ॐ कामदेवाय: विदमहे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंग: प्रचोदयात’ जाप करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। माला से अधिक से अधिक जाप करना चाहिए। यह ध्यान रखना जरुरी है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और खास उपाय प्रेम संबंधों में मजबूती आती हैं। इस व्रत में स्वास्थ्य, संतान और धन से संबंधित समस्याओं का समाधान भी करते हैं। इसलिए, इस दिन को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएं। साथ अपने जीवन में खुशिया लाए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/trayodashi-fast-today-is-anang-trayodashi-fast-know-the-method-of-worship-and-remedies/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Utpanna Ekadashi: आज है उत्पन्ना एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/utpanna-ekadashi-today-is-utpanna-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। आज है उत्पन्ना एकादशी का व्रत। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। जो लोग एकादशी व्रत करना शुरु करना चाहते हैं, वे उत्पन्ना एकादशी से इसकी शुरुआत कर सकते हैं, क्योंकि इसी दिन देवी एकादशी जन्मी थी। एकादशी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> आज है उत्पन्ना एकादशी का व्रत। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। जो लोग एकादशी व्रत करना शुरु करना चाहते हैं, वे उत्पन्ना एकादशी से इसकी शुरुआत कर सकते हैं, क्योंकि इसी दिन देवी एकादशी जन्मी थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>एकादशी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन विष्णु भगवान की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। साथ ही तुलसी माता की आराधना का भी खास महत्व होता है। पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर को रात 01:1 मिनट पर आरंभ होगी। इस तिथि की समाप्ति 27 नवंबर को रात 03: 47 मिनट पर होगी। अतः 26 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा। उत्पन्ना एकादशी व्रत का पारण समय 27 नवंबर को अपराह्न 1:12 बजे से शुरु होगा। जो अपराह्न 3:18 बजे समाप्त हो जाएगा। उत्पन्ना एकादशी में पूजा का शुभ मुहूर्त 26 नवंबर को प्रातः 11:47 बजे से 12:29 बजे तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उत्पन्ना की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहने। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें। इसके पश्चात भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल से भगवान विष्णु का जलाभिषेक करें। इसके बाद भगवान को पीले वस्त्र चढ़ाने चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, अक्षत, फल और तुलसी के पत्ते चढ़ाने चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर मंत्रों का उच्चारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु को मीठे का भोग लगाकर आरती करें। व्रत रखने वालों को दिनभर उपवास का पालन करना चाहिए, लेकिन इस दिन नियमित मात्रा में फलों का आहार करना चाहिए। रात में भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/utpanna-ekadashi-today-is-utpanna-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dev Diwali: आज देव दीपावली के मौके पर नमो घाट का होगा उद्धाघटन, 21 लाख दीपों से जगमगाएगी नगरी]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dev-diwali-namo-ghat-will-be-inaugurated-today-on-the-occasion-of-dev-diwali-the-city-will-shine-with-21-lakh-lamps/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। देवताओं की दीपावली यानी कार्तिक पूर्णिमा को काशी में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पिछले 4 दशकों में यह परंपरा लोकपर्व और महोत्सव का रुप ले लिया है। इस बार आज देव दीपावली पर कुल 21 लाख दीपक जलाए जाएंगे। इसके साथ ही इस नजारे को देखने के लिए लाखों की तादाद [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> देवताओं की दीपावली यानी कार्तिक पूर्णिमा को काशी में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पिछले 4 दशकों में यह परंपरा लोकपर्व और महोत्सव का रुप ले लिया है। इस बार आज देव दीपावली पर कुल 21 लाख दीपक जलाए जाएंगे। इसके साथ ही इस नजारे को देखने के लिए लाखों की तादाद में पर्यटक देश-विदेश से काशी आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उपराष्ट्रपति होंगे मौजूद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज देव दीपावली पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी उपस्थित रहेंगे। वाराणसी मंडल आयुक्त कौशलराज शर्मा ने बातचीच में बताया कि देव दीपावली काशी में विश्वप्रसिद्ध त्योहार बन चुका है। जब से ये प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2020 में अपनी मौजदूगी दर्ज कराई है। तब से 4 साल में देव दीपावली कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। इसी का परिणाम है कि देव दीपावली के कई महीनों पहले से ही लोग यहां आने लगते हैं। साथ ही त्योहारों की बुकिंग करा लेते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धारणा का चरित्रार्थ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>काशी के गांगा घाटों पर दीए जलाए जाते हैं और प्रकाश की नगरी काशी की धारणा को चरित्रार्थ किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज देव दीपावली में कई आकर्षण का केंद्र रहेगा। देव दीवाली के दिन 84 घाटों पर फेहरिस्त में नमो घाट भी जुड़ने जा रहा है। इसका शिलान्यास उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा किया जाना है। इसके अतिरिक्त यूपी के सीएम योगी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी उद्धाघटन के समय मौजूद रहेंगे। क्योंकि पेट्रोलियम मंत्रालय के सहयोग से नमो घाट के निर्माण में आर्थिक सहायता मिली है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dev-diwali-namo-ghat-will-be-inaugurated-today-on-the-occasion-of-dev-diwali-the-city-will-shine-with-21-lakh-lamps/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Gopasthami: आज है गोपाष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/gopasthami-today-is-gopasthami-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। इस साल 9 नवंबर 2024 को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में गोपाष्टमी का उत्सव हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गायों को चराया शुरू किया था, इसलिए इसे गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। गोपाष्टमी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> इस साल 9 नवंबर 2024 को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में गोपाष्टमी का उत्सव हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गायों को चराया शुरू किया था, इसलिए इसे गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोपाष्टमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्रीमद्भागवत में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण गायों के साथ खेलते थे और उन्हें गायों के प्रति गहरा प्रेम था। गोपाष्टमी के मौके पर गाय माता की पूजा करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है, जिससे जीवन में खुशहाली बनी रहती है। पंचाग के गोपाष्टमी का शुभ मुहूर्त 08 नवंबर को रात 11 बजकर 56 मिनट से आरंभ होगा। जो अगले दिन 09 नवंबर को रात 10 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में उदयातिथि की माने तो गोपाष्टमी का पर्व 09 नवंबर को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोपाष्टमी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोपाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर सारे काम निपटाकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद गाय और बछड़ों को भी स्नान कराना चाहिए। गो माता को मेंहदी, रोली और हल्दी से सजाए। गो मां की पूजा करें। गो माता को चंदन का टीका लगाना चाहिए। टीका लगाने के बाद गो माता की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा करने के बाद अक्षत, रोली, फल और फूल चढ़ाए। गो माता की आरती उतारें। आरती के बाद हरी घास का भोग लगाए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/gopasthami-today-is-gopasthami-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Vinayak Chaturthi: आज है विनायक चतुर्थी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/vinayak-chaturthi-today-is-vinayak-chaturthi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। विनायक चतुर्थी इस साल 5 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। विनायक चतुर्थी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। जो भक्तों की सभी कठिनाइयों को दूर करते हैं। साथ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> विनायक चतुर्थी इस साल 5 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। विनायक चतुर्थी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। जो भक्तों की सभी कठिनाइयों को दूर करते हैं। साथ ही अपने भक्तों को ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नई शुरूआत के लिए शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विनायक चतुर्थी को किसी भी नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन अनेक लोग गणेश पूजा के जरिए अपने नए काम की शुरूआत करते हैं। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चतुर्थी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 4 नवंबर को रात 11. 24 से शुरू होगी, जो 5 नवंबर को रात 12. 16 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के मुताबिक विनायक चतुर्थी का व्रत 5 नवंबर, मंगलवार को किया जाएगा। जो भक्त 5 नवंबर को विनायक चतुर्थी का उपवास करेंगे, उन्हें पूजा के लिए 2 घंटे 11 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा। उस दिन विनायक चतुर्थी की पूजा का सही समय सुबह 10. 59 मिनट से दोपहर 1. 10 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा की विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुबह जल्दी उठकर देवी-देवताओं का ध्यान करें। सुबह सभी काम निपटाने के बाद स्नान करें। साथ ही मंदिर की साफ-सफाई करें। सूर्य देव को जल चढ़ाए। गणेश प्रतिमा की स्थापना करने के बाद उनकी विधिपूर्वक पूजा करें। गणेश जी को फूल, धूप अर्पित करें। प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं। इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। गणेश जी अपनी मनोकामनाएं की पूर्ति का आर्शीवाद मांगे। भगवान गणेश को मोदक और मिठाई का भोग लगाए। भोग लगाने के बाद प्रसाद का बांटे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/vinayak-chaturthi-today-is-vinayak-chaturthi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bhai Dooj 2024: भाई दूज कल, यहां जानें शुभ समय]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2024-bhai-dooj-tomorrow-know-the-auspicious-time-here/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज मनाया जाता है. इस पर्व को हम यम द्वितीया के नाम से भी जानते हैं। इस पर्व को भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना गया है. इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उन्हें [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ</strong>: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज मनाया जाता है. इस पर्व को हम यम द्वितीया के नाम से भी जानते हैं। इस पर्व को भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना गया है. इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उन्हें नारियल देती हैं और भाई अपनी बहनों के लिए खूब गिफ्ट लेकर आते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यमुना से जुड़ी है इस पर्व की मान्यता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस पर्व के संबंध में मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को आदरपूर्वक भोजन कराया था। यमराज के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यमराज की पूजा करेगा, उसे मृत्यु के बाद यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। सूर्य की पुत्री यमुना को सभी दुखों को दूर करने वाली माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन यम की पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये रहेगा शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल भाई दूज के मौके पर भाई को तिलक लगाने का शुभ समय दोपहर 1:10 बजे से शुरू होकर 3:22 बजे खत्म होगा. यह शुभ मुहूर्त कुल 2 घंटे 12 मिनट तक रहने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भाई दूज पर चौघड़िया मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लाभ – उन्नति: 09:19 पूर्वाह्न से 10:41 पूर्वाह्न<br>अमृत – सर्वोत्तम: 10:41 पूर्वाह्न से 12:04 अपराह्न<br>शुभ – उत्तम: 01:26 अपराह्न से 02:48 अपराह्न<br>शुभ – उत्तम: 05:33 अपराह्न से 07:11 अपराह्न<br>अमृत – सर्वोत्तम: 07:11 अपराह्न से 08:49 अपराह्न</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2024-bhai-dooj-tomorrow-know-the-auspicious-time-here/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Goverdhan Puja: आज है गोवर्धन पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/goverdhan-puja-today-is-govardhan-puja-know-the-auspicious-time-method-of-worship-and-importance/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। आज पूरे भारत में धूमधाम से गोवर्धन पूजा मनाई जा रही है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। गोवर्धन पूजा का संबंध द्वापर युग से है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह त्योहार प्रकृति और मानव के बीच संबंध को दर्शाता है। गोवर्धन पूजा खास तौर पर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> आज पूरे भारत में धूमधाम से गोवर्धन पूजा मनाई जा रही है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। गोवर्धन पूजा का संबंध द्वापर युग से है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह त्योहार प्रकृति और मानव के बीच संबंध को दर्शाता है। गोवर्धन पूजा खास तौर पर वृंदावन,मथुरा, गोकुल और बरसाना में मनाई जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोवर्धन पूजा का पर्व दिवाली के बाद मनाई जाती है, लेकिन इस बार 2 दिन दिवाली होने के कारण गोवर्धन पूजा 02 नवंबर को मनाई जा रही है। गोवर्धन पूजा के मौके पर घरों में अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इस साल गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 02 अक्तूबर को दोपहर 03: 22 मिनट से लेकर शाम 05: 34 मिनट तक का है। इस शुभ मुहूर्त में गोवर्धन पूजा करना बहुत ही शुभ है। गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त : 06:34 से 08:46 तक है। वहीं गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त :15:22 से 17:34 तक का है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन की पूजा करने से आर्थिक परेशानी दूर होती हैं। इसके अतिरिक्त धन-धान्य, संतान और सौभाग्य की प्रप्ति होती है। इस दिन जो भी भक्त भगवान गिरिराज की विधि-विधान से पूजा करते है तो उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहती है और गिरिराज महाराज जो भगवान श्री कृष्ण का ही स्वरूप हैं, उनका आशीर्वाद पूरे परिवार पर बना रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोवर्धन पूजा पर गाय, भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की खास तौर पर पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा करने के लिए आप सबसे पहले घर के आंगन में गाय के गोबर से श्री कृष्ण की चित्र बनाए। इसके बाद चावल, रोली, बताशे, खीर, जल, केसर, दूध, पान, फूल और दीया जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें। इसके बाद अपने परिवार समेत श्रीकृष्ण स्वरुप गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान गोवर्धन भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वहीं गायों को गुड़ व चावल खिलाने से भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/goverdhan-puja-today-is-govardhan-puja-know-the-auspicious-time-method-of-worship-and-importance/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[वाराणसी में दीपावली पर मुस्लिम महिलाओं ने उतारी प्रभु श्री राम की आरती]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/muslim-women-performed-aarti-of-lord-shri-ram-on-diwali-in-varanasi/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: दिवाली के मौके पर आज गुरुवार (31 अक्टूबर) को वाराणसी के लमही इलाके में मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्री राम की भव्य आरती की. (Diwali 2024) बता दें कि यह परंपरा वर्ष 2006 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर बम कांड के बाद शुरू हुई थी. विधि-विधान से श्री राम की आरती रामनवमी और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> दिवाली के मौके पर आज गुरुवार (31 अक्टूबर) को वाराणसी के लमही इलाके में मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्री राम की भव्य आरती की. (Diwali 2024) बता दें कि यह परंपरा वर्ष 2006 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर बम कांड के बाद शुरू हुई थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विधि-विधान से श्री राम की आरती</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रामनवमी और दिवाली पर मुस्लिम महिलाएं विधि-विधान से भगवान श्री राम की आरती करती हैं।  (Diwali 2024) इसका मुख्य उद्देश्य देश में लोगों को शांति, भाईचारा और शांति का संदेश देना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्री राम हम सभी के आदर्श</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान मौके पर मौजूद महिलाओं ने भी कहा कि भगवान श्री राम हम सभी के आदर्श हैं. उनका जीवन गरिमापूर्ण रहा है. इसलिए मनुष्य को बुरी दुनिया को छोड़कर भगवान श्री राम के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मुस्लिम महिलाओं ने भी उतारी आरती</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देशभर में दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसी क्रम में काशी में मुस्लिम महिलाओं ने विधि-विधान से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी की आरती की. इस दौरान उनके हाथ में दीपक से सजी थाली थी. महिलाओं ने 'हे ​​राजा राम तेरी आरती उतारू' भजन भी गाया.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/muslim-women-performed-aarti-of-lord-shri-ram-on-diwali-in-varanasi/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali 2024: दिवाली के दिन करें ये ख़ास उपाय, खुलेंगे तरक्की के सभी रास्ते!]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/diwali-2024-do-these-special-measures-on-the-day-of-diwali-all-paths-to-progress-will-open/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: आज देशभर में दिवाली की धूम मची है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और अपने भक्तों का उद्धार करती हैं। आज करें कुछ ख़ास उपाय इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> आज देशभर में दिवाली की धूम मची है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और अपने भक्तों का उद्धार करती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज करें कुछ ख़ास उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं। लाल किताब में दिवाली के दिन से जुड़े कुछ उपाय बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि इन उपायों को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और तरक्की के नए रास्ते भी खुलते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन उपायों को भी करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी उल्लू पर बैठकर पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घर जाती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं। लाल किताब के अनुसार, अगर दिवाली के दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो जीवन में कभी भी धन और सौभाग्य की कमी नहीं होती है। साथ ही कुंडली में भौतिक सुख-सुविधाओं के स्वामी शुक्र की स्थिति मजबूत होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली पर लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। आर्थिक लाभ पाने के लिए इस दिन पूजा में पीली कौड़ियां रखें। पूजा के बाद कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर ऐसे स्थान पर रखें जहां धन हो जैसे अलमारी या तिजोरी। माना जाता है कि इस उपाय को अपनाने से पूरे साल धन की कमी नहीं रहेगी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज मिट्टी का गुल्लक खरीदें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली पर मिट्टी का गुल्लक खरीदें। गुल्लक चौड़े आकार का होना चाहिए। इसके बाद दिवाली के दिन परिवार के सभी सदस्य गुल्लक में सिक्के डालते हैं। ध्यान रखें कि इसमें सिर्फ सिक्के ही डालें। इसके बाद गुल्लक को 40 दिनों तक अपने पास रखें और 41वें दिन गुल्लक को किसी शिव मंदिर के बाहर छोड़ दें। माना जाता है कि ऐसा करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और तरक्की के रास्ते खुल जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/diwali-2024-do-these-special-measures-on-the-day-of-diwali-all-paths-to-progress-will-open/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[&#8216;500 साल बाद लौटे हैं भगवान राम&#8217;, सीएम योगी समेत इन नेताओं ने दी दीपावली की शुभकामनाएं]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/lord-ram-has-returned-after-500-years-these-leaders-including-cm-yogi-wished-diwali/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: आज देशभर में दिवाली को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। सभी एक दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दे रहे हैं. लोग अपने घरों में देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा करके दिवाली का त्योहार मनाते हैं। त्योहारों पर भगवान को अच्छे-अच्छे पकवानों का भोग लगाया जाता है. लोग एक दूसरे से मिलकर दिवाली [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> आज देशभर में दिवाली को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। सभी एक दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दे रहे हैं. लोग अपने घरों में देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा करके दिवाली का त्योहार मनाते हैं। त्योहारों पर भगवान को अच्छे-अच्छे पकवानों का भोग लगाया जाता है. लोग एक दूसरे से मिलकर दिवाली की शुभकामनाएं दे रहे हैं और त्योहार मना रहे हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने दी बधाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली पर यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दी है. सीएम योगी ने लिखा कि 'अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय के महापर्व दीपावली की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. कृपानिधान प्रभु श्री राम व माता जानकी सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें, यही कामना है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भगवान राम 500 साल बाद लौटे हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सीएम योगी ने कहा-"आज दीपावली है, मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहता हूँ. त्रेता युग में भगवान राम के वनवास पूरा होने पर दीपावली मनाई गई थी, आज 1000 साल बाद भी यह त्यौहार बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह दिवाली इसलिए भी खास है क्योंकि भगवान राम 500 साल बाद लौटे हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने आगे लिखा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उन्होंने आगे लिखा, "इस साल 22 जनवरी को राम मंदिर का अभिषेक हुआ. हर कोई जश्न मना रहा है, यह त्यौहार हमें जोड़ता है और हमारे जीवन से अंधकार को दूर करता है. मैं भगवान राम से प्रार्थना करता हूँ कि दिवाली पर सभी के जीवन में खुशहाली आए."</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मायावती ने दीं दिवाली की शुभकामनाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती ने सभी को दिवाली की शुभकामनाएं दीं. मायावती ने लिखा, 'हैप्पी दिवाली. दीपावली के अवसर पर सभी देशवासियों एवं उनके परिवारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। साथ ही लोगों को भाई दूज और छठ पूजा की शुभकामनाएं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>केशव प्रसाद मौर्य ने दी बधाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दीपावली की शुभकामनाएं दी है. केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा कि, 'शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ उस प्रकाश को नमन करें जो समृद्धि, शुभता, अच्छा स्वास्थ्य, धन की प्रचुरता और शत्रु बुद्धि का विनाश लाता है. प्रकाश पर्व दीपावली हमें अंधकार को समाप्त कर प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रियंका गांधी ने दी सभी को शुभकामनाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि, 'घने अंधेरे के विरुद्ध दीये-भर प्रकाश की जीत का त्योहार; अन्याय, असत्य और अहंकार के ऊपर न्याय, सत्य और शील की विजय का त्योहार; रंगों, रौशनियों और ख़ुशियों का उत्सव. साफ-सफाई और पूजा-पाठ की बेला; एक मौसम को प्यार से विदा करके दूसरी ऋतु के स्वागत का महान पर्व - दीपावली आप सभी देशवासियों को बहुत-बहुत मुबारक.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अजय राय ने दी बधाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने देश वासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दी है. अजय राय ने लिखा कि 'सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं. यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि लेकर आए.'</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/lord-ram-has-returned-after-500-years-these-leaders-including-cm-yogi-wished-diwali/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Narak Chaturdashi: आज है नरक चतुर्देशी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/today-is-narak-chaturdashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर हर साल मां लक्ष्मी और गणेशी की पूजा नहीं बल्कि यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर यम का दीपक जलाया जाता है। जिसे यम दीपक के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस दीपक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर हर साल मां लक्ष्मी और गणेशी की पूजा नहीं बल्कि यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर यम का दीपक जलाया जाता है। जिसे यम दीपक के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस दीपक को जलाने से घर परिवार के लोगों पर से अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। आइए जानते है यम दीप जलाने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यम दीपक कोई धनतेरस के दिन जलाता है तो कोई नरक चतुर्दशी के दिन। इस साल 30 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान यमराज की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद के बाद शुभ मुहूर्त में शाम के समय यमराज के नाम से दीप जलाया जाता है। </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंत्रों का जाप करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नरक चतुर्दशी पर यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा। जो शाम 7 बजकर 2 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। 'मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह | त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ||' मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी के मौके पर सुबह जल्दी उठकर नहाएं। नहाने के बाद शाम के समय भगवान यमराज की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद यम का दीपक जलाने के लिए मिट्टी का चौमुखा दीपक लें। फिर शाम को प्रदोष काल में दक्षिण दिशा की तरफ ये दीपक जलाकर रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/today-is-narak-chaturdashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[योगी सरकार का बड़ा ऐलान, 1 नवंबर को सार्वजनकि अवकास, रखी ये शर्त]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/yogi-governments-big-announcement-public-holiday-on-1st-november-this-condition-has-been-kept/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: यूपी की योगी सरकार ने दिवाली के अगले दिन 31 अक्टूबर यानी 1 नवंबर को छुट्टी का ऐलान किया है. हालांकि, इसके लिए एक शर्त रखी गई है. इस आदेश के मुताबिक 1 नवंबर को छुट्टी रहेगी लेकिन 9 नवंबर को दफ्तर खुले रहेंगे. इस तथ्यों के अनुसार मिली छुट्टी आदेश में कहा गया [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ</strong>: यूपी की योगी सरकार ने दिवाली के अगले दिन 31 अक्टूबर यानी 1 नवंबर को छुट्टी का ऐलान किया है. हालांकि, इसके लिए एक शर्त रखी गई है. इस आदेश के मुताबिक 1 नवंबर को छुट्टी रहेगी लेकिन 9 नवंबर को दफ्तर खुले रहेंगे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस तथ्यों के अनुसार मिली छुट्टी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन अनुभाग, उत्तर की अधिसूचना संख्या 528/तीन-2023-39(2)/2016 दिनांक 4 दिसंबर द्वारा वर्ष 2024 के लिए परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के तहत घोषित राजपत्रित अवकाशों के तहत, 2023 इसके कंडिका क्रमांक 20 के अनुसार दिनांक 31-10-2024 को दीपावली के अवसर पर अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>योगी सरकार के आदेश में क्या कहा गया?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में दिवाली का त्योहार 31.10.2024 के साथ-साथ 01.11.2024 (शुक्रवार) को भी मनाया जा रहा है. ऐसे में शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 के तहत 01-11-2024 (शुक्रवार) को दिवाली का सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>1 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आदेश के अनुसार 01-11-2024 को दिवाली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है, बशर्ते कि 9-11-2024 (शनिवार) को सरकारी कार्यालय सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/yogi-governments-big-announcement-public-holiday-on-1st-november-this-condition-has-been-kept/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[यूपी में दीपावली पूजा का कब तक है शुभ मुहूर्त, जानें सबकुछ यहां]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/when-is-the-auspicious-time-for-diwali-puja-in-up-know-everything-here/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: यूपी में इस बार दिवाली के समय और तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति रही. शुरुआत में काफी कन्फ्यूजन हुआ. एक तरफ काशी विद्वत परिषद ने 31 अक्टूबर को दिवाली की बात कही तो वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए शुभ मुहूर्त निकालने वाले आचार्य गणेश्वर शास्त्री ने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> यूपी में इस बार दिवाली के समय और तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति रही. शुरुआत में काफी कन्फ्यूजन हुआ. एक तरफ काशी विद्वत परिषद ने 31 अक्टूबर को दिवाली की बात कही तो वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए शुभ मुहूर्त निकालने वाले आचार्य गणेश्वर शास्त्री ने कहा कि दिवाली पूजन के लिए सबसे अच्छा समय 1 नवंबर को है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>31 अक्टूबर को दिवाली मनाना सही</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिषियों के मुताबिक 31 अक्टूबर को दिवाली मनाना उचित है क्योंकि इस दिन सूर्यास्त से पहले अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी. विद्वानों के अनुसार दिवाली का त्योहार उदयातिथि में नहीं बल्कि प्रदोष काल और आधी रात में मनाया जाता है। ऐसे में यह त्योहार 31 अक्टूबर को ही है. इस तिथि पर आधी रात को अमावस्या और प्रदोष रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अमावस्या 31 अक्टूबर दोपहर 3:52 बजे शुरू</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। तिथि का समापन 1 नवंबर को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर होगा. चूंकि दिवाली पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए पूजा का समय 31 अक्टूबर को शाम 5.36 बजे से रात 8.11 बजे तक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लक्ष्मी पूजा का शुभ समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लक्ष्मी पूजा का शुभ समय वृषभ काल में शाम 6.21 बजे से रात 8.17 बजे तक है। जबकि निशिता काल में शुभ समय रात 11:39 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक है। इस साल दिवाली का जश्न 29 अक्टूबर को धनतेरस से शुरू हुआ. इसके बाद आज 30 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), 31 अक्टूबर को दिवाली, 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) और 3 नवंबर को भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा के साथ समापन होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/when-is-the-auspicious-time-for-diwali-puja-in-up-know-everything-here/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dhanteras: खरीदारी करने के लिए आज धनतेरस पर 1 घंटा 41 मिनट का शुभ समय]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dhanteras-1-hour-41-minutes-auspicious-time-for-shopping-today-on-dhanteras/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इसी तिथि पर देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धनतेरस के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इसी तिथि पर देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस के दिन रखें प्रदोष व्रत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाता है, जिसमें शाम के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है. इस योग में आप जो भी कार्य करेंगे उसका तीन गुना फल मिलेगा। इस साल धनतेरस पर आपको 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त मिलेगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस के दिन आभूषण खरीदना शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, आभूषण, वाहन, घर, दुकान आदि खरीदते हैं। जिनके पास कम पैसे होते हैं, वे धनिया, झाड़ू, नमक, पीतल के बर्तन आदि खरीदते हैं। लेख में आगे जानें क्या है शुभ मुहूर्त और धनतेरस का महत्व?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज 29 अक्टूबर को धनतेरस के दिन पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 41 मिनट का शुभ मुहूर्त रहेगा. धनतेरस पर पूजा का शुभ समय शाम 6:31 बजे से रात 8:13 बजे तक है. धनतेरस पर प्रदोष काल का समय शाम 5:38 बजे से रात 8:13 बजे तक है। उस दिन वृषभ काल का समय शाम 6:13 बजे से रात 8:27 बजे तक है। यह मुहूर्त देश की राजधानी नई दिल्ली पर आधारित है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस का क्या है महत्व?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी और कुबेर की कृपा से धन और समृद्धि बढ़ती है। सुख-समृद्धि बढ़ती है। धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dhanteras-1-hour-41-minutes-auspicious-time-for-shopping-today-on-dhanteras/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Kali Chaudas: कब मनाई जाएगी काली चौदस की पूजा, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/kali-chaudas-when-will-kali-chaudas-be-celebrated-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। काली चौदस के दिन मां काली की खास तरीके से पूजा- अर्चना की जाती है। इसे रूप चौदस या नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। मां काली को समर्पित यह पर्व दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां काली की पूजा करने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ। </strong>काली चौदस के दिन मां काली की खास तरीके से पूजा- अर्चना की जाती है। इसे रूप चौदस या नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। मां काली को समर्पित यह पर्व दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां काली की पूजा करने से सभी परेशानी दूर होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>काली चौदस का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>साथ ही मां काली की प्रतिमा के आगे दीप जलाने से व्यक्ति सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वहीं सभी तरह के पापों से मुक्ति भी मिलती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या 31 अक्टूबर को दोपहर 03: 52 मिनट पर शुरू होगी। जो 01 नवंबर को शाम में 06: 16 मिनट पर समाप्त होगी। मां काली की पूजा निशिता काल में होती है। ऐसे में काली चौदस 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। काली चौदस के दिन मां काली की पूजा करने से पहले अभ्यंग स्नान करना आवश्यक होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>काली चौदस की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन मां काली की पूजा करने से नहाकर इत्र लगाना चाहिए। उसके बाद एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाए और उस पर मां काली की मूर्ति को रखे। प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उसके बाद पुष्प, फल, हल्दी, कपूर, कुमकुम, नारियल और नैवेद्य मां काली को चढ़ाए। आखिर में काली चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जाप करे। मान्यता है कि काली चौदस के दिन विधि विधान से पूजा करने वालों को मानसिक और शारीरिक सुख की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाकाली की अराधना प्रभावी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके साथ ही शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। ऐसा माना जाता है की काली चौदस पर काली पूजा करने से शत्रु पर विजय प्राप्ति का वरदान मिलता है। जो साधक तंत्र साधना करते हैं काली चौदस के दिन महाकाली की साधना को सबसे प्रभावी मानते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/kali-chaudas-when-will-kali-chaudas-be-celebrated-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[राम नगरी को 25 लाख दीपकों से सजाने की तैयारी, आधी रात तक कर सकेंगे दर्शन]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/preparations-to-decorate-ram-nagari-with-25-lakh-lamps-people-can-have-darshan-till-midnight/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भव्य मंदिर में होने वाला पहला दीपोत्सव कई मायनों में खास होगा. न सिर्फ अयोध्या नगरी लाखों दीपों से रोशन होगी, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाले भव्य मंदिर की दिवाली भी यादगार होगी. सरयू तट पर 25 से 28 लाख दीपक जलाएं जाएंगे इसके लिए तैयारियां लगभग [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ: </strong>रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भव्य मंदिर में होने वाला पहला दीपोत्सव कई मायनों में खास होगा. न सिर्फ अयोध्या नगरी लाखों दीपों से रोशन होगी, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाले भव्य मंदिर की दिवाली भी यादगार होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सरयू तट पर 25 से 28 लाख दीपक जलाएं जाएंगे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके लिए तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। इस साल जहां सरयू तट पर 25 से 28 लाख दीपक जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना है, वहीं श्री राम मंदिर में विशेष प्रकार के दीपक जलाए जाएंगे. मंदिर की इमारत को दाग-धब्बों और कालिख से बचाने के लिए विशेष लैंप की व्यवस्था की गई है, जो लंबे समय तक रोशन रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मनोहारी फूलों से दुल्हन की तरह सजेगा मंदिर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री राम जन्मभूमि मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाने की भी विशेष योजना है. मंदिर परिसर को कई खंडों और उप खंडों में बांटकर सजावट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिहार कैडर के स्वैच्छिक सेवानिवृत्त आईजी आशु शुक्ला को मंदिर के प्रत्येक कोने को व्यवस्थित रूप से रोशन करने, सभी प्रवेश द्वारों को तोरण से सजाने, सफाई और सजावट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे भक्त सुंदर फूलों और दीपों से सजे मंदिर के दिव्य दर्शन कर सकेंगे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाहरी दर्शन के लिए खुला रहेगा मंदिर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीपोत्सव की भव्यता को भक्तों के लिए अविस्मरणीय बनाने के लिए, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक रात 12 बजे तक मंदिर को बाहरी दर्शन के लिए खुला रखने का फैसला किया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भव्य सजावट का आनंद ले सकेंगे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गेट नंबर 4बी (लगेज स्कैनर प्वाइंट) से भक्त आधी रात तक मंदिर की भव्य सजावट का आनंद ले सकेंगे. दीपों का यह उत्सव न सिर्फ आस्था बल्कि पर्यावरण और सुंदरता का भी संदेश देगा, जिससे अयोध्या की दिवाली दुनिया में खास जगह बनाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/preparations-to-decorate-ram-nagari-with-25-lakh-lamps-people-can-have-darshan-till-midnight/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[धनतेरस पर लाएं ये सामान, चमकेगी किस्मत, इसे अंबानी-अडानी भी लाते है घर]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/bring-these-things-on-dhanteras-luck-will-shine-ambani-adani-also-bring-this-home/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: रोशनी का त्योहार धनतेरस के दिन से शुरू हो जाता है. धनतेरस का दिन खरीदारी के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय अपनाते हैं। लोग अमीर बनने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी मां लक्ष्मी उनसे प्रसन्न नहीं [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> रोशनी का त्योहार धनतेरस के दिन से शुरू हो जाता है. धनतेरस का दिन खरीदारी के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय अपनाते हैं। लोग अमीर बनने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी मां लक्ष्मी उनसे प्रसन्न नहीं होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अंबानी से लेकर अडानी तक लाते हैं ये चीज</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुकेश अंबानी, गौतम अडानी जैसे करोड़पति लोग धनतेरस के दिन अपने घर में एक चीज जरूर लाते हैं, जिससे मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और साल भर उन पर धनवर्षा करती हैं। ऐसे में अगर आप भी चाहते हैं कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न रहें तो आइए हम आपको बताते हैं कि धनतेरस के दिन आपको कौन सी चीज घर लानी चाहिए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब है धनतेरस?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल धनतेरस 29 अक्टूबर को है. इस दिन आपको अपने घर में केवल एक ही ऐसी चीज लानी है जो बाजार में आसानी से उपलब्ध हो और इसे लाना बहुत शुभ माना जाता है। इस चीज को लाने से आपके घर में सुख-समृद्धि और धन-संपदा आती है। इससे घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। अगर आप धनतेरस के दिन नमक खरीदते हैं तो आपको मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है और आर्थिक लाभ मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस पर घर लाएं नमक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप धनतेरस पर सोना-चांदी नहीं खरीद सकते तो एक पैकेट नमक खरीद लें। धनतेरस के दिन नमक खरीदने का भी विशेष महत्व है। इतने अमीर होने के बावजूद करोड़पति लोग धनतेरस के दिन नमक जरूर खरीदते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":19357,"width":"633px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-10.png" alt="" class="wp-image-19357" style="width:633px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नमक आपके जीवन में घुल देगी मिठास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इतना ही नहीं धनतेरस के दिन नमक के कई उपाय भी आपके जीवन में खुशियां लाने में मदद करते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि इस दिन खरीदा हुआ नमक आप खाएं नहीं बल्कि पहले उसे मां लक्ष्मी को अर्पित करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस पर नमक का यूज इस तरह करें?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन किसी को नमक का दान नहीं करना चाहिए और न ही किसी को नमक उधार देना चाहिए। धनतेरस के दिन 5 किलो नमक खरीदें और उसे लाल कपड़े में बांधकर रसोई में किसी ऐसे स्थान पर रखें जहां किसी की नजर न पड़े। उस स्थान पर साल भर के लिए नमक को वही छोड़ दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस प्रकार करें नमक का उपयोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक साल बाद अगले धनतेरस पर इस नमक को घर के आसपास किसी नदी में बहा दें और अन्य नमक की पैकेट को वापस उसकी जगह पर बांध दें। इस उपाय से आपके जीवन में हमेशा खुशियां बनी रहेंगी और आपको जल्द ही आर्थिक लाभ भी मिलेगा। ऐसा करने से आपके घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी और साल भर धन की वर्षा होगी। आपके घर में हमेशा धन की वृद्धि होगी। इसलिए करोड़पतियों के घर में भी साल भर धन-दौलत बढ़ती रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/bring-these-things-on-dhanteras-luck-will-shine-ambani-adani-also-bring-this-home/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali Bonus: सीएम योगी ने कर्मचारियों को दी खुशखबरी, दिवाली से पहले बोनस में मिलेंगे इतने पैसे]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/diwali-bonus-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: योगी सरकार ने दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को तोहफा दिया है. सीएम योगी ने यह तोहफा देने का ऐलान सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर किया है. जिसमें कहा गया है कि दिवाली से पहले राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा की गई है. सोशल मीडिया पर दी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> योगी सरकार ने दिवाली से पहले राज्य कर्मचारियों को तोहफा दिया है. सीएम योगी ने यह तोहफा देने का ऐलान सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर किया है. जिसमें कहा गया है कि दिवाली से पहले राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा की गई है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोशल मीडिया पर दी जानकारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राज्य सरकार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर किया है जिसमें राज्य कर्मचारियों को बोनस देने का ऐलान किया गया है. पोस्ट में लिखा है कि राज्य के सभी पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों, शैक्षणिक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों और सरकारी विभागों के कर्मचारियों को बोनस देने का निर्णय लिया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>30 अक्टूबर तक वेतन के साथ बोनस भी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने राज्य कर्मचारियों को वेतन के साथ बोनस देने का फैसला किया है. कर्मचारियों को वेतन देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है. सरकार ने सभी कर्मचारियों को 30 अक्टूबर तक वेतन देने का ऐलान किया है. अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले वेतन और बोनस देने की घोषणा की गई है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>1025 करोड़ रुपये का बोनस</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सरकार की ओर से बोनस की घोषणा कर दी गयी है. सरकार के इस ऐलान के बाद 14.82 लाख कर्मचारियों को फायदा मिलेगा. बोनस की घोषणा से सरकारी खजाने पर 1025 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. यानी सरकार राज्य कर्मचारियों को 1025 करोड़ रुपये का बोनस बांटेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/diwali-bonus-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rohini Fast: 21अक्टूबर को मनाया जाएगा रोहिणी व्रत, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/rohini-fast-rohini-fast-will-be-celebrated-on-21st-october-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। रोहिणी व्रत जैन समुदाय के लोगों के लिए बहुत खास माना जाता है। यह जैन धर्म के लोगों के पवित्र व्रतों में से एक है। इस व्रत को करने से श्रद्धालुओं को कई लाभ मिलते है। रोहिणी व्रत उस दिन मनाया जाता है, जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है। रोहिणी व्रत हर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> रोहिणी व्रत जैन समुदाय के लोगों के लिए बहुत खास माना जाता है। यह जैन धर्म के लोगों के पवित्र व्रतों में से एक है। इस व्रत को करने से श्रद्धालुओं को कई लाभ मिलते है। रोहिणी व्रत उस दिन मनाया जाता है, जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है। रोहिणी व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-शांति के लिए किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक रोहिणी व्रत 23 सितंबर 2024 को सोमवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन पूजा के करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 40 मिनट से शुरु होगा। जो 12 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगा। इस व्रत को लगातार 3, 5 और 7 सालों तक करने का विधान है। फिर इसके बाद रोहिणी व्रत का उद्यापन किया जाता है। जैन धर्म में रोहिणी व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन महिलाएं अपने पति को लंबी आयु के लिए भी व्रत करती है। इस व्रत करने से जीवन में हर तरह की खुशी प्राप्त होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रोहिणी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठे और सारे काम करके जल्दी स्नान कर लें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर संभव हो तो पानी में कुछ गंगाजल की बूंदे मिलाकर नहाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाने के बाद व्र का संकल्प करें। सूर्यदेव को जल से अर्घ्य दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर की अच्छी से सफाई करें, इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन वासुपूज्य की विधि-विधान से पूजा करते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के दौरान भगवान को फल,फूल और धूपबत्ती या अगरबत्ती और दूर्वा को अर्पित करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शाम को सूर्यास्त के समय पहले पूजा-पाठ करने के बाद फलों का सेवन करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस व्रत में रात को भोजन नहीं किया जाता, इसलिए पूजा-पाठ करने के बाद व्रत का पारण करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/rohini-fast-rohini-fast-will-be-celebrated-on-21st-october-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dhanteras: धनतेरस पर इन चीजों की खरीदारी से बचें, कांच की बर्तन तो गलती से भी न लें]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dhanteras-avoid-purchasing-these-things-on-dhanteras-do-not-buy-glass-utensils-even-by-mistake/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: दीपावली बेहद करीब है. इसे दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, रोशनी का एक खूबसूरत त्योहार है जो अंधेरे पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। (Dhanteras) यह त्यौहार पांच दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> दीपावली बेहद करीब है. इसे दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, रोशनी का एक खूबसूरत त्योहार है जो अंधेरे पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। (Dhanteras) यह त्यौहार पांच दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुख-समृद्धि का त्योहार है धनतेरस</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस पर खरीदारी के लिए सही चीजों का चयन करना जरूरी है, ताकि मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर आपके धन में वृद्धि करें। यह दिन सुख-समृद्धि का प्रतीक है इसलिए इस दिन सही चीजें ही खरीदनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस का दिन हिंदू परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। (Dhanteras) इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को धन, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर के स्वागत के लिए इस दिन कुछ नया खरीदना शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस पर ये चीजें खरीदना शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस पर आप सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, सोने के सिक्के या वाहन भी खरीद सकते हैं। (Dhanteras) लेकिन इस दिन कुछ चीजें खरीदने से बचना चाहिए, आइए जानते हैं ऐसी कौन सी चीजें हैं जिन्हें धनतेरस के दिन खरीदना शुभ नहीं माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस पर भूलकर भी न खरीदें ये चीजें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>कांच के बने वस्तु</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन कांच के बर्तन या कांच की कोई भी वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। यह घर में नकारात्मकता लाता है और शांति और समृद्धि को बाधित करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>काली चीजें</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन काले रंग की चीजें जैसे कपड़े या अन्य चीजें खरीदने से बचें। यह शुभ नहीं माना जाता है. इसकी जगह हल्के और शुभ रंग जैसे सफेद या पीला खरीदना बेहतर है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पुरानी या पहले यूज की गई वस्तुएं</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस पर नई चीजें ही खरीदें। पुरानी या सेकेंड-हैंड चीज़ें खरीदने से बचें, क्योंकि ये नकारात्मकता लाती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dhanteras-avoid-purchasing-these-things-on-dhanteras-do-not-buy-glass-utensils-even-by-mistake/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ahoi Ashtami: 24 अक्टूबर को किया जाएगा अहोई अष्टमी का उपवास, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/ahoi-ashtami-ahoi-ashtami-fast-will-be-observed-on-24th-october-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती है। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती है। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अहोई अष्टमी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन अहोई माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत को खोला जाता है। मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत का पारण किया जा सकता हैं। अहोई अष्टमी 24 अक्टूबर 2024 को रात चंद्र उदय का समय रात 11 बजकर 44 मिनट पर है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाओं को स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत का संकल्प करने के बाद माता अहोई की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के समय कहना चाहिए कि संतान की लंबी आयु एवं सुखमय जीवन के लिए मैं अहोई माता का व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरी संतान को लंबी आयु और सुख-समृद्धि प्रदान करें। अहोई अष्टमी व्रत तिथि- 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार, अष्टमी तिथि शुरुआत - 24 अक्टूबर 2024 को रात 1 बजकर 18 मिनट, अहोई अष्टमी की समाप्ति- 25अक्टूबर 2024 को रात 1 बजकर 58 मिनट, अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 43 मिनट से शाम 6 बजकर 59 मिनट तक, तारें दर्शन का शुभ मुहूर्त - 24 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/ahoi-ashtami-ahoi-ashtami-fast-will-be-observed-on-24th-october-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Karwa Chauth Bhog: करवा चौथ में इन चीजों का भोग लगाने से भोलेनाथ होते हैं खुश]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-bhog-bholenath-becomes-happy-by-offering-these-things-in-karwa-chauth/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: विवाहित महिलाएं आज यानी 20 अक्टूबर, रविवार को करवा चौथ मना रही हैं। अविवाहित लड़कियां शीघ्र विवाह के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। पति की लंबी उम्र के लिए रखें व्रत धार्मिक मान्यता है कि अगर विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> विवाहित महिलाएं आज यानी 20 अक्टूबर, रविवार को करवा चौथ मना रही हैं। अविवाहित लड़कियां शीघ्र विवाह के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पति की लंबी उम्र के लिए रखें व्रत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यता है कि अगर विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं तो उनके पतियों को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत में महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोलती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज करवा चौथ का व्रत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 19 अक्टूबर को शाम 06:16 बजे शुरू हो चुकी है और इसका समापन 20 अक्टूबर को दोपहर 03:46 बजे होगा. ऐसे में करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर को ही मनाया जा रहा है. यह व्रत चंद्रमा को देखने के बाद खोला जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भोग लगाना बेहद खास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>करवा चौथ की पूजा में भोग लगाना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। भोग में कुछ ऐसी वस्तुएं शामिल होती हैं जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन चीजों का लगाएं भोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मिठाई: यह प्रसाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. आमतौर पर खीर, बर्फी, पेड़ा, गजक या अन्य स्थानीय मिठाइयाँ अर्पित की जाती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>फल: प्रसाद में केला, अनार, सेब, अंगूर जैसे फल शामिल होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सूखे मेवे: प्रसाद में पिस्ता, बादाम, काजू आदि सूखे मेवे भी शामिल होते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सिन्दूर: सिन्दूर सुहाग का प्रतीक है और इसे अवश्य चढ़ाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीपक जलाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>करवा चौथ की रात को विधिपूर्वक पूजा करें और चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भोलेनाथ को फल,खीर और मिठाई का भोग लगाएं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आप पूजा की थाली में सेवइयां, सब्जियां और पूड़ी आदि शामिल कर सकते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-bhog-bholenath-becomes-happy-by-offering-these-things-in-karwa-chauth/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[सीएम योगी का बड़ा ऐलान, वाल्मीकि जयंती पर सभी मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन और रामचरितमानस पाठ]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/big-announcement-by-cm-yogi-bhajan-kirtan-and-ramcharitmanas-recitation-will-be-held-in-all-the-temples-on-valmiki-jayanti/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: यूपी की योगी सरकार ने कल यानी 17 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाने का ऐलान किया है. इस दौरान प्रदेश भर में कई भव्य कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इस दिन मंदिरों में श्री रामचरित मानस का पाठ किया जाएगा और कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, कीर्तन आदि का आयोजन किया जाएगा। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> यूपी की योगी सरकार ने कल यानी 17 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाने का ऐलान किया है. इस दौरान प्रदेश भर में कई भव्य कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इस दिन मंदिरों में श्री रामचरित मानस का पाठ किया जाएगा और कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, कीर्तन आदि का आयोजन किया जाएगा। महर्षि वाल्मीकि की तपो स्थल चित्रकूट में भी एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आयोजन स्थल पर इन बातों का रखा जाए ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सीएम योगी ने 17 अक्टूबर गुरुवार को प्रदेश में भव्य तरीकें से महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाने का ऐलान किया है। इसके लिए सीएम योगी ने आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पीने का पानी, लाइट व सुरक्षा व्यवस्था सही रखने का आदेश दिया हैं। इस दौरान सभी कार्यक्रम स्थलों पर दीपदान के अलावा रामायण पाठ कराए जाएंगे</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चित्रकूट में भी भव्य कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी तरफ महर्षि वाल्मीकि जयंती पर चित्रकूट के तपोस्थली लालापुर में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। ख़बर है कि वाल्मीकि जयंती के मौके पर उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद सुबह 11 बजे कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इस दौरान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. कार्यक्रम का आयोजन सूचना-जनसंपर्क विभाग, संस्कृति विभाग, जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद कर रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/big-announcement-by-cm-yogi-bhajan-kirtan-and-ramcharitmanas-recitation-will-be-held-in-all-the-temples-on-valmiki-jayanti/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dussehra: एक ऐसा मंदिर जहां रावण के मरने पर नहीं बल्कि पैदा होने पर मनाया जाता है जश्न]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dussehra-a-temple-where-ravana-is-celebrated-not-on-his-death-but-on-his-birth/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हर साल शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रभु राम ने रावण का वध किया था। इस अवसर पर राम जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही राम जी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> हर साल शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रभु राम ने रावण का वध किया था। इस अवसर पर राम जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही राम जी को प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जाने मंदिर के बारे में</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन शुभ मुहूर्त में देशभर में रावण दहन किया जाता है, लेकिन देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जहां दशहरा के दिन रावण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इतना ही नहीं रावण का जलाभिषेक भी किया जाता है। आइए जानते है ऐसे मंदिर के बारे में</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण का जन्मदिन मनाते है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यूपी के कानपुर शहर में एक दशानन नाम का मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण साल 1868 में महाराज गुरु प्रसाद ने करवाया था। दशहरा के दिन रावण का जलाभिषेक कर खास श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में रावण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन यहां पर रावण का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नीलकंठ के दर्शन से सभी दोष दूर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यता है कि जब कोई श्रद्धालु रावण की पूजा करता है और उनके दर्शन के लिए इस मंदिर में आता है तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। दशहरे के दिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी होती हैं। यह मंदिर सालभर बंद रहता है और दशहरा के दिन ही मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। मान्यता हैं कि दशहरे के दिन दशानन मंदिर में लंकापति रावण की आरती के दौरान नीलकंठ के दर्शन श्रद्धालुओं को होते हैं तो सभी ग्रहों के दोष दूर हो जाते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dussehra-a-temple-where-ravana-is-celebrated-not-on-his-death-but-on-his-birth/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Weapons: दशहरे के मौके पर RSS करता है हथियारों की पूजा, जाने वजह]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/weapons-rss-worships-weapons-on-the-occasion-of-dussehra-know-the-reason/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। आज विजयादशमी कार्यक्रम पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संघ मुख्‍यालय नागपुर में इस कार्यक्रम को लेकर खास तैयारियां की जाती है। हर संघ सदस्‍य के लिए दशहरे का दिन कई मायनों से खास होता है, क्‍योंकि विजयादशमी के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्‍थापना हुई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ। </strong>आज विजयादशमी कार्यक्रम पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संघ मुख्‍यालय नागपुर में इस कार्यक्रम को लेकर खास तैयारियां की जाती है। हर संघ सदस्‍य के लिए दशहरे का दिन कई मायनों से खास होता है, क्‍योंकि विजयादशमी के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्‍थापना हुई थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दशमी के मौके पर शास्त्रों की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संघ की स्‍थापना 1925 में दशहरा के दिन हुई थी। दशमी के मौके पर शस्त्रों की पूजा की जाती है। इस दौरान संघ के सदस्य पूरे विधि-विधान से शस्त्रों की पूजा करते हैं। दशहरे के मौके पर 9 दिनों की उपासना के बाद 10वें दिन विजय कामना के साथ हथियारों की पूजा की जाती है। विजयादशमी पर शक्ति रुपा मां दुर्गा, काली की पूजा के साथ शस्त्रों की पूजा हिंदू धर्म में लंबे समय की जा रही है। RSS हर साल हथियारों की विधि विधान से पूजा करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शस्त्रों को धारण करने की सलाह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संघ का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखना, समाज सेवा और सुधार के कार्य करना, RSS की सबसे छोटी इकाई शाखा होती है। जहां स्वयंसेवक प्रतिदिन इकट्ठे होकर शारीरिक प्रशिक्षण और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। बता दें कि सनातन धर्म के देवी-देवताओं की ओर से धारण किए गए शस्त्रों का जिक्र करते हुए एकता के साथ ही अस्त्र-शस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/weapons-rss-worships-weapons-on-the-occasion-of-dussehra-know-the-reason/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dussehra: दशमी के मौके पर जाने रावण दहन का शुभ मुहूर्त और महत्व]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/dussehra-know-the-auspicious-time-and-importance-of-ravana-dahan-on-the-occasion-of-dashami/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत में एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और मुख्य रूप से भगवान राम द्वारा रावण के वध का उत्सव माना जाता है। इस दिन देशभर में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, जहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत में एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और मुख्य रूप से भगवान राम द्वारा रावण के वध का उत्सव माना जाता है। इस दिन देशभर में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, जहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। रावण दहन को लेकर सभी के मन में एक सवाल रहता है कि सही मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है? आइए जानते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण दहन का मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दशहरा 2024 में 11 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन रावण दहन के लिए शुभ समय शाम 5:30 बजे से लेकर रात 7:00 बजे तक रहेगा। रावण दहन का मुहूर्त समय पंचांग और तिथि के अनुसार निकाला जाता है। इसे विजय मुहूर्त कहा जाता है, क्योंकि इसी समय भगवान राम ने रावण का वध कर धरती को उसके आतंक से मुक्त किया था। इस मुहूर्त में किया गया रावण दहन शुभ माना जाता है और इसे अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण दहन का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रावण दहन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह बुराई के प्रतीकों का नाश और सत्य, न्याय, और अच्छाई की जीत को दर्शाता है। रावण को अहंकार, अधर्म और अनैतिकता का प्रतीक माना जाता है, और उसके पुतले को जलाकर हमें यह संदेश मिलता है कि चाहे कितनी भी शक्तिशाली बुराई क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही विजय होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धार्मिक महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दशहरे का धार्मिक महत्व रामायण से जुड़ा है, जिसमें भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए लंका जाकर रावण का वध किया था। भगवान राम को धर्म और सत्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि रावण अहंकार और अधर्म का। इस दिन रावण का पुतला जलाकर हम भगवान राम की विजय को याद करते हैं और अपने जीवन में उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रावण दहन केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज में बुराई और अधर्म के खिलाफ खड़े होने का प्रतीक है। इसे हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और लोग एकत्र होकर इसका आनंद लेते हैं। यह सामाजिक मेलजोल और एकता का प्रतीक भी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/dussehra-know-the-auspicious-time-and-importance-of-ravana-dahan-on-the-occasion-of-dashami/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Kanya Pujan: आज करें कन्या पूजन, भूलकर भी उपहार में न दें ये वस्तु अन्यथा माता हो जाएंगी नाराज]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/kanya-pujan-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%b0/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: आज शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन है, जिसमें मां दुर्गा के 9वें रूप मां सिद्धरात्रि की पूजा की जाएगी. लेकिन क्या आपको पता है नवरात्रि का व्रत और माता रानी की पूजा का पूर्ण फल की प्राप्ती कब होती है, तो चलिए जानते है, बता दें कि जब आप छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ: </strong>आज शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन है, जिसमें मां दुर्गा के 9वें रूप मां सिद्धरात्रि की पूजा की जाएगी. लेकिन क्या आपको पता है नवरात्रि का व्रत और माता रानी की पूजा का पूर्ण फल की प्राप्ती कब होती है, तो चलिए जानते है, बता दें कि जब आप छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका विधि पूर्वक पूजन करते हैं. आपको नवरात्रि में की गई माता रानी की सेवा का पूर्ण फल मिलता है। कन्या पूजन को कंजक भी कहा जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज कन्या पूजन करना बेहद शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्रि के दौरान, भक्त अष्टमी और नवमी तिथि पर कुंवारी लड़कियों की पूजा करते हैं, जो आज 11 अक्टूबर को है। आज अष्टमी-नवमी दोनों तिथि एक ही दिन है. इसलिए आज 11 अक्टूबर, शुक्रवार को अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>2 से 10 साल की कन्या माता के सामान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्या पूजन के दौरान लोग 2-10 साल की छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का रूप मानते हैं और उन्हें आदरपूर्वक अपने घर बुलाते हैं, उनके पैर धोते हैं, उन्हें पूड़ी, चना, हलवा और नारियल खिलाते हैं, उपहार देते हैं और उन्हें विदा करते हैं। आशीर्वाद का। ऐसा माना जाता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा बहुत प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":18701,"width":"662px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-4.png" alt="" class="wp-image-18701" style="width:662px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कन्या पूजन में रखें इन बातों का ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लेकिन ध्यान रखें कि कन्या पूजन के दौरान ऐसी कोई गलती न करें जिससे देवी मां नाराज हो जाएं। कन्या पूजा पर लोग लड़कियों को कई तरह के उपहार देते हैं, जो बहुत अच्छी बात है। लेकिन जाने-अनजाने में कोई भी ऐसा उपहार न दें जिससे माता रानी की नाराजगी का सामना करना पड़े। इसलिए जानिए लड़कियों को उपहार में क्या नहीं देना चाहिए-</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कंजक को उपहार के तौर पर इन चीजों को न दें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्या पूजन में कन्याओं को स्टील या प्लास्टिक से बनी वस्तुएं उपहार में न दें क्योंकि हिंदू धर्म में पूजा के लिए इन धातुओं को शुभ नहीं माना गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इसके अलावा कन्याओं को कांच की चीजें या नुकीली चीजें देने से बचें।</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्या पूजन के बाद कन्याओं को कभी भी काले कपड़े या काला रूमाल आदि न दें। इसके स्थान पर आप लाल रंग की चुनरी या लाल वस्त्र उपहार में दे सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><br><strong>इन गलतियों से भी बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>घर आकर सीधे कन्याओं को भोजन कराने की बजाय पहले उनके पैर धोएं, तिलक लगाएं और फिर आसन पर बिठाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्याओं को लहसुन-प्याज वाली चीजें खिलाने की बजाय हलवा, पूरी, चना और नारियल ही खिलाएं। छोटी कन्याओं को उतना ही खाना खिलाएं जितना वे सम्मानपूर्वक खा सकें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्याओं को बिना पैर छुए विदा न करें, इससे मां दुर्गा नाराज होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लड़कियों को विदा करने के तुरंत बाद घर की सफाई न करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महानवमी आज, मां सिद्धिदात्री को बेहद पसंद हैं इस रंग के वस्त्र, आप भी जरूर पहनें]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/mahanavami-today-maa-siddhidatri-likes-clothes-of-this-color-very-much-you-too-must-wear-it/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: नवरात्रि का आज नौवां दिन है। ऐसे में आज शुक्रवार, 11 अक्टूबर को देशभर में मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। नवरात्रि का नौवां दिन माता सिद्धिदात्री को समर्पित है. इस दिन को हम राम नवमी और महानवमी भी कहते है. इस दिन भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने के साथ साथ छोटी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> नवरात्रि का आज नौवां दिन है। ऐसे में आज शुक्रवार, 11 अक्टूबर को देशभर में मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। नवरात्रि का नौवां दिन माता सिद्धिदात्री को समर्पित है. इस दिन को हम राम नवमी और महानवमी भी कहते है. इस दिन भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने के साथ साथ छोटी छोटी कन्याओं का पूजन व भोजन भी कराते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आदि शक्ति के नाम से भी जाना जाता हैं माता को</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है। इस दिन लोग कन्या पूजन के साथ-साथ विशेष रूप से देवी सिद्धिदात्री की पूजा भी करते हैं। माता को आदि शक्ति भगवती के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवी सिद्धिदात्री की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन होने से कन्या पूजन एक ही दिन अलग-अलग शुभ मुहूर्त में किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 11 अक्टूबर शुक्रवार को दोपहर 12:06 बजे शुरू होगी. नवमी तिथि 12 अक्टूबर शनिवार को रात्रि 10:58 बजे समाप्त होगी. उदय तिथि के अनुसार नवमी तिथि 11 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 7.44 बजे से 10.37 बजे तक रहेगा। नवमी तिथि पर कन्या पूजन का शुभ समय दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 2.45 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ समय सुबह 11.45 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा. इस शुभ मुहूर्त में भी कन्या पूजन किया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये है पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें, उसके बाद सबसे पहले कलश की पूजा करें और सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें। मां को मोली, रोली, कुमकुम, फूल और चुनरी चढ़ाकर भक्तिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद मां को पूड़ी, खीर, चना, हलवा और नारियल का भोग लगाएं. इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करें और कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माता को भोग में पसंद हैं हलवा, पूड़ी, चना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, हलवा, खीर और नारियल बहुत पसंद है. मान्यता है कि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को ये चीजें अर्पित करने से माता रानी बहुत प्रसन्न होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मां को बैंगनी और सफेद रंग हैं अत्यंत प्रिय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मां सिद्धिदात्री को बैंगनी और सफेद रंग पसंद है। इस दिन मां सिद्धिदात्री को सफेद या बैंगनी रंग के वस्त्र अर्पित करना बहुत अच्छा होता है। इसके अलावा महानवमी के दिन बैंगनी या सफेद रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होता है। यह रंग आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/mahanavami-today-maa-siddhidatri-likes-clothes-of-this-color-very-much-you-too-must-wear-it/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[दशहरा के दौरान भूल कर भी न करें ये काम, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/do-not-do-this-work-even-by-mistake-during-dussehra-police-issued-advisory/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्योहारी सीजन को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अहम एडवाइजरी जारी की है. आगामी त्योहारों दुर्गा पूजा, महानवमी दशहरा को देखते हुए आदेश जारी किये गये हैं. आदेश में कहा गया है कि दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नियोजित पुलिस व्यवस्था की जाए. जुलूस में सुरक्षा बनाए रखने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> उत्तर प्रदेश में त्योहारी सीजन को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अहम एडवाइजरी जारी की है. आगामी त्योहारों दुर्गा पूजा, महानवमी दशहरा को देखते हुए आदेश जारी किये गये हैं. आदेश में कहा गया है कि दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नियोजित पुलिस व्यवस्था की जाए. जुलूस में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस व्यवस्था बॉक्स स्वरूप में की जाए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महानवमी पर तैनात रहेंगे पुलिसकर्मी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महानवमी के दौरान मंदिरों में महिलाओं और लड़कियों की भारी भीड़ को देखते हुए जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात किये जाएं. मंदिरों के आसपास एंटी रोमियो स्क्वॉड को सक्रिय किया जाए और विसर्जन स्थलों पर मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जाए. आदेश में मूर्ति विसर्जन के समय घाटों पर बैरिकेडिंग के साथ ही स्थानीय गोताखोर, जल पुलिस, बाढ़ राहत पीएसी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा घाटों पर समुचित रोशनी की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण दहन स्थलों पर अग्निशमन की व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में रावण दहन स्थलों पर अग्निशमन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा रामलीला स्थल की समितियों से भी बात करने की सलाह दी गई है. रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, बैजरो शॉपिंग मॉल जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के भी निर्देश दिए गए हैं.<br>कहा गया है कि किसी भी नए रास्ते से कोई जुलूस न निकाला जाए. जिन जगहों पर विवाद हुआ है वहां की मौजूदा स्थिति जानें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट शेयर करने पर कार्रवाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और व्हाट्सएप पर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि धार्मिक गुरुओं से चर्चा की जाए और उनके सुझावों पर अमल किया जाए. स्थानीय अभिसूचना इकाई को भी सतर्क रखने के निर्देश दिये गये हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/do-not-do-this-work-even-by-mistake-during-dussehra-police-issued-advisory/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[श्री दुर्गा सप्तशती पाठ के 13 अध्यायों में छिपा है जीवन का रहस्य, तीसरा व चौथा बेहद खास]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/the-secret-of-life-is-hidden-in-13-chapters-of-shri-durga-saptshati-path-the-third-and-fourth-are-very-special/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: हिंदू धर्म में नवरात्रि को प्रमुख त्योहार माना गया है. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार, 3 अक्टूबर से हो चुकी है, जो शनिवार 12 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगी. ऐसे में नवरात्रि के दौरान जान लें कुछ खास बातें। नवरात्रि में मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से क्या लाभ होता है [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना</strong>: हिंदू धर्म में नवरात्रि को प्रमुख त्योहार माना गया है. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार, 3 अक्टूबर से हो चुकी है, जो शनिवार 12 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगी. ऐसे में नवरात्रि के दौरान जान लें कुछ खास बातें। नवरात्रि में मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से क्या लाभ होता है आदि सबकुछ जानेंगे इस आर्टिकल में।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अति लाभकारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्रि के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दुर्गा सप्तशती को शतचंडी, नवचंडी या चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। रामायण में भगवान राम ने भी लंका पर आक्रमण करने से पहले इस चंडी पाठ का आयोजन किया था, जिसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सभी अध्याय से मिलता है अलग-अलग लाभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दुर्गा सप्तशती के सभी 13 अध्यायों का अपना एक अलग ही महत्व है. यदि इसका पाठ श्रद्धापूर्वक किया जाए तो फल बहुत जल्दी प्राप्त होता है, लेकिन लोभ से किया गया पाठ कोई फल नहीं देता। दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक अध्याय का क्या फल है और दुर्गा सप्तशती के पाठ का क्या अलौकिक महत्व है। आज यहां हम दुर्गा सप्तशती पाठ के बारे में सभी आवश्यक और महत्वपूर्ण बात जानेंगे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 1-</strong> इसके पाठ को करने से सभी तरह की चिंता से मुक्ति मिलती हैं और शत्रु का भी डर हमारे अंदर से दूर हो जाता है. इतना ही नहीं, दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय का पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है। यह पाठ सभी प्रकार की चिंताओं को दूर करने, मानसिक विकारों से उत्पन्न बाधाओं को दूर करने, मन को सही दिशा में लगाने और खोई हुई चेतना को वापस लाने में जबरदस्त प्रभाव दिखाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 2</strong>- इसका पाठ करने से किसी भी प्रकार के विवाद या वाद-विवाद में, मकान या जमीन पर कब्जा कर लेने वाले प्रबल शत्रु के विरुद्ध विजय प्राप्त होती है। कोर्ट-कचहरी, लड़ाई-झगड़े आदि में विजय पाने के लिए यह पाठ बहुत उपयोगी है। लेकिन झूठ बोलने वालों और गलत काम करने वालों को इससे कोई लाभ नहीं मिलता।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 3-</strong> तृतीय अध्याय के पाठ से युद्ध व कोर्ट-कचहरी में विजय मिलती है तथा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए यदि आपके अकारण ही शत्रु हो रहे हैं और आप यह पता नहीं लगा पा रहे हैं कि ऐसा कौन कर रहा है तो यह पाठ उपयुक्त है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 4-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से धन-संपत्ति, सुंदर जीवनसाथी और मां की भक्ति प्राप्त होती है। भक्ति, शक्ति और तत्वज्ञान के लिए यह पाठ उन लोगों के लिए फलदायी है जो साधना में लगे हैं और समाज के हित के लिए साधना को चेतना देना चाहते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 5- </strong>इस अध्याय को पढ़ने से भक्ति मिलती है और भय, बुरे स्वप्न और भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है। भक्ति, शक्ति और दर्शन के लिए जो लोग जीवन से परेशान हैं और सोचते हैं कि हर मंदिर और दरगाह पर जाने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला, उन्हें इस अध्याय को नियमित रूप से पढ़ना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 6- </strong>इस अध्याय को पढ़ने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और सभी मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यदि भय, शंका, बाधाएं हों, राहु बहुत खराब हो, केतु पीड़ित हो, तंत्र, जादू, भूत-प्रेत आदि का भय हो तो यह अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 7-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से मन की सभी इच्छाएं या कोई विशेष गुप्त इच्छा पूरी हो जाती है। आप सच्चे मन से जो भी कामना करें और किसी को नुकसान न पहुंचाएं, यह अध्याय हर इच्छा को पूरा करने में कारगर है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 8-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से धन लाभ के साथ-साथ वशीकरण भी प्रबल होता है। मिलन और वशीकरण के लिए यह अध्याय बहुत कारगर माना जाता है। हालांकि गलत इरादे से किया गया वशीकरण आपको बुरे परिणाम भी दे सकता है। इसके तहत वशीकरण केवल अच्छे के लिए ही किया जाना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 9-</strong> इस अध्याय के पाठ से खोई हुई वस्तु को खोजने में सफलता मिलती है। धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। खोई हुई सामान ढूंढने, हर प्रकार की इच्छा पूरी करने तथा पुत्र प्राप्ति आदि के लिए यह पाठ कई लोगों के लिए घर से बाहर जाने या खो जाने के बाद वापस आने का साधन बन जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 10-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से गुम हुए व्यक्ति को ढूंढने में सफलता मिलती है। संतान प्राप्ति की शक्ति और सुख की प्राप्ति होती है। गुम हुए व्यक्ति को ढूंढने के लिए, हर मनोकामना पूरी करने के लिए, पुत्र प्राप्ति के लिए, अच्छे पुत्र की कामना करने वालों के लिए या गलत रास्ते पर जा रहे बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए यह अध्याय बहुत फलदायी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 11- </strong>ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से सभी प्रकार की चिंताओं से मुक्ति मिलती है, व्यापार में सफलता मिलती है और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है। व्यापार में सुख-संपत्ति प्राप्त करने के लिए। यदि आपको व्यापार में घाटा हो रहा है, पैसा टिकता नहीं है या बेकार की चीजों पर बर्बाद हो रहा है, तो यह पाठ आपके जीवन को बदल सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 12-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से रोगों से मुक्ति, निर्भयता और समाज में सम्मान मिलता है। मान-सम्मान और लाभ मिलता है। सम्मान जीवन का एक हिस्सा है। अगर कोई आप पर इसका आरोप लगाता है, तो यह अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>अध्याय 13-</strong> इस अध्याय को पढ़ने से देवी की भक्ति प्राप्त होती है तथा सभी इच्छित वस्तुएं प्राप्त होती हैं। भक्ति प्राप्ति के लिए पूर्ण भक्ति हेतु साधना के बाद इस अध्याय को पढ़ना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/the-secret-of-life-is-hidden-in-13-chapters-of-shri-durga-saptshati-path-the-third-and-fourth-are-very-special/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Navratri: व्रत में इन चीजों के सेवन से टूट सकता है व्रत, आइए जानते है]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/navratri-consumption-of-these-things-can-break-the-fast-lets-know/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों को समर्पित है। पंचांग के मुताबिक इस साल शारदीय नवरात्र की शुरुआत 03 अक्टूबर यानी आज से हो गई है। वहीं, इसका समापन 11 अक्टूबर को होगा। व्रत में खाने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों को समर्पित है। पंचांग के मुताबिक इस साल शारदीय नवरात्र की शुरुआत 03 अक्टूबर यानी आज से हो गई है। वहीं, इसका समापन 11 अक्टूबर को होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत में खाने वाली चीजें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यता है कि शारदीय नवरात्रों में व्रत में खान-पान में नियमों का पालन न करने से शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है। ऐसे में आइए इस लेख में जानते हैं कि शारदीय नवरात्र व्रत में किन चीजों का सेवन कर सकते हैं और किन चीजों से परहेज करना चाहिए?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> इन्हीं चीजों का करें सेवन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शारदीय नवरात्रि में सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर व्रत रखें। पूरे दिन फल खा सकते है। इसके अलावा समा के चावलों से खीर या खिचड़ी बनाकर खा सकते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>समा के चावलों के अलावा साबूदाने से बने भोजन का भी सेवन कर सकते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अपने व्रत की थाली में साबूदाने से बने भोजन के अलावा आलू से बने चिप्स और आलू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>व्रत में व्रत के पूरा होने पर कुट्टू के आटे से बनी रोटी और दूध या दही को भी व्रत की थाली में शामिल कर सकते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन चीजों से करें परहेज</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शारदीय नवरात्रों में प्याज और लहसून के खाने से परहेज करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>व्रत के भोजन में साधारण की बजाय सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इन नवरात्रों में भूलकर भी मांस या मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/navratri-consumption-of-these-things-can-break-the-fast-lets-know/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बापू की नोटों पर तस्वीर की कहानी काफी रोचक, क्या आपको पता है कब छपी थी पहली बार गांधी की तस्वीर?]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/the-story-of-bapus-picture-on-the-notes-is-quite-interesting-do-you-know-when-gandhis-picture-was-printed-for-the-first-time/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: याद है 2 अक्टूबर 1969, महात्मा गांधी का 100वां जन्मदिन. ये वो तारीख है जब पहली बार महात्मा गांधी की तस्वीर वाला नोट जारी किया गया था. इसमें गांधी जी को बैठे हुए दिखाया गया था. नोट पर पीछे सेवाग्राम आश्रम छपा हुआ था। आज 2 अक्टूबर 2024 है. महात्मा गांधी का 155वां जन्मदिन. [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> याद है 2 अक्टूबर 1969, महात्मा गांधी का 100वां जन्मदिन. ये वो तारीख है जब पहली बार महात्मा गांधी की तस्वीर वाला नोट जारी किया गया था. इसमें गांधी जी को बैठे हुए दिखाया गया था. नोट पर पीछे सेवाग्राम आश्रम छपा हुआ था। आज 2 अक्टूबर 2024 है. महात्मा गांधी का 155वां जन्मदिन. ऐसे में आइए जानते हैं कि हमारे पास मौजूद नोटों में महात्मा गांधी की तस्वीर कैसे आई?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आजादी के 40 वर्ष बाद आया नोटो पर बापू की तस्वीर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि आजादी के बाद भी करीब चालीस साल तक सभी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी. 1996 में नोटों की नई सीरीज आई और इसके बाद ही करेंसी पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपने लगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>1949 में सबसे पहले 1 रुपए का नोट छपा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, लेकिन 26 जनवरी 1950 को यह गणतंत्र बना यानी आधिकारिक तौर पर आजादी मिली। तब तक रिजर्व बैंक केवल चालू मुद्रा नोट जारी कर रहा था। रिजर्व बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, सरकार ने सबसे पहले 1949 में 1 रुपये के नोट का नया डिजाइन तैयार किया था. उस वक्त नोटों पर ब्रिटेन के महाराजा की तस्वीर छपती थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नोटों पर बापू की तस्वीर की मांग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस वक्त इस बात पर सहमति बनी थी कि नोटों पर ब्रिटेन के महाराजा की जगह महात्मा गांधी की तस्वीर छापी जाएगी, लेकिन बाद में फैसला लिया गया कि नोटों पर अशोक स्तंभ की तस्वीर छापी जाएगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बापू की जगह अशोक स्तंभ की तस्वीर छपी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मालूम हो कि 2, 5, 10 और 100 रुपये के नोट पहली बार 1950 में छापे गए थे। इन सभी नोटों पर अशोक स्तंभ की तस्वीर छपी थी। 1953 में नोटों पर हिंदी प्रमुखता से छापी जाने लगी. इसके बाद 1954 में फिर से एक हजार, दो हजार और 10 हजार रुपये के नोट जारी किए गए लेकिन 1978 में इन्हें बंद कर दिया गया, यानी इन्हें चलन से बाहर कर दिया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>किस प्रकार आई बापू की तस्वीर?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>1972 में रिजर्व बैंक ने 20 रुपये का नोट जारी किया और 1975 में 50 रुपये का नोट जारी किया. फिर 80 के दशक में नोटों की नई सीरीज जारी की गईं. 1 रुपए के नोट पर तेल का कुआं छपा था, 2 रुपए के नोट पर आर्यभट्ट का उपग्रह छपा था, 5 रुपए के नोट पर ट्रैक्टर से खेत जोतता किसान छपा था और 10 रुपए के नोट पर कोणार्क मंदिर चक्र, मोर और शालीमार गार्डन छपा था। यह वह दौर था जब अर्थव्यवस्था बढ़ रही थी और लोगों की क्रय शक्ति भी बढ़ रही थी। इसलिए रिजर्व बैंक ने 500 रुपये का नोट जारी किया. इस पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी थी. वॉटरमार्क में अशोक स्तंभ रखा गया था.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>1996 में नए करेंसी जारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>1996 में रिज़र्व बैंक ने कई सुरक्षा सुविधाओं के साथ 'महात्मा गांधी श्रृंखला' के नए मुद्रा नोट जारी किए। वॉटरमार्क भी बदले गए. इसमें ऐसा फीचर भी जोड़ा गया, जिससे अंधा भी नोट को आसानी से पहचान सके.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मौजूदा समय में सभी नोटों पर गांधी जी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>9 अक्टूबर 2000 को आरबीआई ने एक हजार रुपये का नोट जारी किया था. 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी हुई थी. महात्मा गांधी सीरीज के 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद दो हजार रुपये का नोट लाया गया. इसमें गांधीजी की तस्वीर भी छपी थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नोट पर जो बापू की तस्वीर है, वो कब की है?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह सवाल अक्सर मन में आता है कि नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर कब छपती है? यह तस्वीर 1946 में ली गई थी। यह तस्वीर तब ली गई थी जब महात्मा गांधी लॉर्ड फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ विक्ट्री हाउस आए थे।गांधी जी की जो तस्वीर लगाई गई है, उसमें वह पेथिक लॉरेंस के साथ खड़े हैं. इस तस्वीर में गांधीजी की मुस्कान साफ नजर आ रही थी, इसलिए इसे नोट पर छापने के लिए चुना गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
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                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[UP News: सीएम योगी ने त्योहार को देखते हुए दिया बड़ा तोहफा, दीपावली पर मिलेंगे ये फ्री]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/up-news-cm-yogi-gave-a-big-gift-in-view-of-the-festival-you-will-get-this-free-on-diwali/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी त्योहारों नवरात्रि और दिवाली को देखते हुए उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा दिया है। दिवाली के मौके पर सीएम योगी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने का ऐलान किया है. इससे प्रदेश के करीब 2 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा. इस त्योहार पर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी त्योहारों नवरात्रि और दिवाली को देखते हुए उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा दिया है। दिवाली के मौके पर सीएम योगी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने का ऐलान किया है. इससे प्रदेश के करीब 2 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा. इस त्योहार पर मुफ्त सिलेंडर महिलाओं के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बैठक में लिया गया फ्री सिलेंडर देने का फैसला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>त्योहारों के मद्देनजर सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक की और सभी को जरूरी दिशा-निर्देश दिए. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिवाली पर महिलाओं को मुफ्त सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. सीएम ने कहा कि संबंधित अधिकारी इससे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर लें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने ट्वीट कर दी जानकारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सीएम ने इसकी जानकारी देते हुए ट्विटर पर लिखा- "दिवाली के अवसर पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर वितरित किया जाना है. हर हाल में दिवाली से पहले सभी लाभुकों के घर पर एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध हो जाना चाहिए."</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दीपावली पर पहला मुफ्त सिलेंडर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुख्यमंत्री योगी ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि पहला मुफ्त सिलेंडर देने की सभी औपचारिकताएं दिवाली तक समय पर पूरी कर ली जाएं. यूपी में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के दो करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं. इनमें से कई ऐसे हैं जिनका गैस कनेक्शन आधार से लिंक नहीं है. ऐसे में कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं. सीएम ने अधिकारियों को इस संबंध में काम करने को भी कहा है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान किया था ऐलान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल में दो त्योहारों पर मुफ्त सिलेंडर देने का ऐलान किया था. इसके तहत होली और दिवाली के त्योहारों पर उज्ज्वला योजना के तहत ये सिलेंडर मुफ्त दिए जाते हैं. ये सिलेंडर उज्ज्वला की शर्तें पूरी करने वाले परिवारों को दिए जाते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/up-news-cm-yogi-gave-a-big-gift-in-view-of-the-festival-you-will-get-this-free-on-diwali/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Surya Grahan 2024: आज लगेगा सूर्य ग्रहण, क्या भारत में भी होगा मान्य]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/surya-grahan-2024-solar-eclipse-will-take-place-today-will-it-be-valid-in-india-also/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: आज साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में भी इसका विशेष महत्व है क्योंकि सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है।इसलिए जब भी सूर्य से संबंधित कोई हलचल होती है तो उसका सीधा असर पृथ्वी पर रहने वाले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> आज साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में भी इसका विशेष महत्व है क्योंकि सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है।इसलिए जब भी सूर्य से संबंधित कोई हलचल होती है तो उसका सीधा असर पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों पर पड़ता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>साल का आज आखिरी सूर्य ग्रहण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसे में सूर्य ग्रहण को लेकर न सिर्फ वैज्ञानिक बल्कि ज्योतिषी भी अलर्ट रहते हैं. साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कन्या राशि और हस्त नक्षत्र में लगने जा रहा है। आइए जानते हैं साल के आखिरी सूर्य ग्रहण से जुड़ी सभी खास जानकारी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन जगहों पर दिखेगा सूर्य ग्रहण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण आज आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगने जा रहा है। यह ग्रहण दक्षिणी अमेरिका के उत्तरी भागों, उरुग्वे, ब्यूनस आयर्स, बेका आइलैंड, फ्रेंच पॉलिनेशिया महासागर, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, आर्कटिक, चिली, पेरू, होनोलूलू, अंटार्कटिका, अर्जेंटीना, उत्तरी अमेरिका के दक्षिण भाग फिजी, मेक्सिको, पेरू, न्यू चिली, ब्राजील में कुछ जगहों पर दिखाई देगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज रात 9:12 बजे शुरू होगा ग्रहण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भारतीय समय के मुताबिक आज साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. यह ग्रहण भारतीय समयानुसार आज रात 9:12 बजे शुरू होगा और 3 अक्टूबर को दोपहर 3:17 बजे समाप्त होगा। इस सूर्य ग्रहण का केंद्रीय समय दोपहर 12:15 बजे होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा. यानि इस ग्रहण का देश पर कोई भौतिक प्रभाव, आध्यात्मिक प्रभाव, सूतक प्रभाव या किसी भी प्रकार का धार्मिक प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत में रहने वाले लोगों की दिनचर्या सामान्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस ग्रहण के दौरान भारत में रहने वाले सभी लोगों की दिनचर्या सामान्य रहेगी। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण जहां भी लगता है और जहां भी दिखाई देता है उसका प्रभाव पड़ता है। इसलिए चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका भारत के लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत में नियम पालन करने की जरुरत नहीं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सूतक आमतौर पर ग्रहण काल ​​के दौरान लगता है। इस दौरान कई सावधानियां बरतनी होंगी। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गर्भवती महिलाओं को भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि जिन स्थानों पर यह ग्रहण दिखाई देगा वहां रहने वाले भारतीय सूतक के नियमों का पालन कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ग्रहण के दौरान करें ये कार्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करना विशेष लाभकारी रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ग्रहण के दौरान की गई पूजा अवश्य स्वीकार होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ग्रहण काल ​​के दौरान किसी मंत्र को सिद्ध करना या दीक्षा लेना विशेष<br>शुभ होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ग्रहण के बाद स्नान करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ग्रहण के दौरान खाना न खाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ भी नहीं खाना चाहिए। स्कंद पुराण में भी बताया गया है कि सूर्य ग्रहण के दौरान खाना खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. यह भी कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण के समय भोजन करने से सभी पुण्य और कर्म नष्ट हो जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/surya-grahan-2024-solar-eclipse-will-take-place-today-will-it-be-valid-in-india-also/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[सीएम योगी का नवरात्रि को लेकर बड़ा फैसला, 9 दिनों तक बंद रहेगी नॉन वेज की दुकान]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/top-news/cm-yogis-big-decision-regarding-navratri-non-veg-shops-will-remain-closed-for-9-days/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ:&nbsp; उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में शारदीय नवरात्रि के त्योहार को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है. प्रशासन ने अयोध्या भर में 9 दिन यानी 12 अक्टूबर तक मांस मछली की बिक्री पर लगाम लगा दी है.&nbsp; इस दौरान नॉन वेज की सभी दुकानें बंद रहेगी। पूरी नवरात्रि बंद रहेगी दुकान बता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong>&nbsp; उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में शारदीय नवरात्रि के त्योहार को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है. प्रशासन ने अयोध्या भर में 9 दिन यानी 12 अक्टूबर तक मांस मछली की बिक्री पर लगाम लगा दी है.&nbsp; इस दौरान नॉन वेज की सभी दुकानें बंद रहेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूरी नवरात्रि बंद रहेगी दुकान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यह आदेश खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त ने जारी किया है. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) से शुरू हो रहा है। इसे देखते हुए डीसी ने इन पवित्र दिनों में नॉन वेज की दुकानों को बंद करने का फैसला सुनाया है. इसका पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":18339,"sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image.png" alt="" class="wp-image-18339"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्रद्धालु की आस्था को देखते हुए लिया गया निर्णय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन के लिए राम नगरी अयोध्या पहुंचते हैं। नवरात्र मेले को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत पूरे जिला क्षेत्र में 3 अक्टूबर से रात 12 बजे तक मांस, मछली और अंडे की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. इस फैसले का उल्लंघन करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मैहर में भी पूरी तरह रहेगा मांस मछली पर रोक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के मैहर नगर क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि के त्योहार को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है. प्रशासन ने मैहर भर में 9 दिन यानी 12 अक्टूबर तक मांस मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मैहर SDM ने जारी किया आदेश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यह आदेश मैहर एसडीएम ने जारी किया है. शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) से शुरू हो रहा है। इसे देखते हुए एसडीएम ने यह निर्णय लिया है। इसका पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/top-news/cm-yogis-big-decision-regarding-navratri-non-veg-shops-will-remain-closed-for-9-days/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Indira Ekadashi: आज है इंदिरा एकादशी, जाने शुभ मुहूर्त और पारण के नियम]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/indira-ekadashi-today-is-indira-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-rules-of-parana/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक एकादशी का व्रत माना जाता है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह एकादशी 28 सितंबर को पड़ेगी। 28 सितंबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। जाने इंदिरा एकादशी के पारण का नियम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक एकादशी का व्रत माना जाता है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह एकादशी 28 सितंबर को पड़ेगी। 28 सितंबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। जाने इंदिरा एकादशी के पारण का नियम</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पारण के नियम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यताओं के मुताबिक इस शुभ दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं और महिलाएं कठोर व्रत का पालन करती हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान कर ले। पीले और साफ कपड़े पहनें। अपने घर और मंदिर की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि पूर्वक पूजा करें। हल्दी और चंदन का टीका लगाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं। पीले फूलों की माला पहनाएं। घर में बनी हुई मिठाइयों और फलों का भोग लगाएं। मंत्रों का जाप करें। प्रतिमा की आरती करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शनिवार 27 सितंबर को दोपहर 01 बजकर 20 मिनट से आरंभ होगी। जो रविवार 28 सितंबर को दोपहर 02 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। पंचांग के आधार पर 28 सितंबर को इंदिरा एकादशी व्रत का उपवास किया जाएगा। इसके साथ ही 29 सितंबर को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से लेकर 08 बजकर 36 मिनट के बीच व्रत का पारण किया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/indira-ekadashi-today-is-indira-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-rules-of-parana/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Conclusion: महालक्ष्मी व्रत के समापन के दौरान रखें इन बातों का विशेष ध्यान]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/conclusion-pay-special-attention-to-these-things-during-the-conclusion-of-mahalakshmi-fast/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत का आरंभ हुआ है। जिसका समापन आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। ऐसे में इस साल इस व्रत की शुरुआत बुधवार, 11 सितंबर से हो चुकी है, जिसका समापन आज मंगलवार, 24 सितंबर को होगा। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत का आरंभ हुआ है। जिसका समापन आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। ऐसे में इस साल इस व्रत की शुरुआत बुधवार, 11 सितंबर से हो चुकी है, जिसका समापन आज मंगलवार, 24 सितंबर को होगा। महालक्ष्मी के व्रत के समय इन नियमों का ध्यान रखेंगे तो लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मां लक्ष्मी के प्रवेश के लिए ये करें तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार से ही मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। इस स्थान पर साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मुख्य द्वार पर कभी अंधेरा न हो। इसी के साथ मुख्य द्वार पर गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। मुख्य द्वार पर शुभ-लाभ और स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। लक्ष्मी जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक भी जरूर जलाएं। इससे मां लक्ष्मी के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में बहुत शुभ और पूजनीय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में हरा-भरा तुलसी का पौधा होता है। वहां मां लक्ष्मी का वास हमेशा रहता है, इसलिए अपने घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन उसकी पूजा-अर्चना व देखभाल करनी चाहिए। लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए महालक्ष्मी व्रत के दौरान अपने घर में एक नारियल अवश्य रखना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तंगी से बचने के लिए करें ये उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नारियल रखने से मां लक्ष्मी खुश होती हैं। साथ ही पूजा के दौरान कुछ सफेद कौड़िया लेकर उन्हें हल्दी या केसर के पानी में भिगोकर रखना चाहिए । अब इसके सूख जाने के बाद एक लाल कपड़े में बांधकर उस जगह रख दें जहां संपत्ति रखी हो। ऐसा करने से कभी कंगाली नहीं आती। इसी के साथ आप तिजोरी में कुबेर देव या गणेश जी की प्रतिमा को भी जरूर रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/conclusion-pay-special-attention-to-these-things-during-the-conclusion-of-mahalakshmi-fast/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Karwa Chauth 2024: करवा चौथ का व्रत कब, नोट कर लें शुभ मुहूर्त और खास पकवान के लिस्ट]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-2024-when-is-the-fast-of-karwa-chauth-note-down-the-auspicious-time-and-list-of-special-dishes/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ: हमारे देश में हमेशा एक न एक पर्व त्योहार आते ही रहता है। इस बीच महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ का व्रत जल्द ही आने वाला है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती है. यह उपवास दिन भर निर्जला रखा जाता है और रात होते ही शुभ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ:</strong> हमारे देश में हमेशा एक न एक पर्व त्योहार आते ही रहता है। इस बीच महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ का व्रत जल्द ही आने वाला है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती है. यह उपवास दिन भर निर्जला रखा जाता है और रात होते ही शुभ मुहूर्त में चांद को देखकर व्रत का पारण किया जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अक्टूबर में है पर्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें इस बार करवा चौथ का पूजा अक्तूबर माह में रखा जाएगा. तो आइए जानते हैं यह व्रत किस दिन को है और इसका महत्व क्या है। साथ ही जानेंगे इस दिन बनाए जाने वाले खास पकवान क्या-क्या है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब है करवा चौथ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>करवा चौथ का पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाने की परंपरा है. इस बार करवा चौथ का व्रत 20 अक्तूबर को है. इस दिन चतुर्थी तिथि 20 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 46 मिनट पर लग जाएगी. जो अगले दिन 21 अक्टूबर को 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 46 मिनट से लेकर 7 बजकर 02 मिनट तक रहेगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत के दिन चन्द्रोदय का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>करवा चौथ के दिन चंद्रउदय शाम 7 बजकर 54 मिनट पर होगा। इसके बाद महिलाएं चंद्रदर्शन कर अपने उपवास का पारण कर सकती हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पर्व पर बनाएं ये स्पेशल व्यंजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि व्रत वाले दिन पर लोगों के यहां परंपरा के अनुसार कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं. इस स्पेशल दिन पर कई महिलाएं अपने घरो में दाल का फरे , कढ़ी और मीठे में खीर या सिंवई स्पेशल डिश के तौर पर बनाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-2024-when-is-the-fast-of-karwa-chauth-note-down-the-auspicious-time-and-list-of-special-dishes/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Radha Asthami: राधा अष्टमी में व्रत कर सकते समय रखें इस बात का खास ध्यान]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/radha-asthami-take-special-care-of-the-time-when-you-can-fast-on-radha-ashtami/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा रानी का धरती पर आती है, इसलिए इस दिन को राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं और लड़कियां लंबी आयु और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong> हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा रानी का धरती पर आती है, इसलिए इस दिन को राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  महिलाएं और लड़कियां लंबी आयु और राधा रानी की कृपा पाने के लिए उपवास करती है। यदि आप व्रत रखती है तो आपकों कुछ बातों को जानना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। जो 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट अगले दिन समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय की सहायता से तिथि की गणना की जाती है। ऐसे में 11 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। राधा अष्टमी का शुभ मुहूर्त 11 सितंबर की सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 01 बजकर 32 मिनट तक होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खाने से पहले राधा रानी को भोग लगाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राधा अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में सुबह जल्दी नहाकर राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान आप आलू, साबूदाना की सब्जी, शकरकंद और कुट्टू के आटे के पकोड़े, फल और मिठाई का सेवन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त दूध और दही को अपने फलाहार में शामिल कर सकते हैं। खाना बनाने में केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। इस बात का खास ध्यान रखें कि खाने से राधा रानी को भोग लगाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/radha-asthami-take-special-care-of-the-time-when-you-can-fast-on-radha-ashtami/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कल हैं गणेश चतुर्थी तो जान ले शुभ मुहूर्त, इस दिन चांद देखने से लगता है झूठा आरोप, भगवान कृष्ण पर भी लगा था]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/tomorrow-is-ganesh-chaturthi-so-know-the-auspicious-time-seeing-the-moon-on-this-day-leads-to-false-accusation-lord-krishna-was-also-accused/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ : गणेश उत्सव का त्योहार हर साल पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर 10 दिनों तक चलता है। वर्ष 2024 में गणेश पर्व का आरंभ 7 सितंबर, शनिवार 2024 से होगी और 17 सितंबर 2024 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ </strong>: गणेश उत्सव का त्योहार हर साल पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर 10 दिनों तक चलता है। वर्ष 2024 में गणेश पर्व का आरंभ 7 सितंबर, शनिवार 2024 से होगी और 17 सितंबर 2024 को अनंत चतुर्दशी के दिन इस त्योहार का आखिरी दिन होगा. ऐसे में कल शनिवार को बड़े धूमधाम से इस पर्व को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चतुर्थी के दिन तिथि 06 सितंबर, 2024 को दोपहर 3 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं चतुर्थी तिथि अगले दिन 07 सितंबर, 2024 शनिवार को शाम 5 बजकर 37 मिनट पर खत्म होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चतुर्थी पर चांद देखना वर्जित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि ऐसा करने से झूठा आरोप लगता है। इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर चोरी का झूठा आरोप लग सकता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर भी चोरी का झूठा आरोप लगाया गया था क्योंकि उन्होंने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा देखा था। एक दिन पूर्व यानि 6 सितंबर को वर्जित चन्द्रदर्शन का समय दोपहर 3 बजकर 01 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. कुल अवधि 05 घंटे 15 मिनट होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे करें पूजा-अर्चना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणेश चतुर्थी के दिन पूजन विधि का खास ख्याल रखना चाहिए<br>इस तिथि पर नहाकर साफ वस्त्र धारण करना चाहिए।<br>घर में उत्तर या पूर्व दिशा में गणेश जी की मूर्ति बैठाना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा में शामिल करें ये साम्रगी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इत्र, मोदक, चंदन, हल्दी, दूर्वा घास, अक्षत जरुर रखें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणेश जी को धूप-दीप और फूलों की माला पहना कर पूजा की शुरुआत अति शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मिट्टी से बनी मूर्ति ही लाएं घर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

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<p>अगर आप भी इस साल भगवान गणेश की मूर्ति घर लाने की सोच रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान गणेश की मूर्ति मिट्टी से बनी हो। भगवान गणेश की मूर्ति घर लाते समय उसे साफ कपड़े से ढक दें। अपने पूजा स्थल पर जल से भरा हुआ एक कलश स्थापित करें। इसके बाद पूजा की शुरुआत करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/tomorrow-is-ganesh-chaturthi-so-know-the-auspicious-time-seeing-the-moon-on-this-day-leads-to-false-accusation-lord-krishna-was-also-accused/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Hartalika Teej: आज हरतालिका तीज , जानें पूजा से जुड़ी हर बातें]]></title>
                    <link>https://up.inkhabar.com/festival/hartalika-teej-today-hartalika-teej-know-everything-related-to-the-puja/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हरतालिका तीज आज शुक्रवार 6 सितंबर को है. इस पर्व के रखने से सुहागिन महिलाओं को पति की दीर्घायु और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा वर पाने का आशीर्वाद  मिलता है. इस पर्व को करने से महिलाओं पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा रहती है. इस दिन उपवास [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://up.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/02/download-1-1.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>लखनऊ।</strong>  हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हरतालिका तीज आज शुक्रवार 6 सितंबर को है. इस पर्व के रखने से सुहागिन महिलाओं को पति की दीर्घायु और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा वर पाने का आशीर्वाद  मिलता है. इस पर्व को करने से महिलाओं पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा रहती है. इस दिन उपवास रखने से लोगों को सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा मिलता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

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<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद महीना के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी गुरुवार दोपहर 12:21 बजे पर शुरू होगी और 06 सितंबर को दोपहर 03:21 बजे पर समाप्त होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हरतालिका तीज आज</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

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<p>उदयातिथि के मुताबिक, हरतालिका तीज का उपवास आज 06 सितंबर को रखा जाएगा. इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 06:02 बजे से सुबह 08: 33 बजे तक रहने वाला है. इस मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान और पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है.</p>
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<h2 class="wp-block-heading"><strong>महिलाएं व्रत में झूला झूलती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

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<p>इस व्रत में महिलाएं झूले लगाती हैं, जिस पर वे एक दूसरे को झूला झुलाती हैं, संगीत और भगवान का भजन गाती है. इस दिन सास और घर के बड़े लोग,&nbsp; नई दुल्हन को कपड़े, हरी चूड़ियां, श्रृंगार का सामान और मिठाइयां देती हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दुल्हन का शृंगार और सुहाग हमेशा बना रहे और घर में वंश की वृद्धि हो.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत पर इन चीजों का लगाएं भोग</strong></h2>
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<p>बता दें कि हरतालिका तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र प्रेम का प्रतीक है. इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती को संतरा,&nbsp;&nbsp; पेड़ा, बर्फी, बादाम, काजू, पिस्ता, पान, आम, खीर, केला, सेब, अंगूर,&nbsp; मठरी, पिरिकिया, गंगाजल, भांग, चंदन, बेल पत्र, दूध, धतूरा और अक्षत चढ़ाएं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<h2 class="wp-block-heading"><strong>तीज पर फलों के ताजा भाव (रुपये में)</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नासपाति 100– 120 किलो<br>नारंगी 140– 150 किलो<br>खीरा 40– 50 किलो<br>सेब 120– 140 किलो<br>मौसमी 80– 100 किलो<br>आनार 220–240 किलो<br>नारियल 50– 70 पीस<br>अमरूद 40– 50 किलो<br>केला 50– 70 दर्जन</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>February 12, 2025, 6:37 am</pubDate>
                    <guid>https://up.inkhabar.com/festival/hartalika-teej-today-hartalika-teej-know-everything-related-to-the-puja/</guid>
                    <copyright>UP Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item></channel></rss>